CGWALL से बोले हरीश केडिया–केन्द्र और राज्य दोनों सरकारें इस बात को समझें कि उद्योग–धंधे चालू रखना जरूरी है,इसके लिए भयमुक्त माहौल बनाना होगा

सीजीवालडॉटकॉम“ केंद्र और राज्य सरकार दोनों को यह समझने की जरूरत है कि उद्योग –  धंधे को चालू रखना बहुत जरूरी है  । उद्योग- धंधे बंद होने से देश के साथ ही सभी का  नुकसान हो रहा है  । उद्योग धंधे को चालू रखने के लिए भयमुक्त वातावरण बनाने की जरूरत है  । साथ ही ऐसा  इंतजाम किया जाना चाहिए जिससे उद्योगों को आसानी से कच्चा माल मिल सके और उनका सामान बाहर जा सके । सरकारी खरीदी का पैसा भी उद्योग -व्यापार जगत को तत्काल मुहैया कराना चाहिए । इससे उद्योग – धंधों का कामकाज आसानी से हो सकेगा । ”  यह बातें छत्तीसगढ़ लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष हरीश केडिया ने एक बातचीत के दौरान कही. सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप NEWS ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

कोरोना  संकट के दौर में लाक डाउन के दौरान इससे जुड़ी सभी परिस्थितियों पर नजर रखे हुए हरीश केडिया से लंबी बातचीत हुई । उन्होंने कई व्यावहारिक बातें सामने रखी और समस्याओं के साथ ही सुझाव भी बताए  कि संकट के इस दौर में स्थिति से निपटने के लिए किस तरह के उपाय कारगर हो सकते हैं ।  हरीश केडिया कहते हैं कि कोरोना  का संकट बढ़ता जा रहा है और उद्योग की हालत सुधरती जा रही है । उनका मानना है कि लॉकडाउन-  वन में सब कुछ पूरी तरह से बंद था । लॉकडाउन – टू में थोड़ी राहत मिली । अब लॉकडाउन – थ्री में ज्यादा राहत मिल रही है  । जिससे स्थिति सुधार की तरफ बढ़ रही है । वे कहते हैं कि उद्योग के सामने कई तरह की समस्याएं हैं । उद्योग को चलाने के लिए भयमुक्त वातावरण जरूरी है । इस समय भय का वातावरण  चारों तरफ है। एक तरफ कोरोना का भय है।   उधर पुलिस का भय है। साथ ही  रोज़ नए – नए सर्कुलर जारी होने से लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि आगे की रूपरेखा क्या होगी….?   हर जिले में अलग-अलग तरह की व्यवस्था होने से भ्रम की स्थिति हमेशा बनी रहती है ।

उन्होने कहा कि मजदूरों की भी समस्या है । आसपास के मजदूर आ रहे हैं । जिले के भीतर के मजदूरों का आना शुरू हो गया है । लेकिन जिले के बाहर के मजदूर नहीं आ पा रहे हैं । उन्हें कहीं गांव वालों का डर है । कोरोना का डर है। या फिर पुलिस व्यवस्था से भी डर बना हुआ है  । उद्योगों के सामने एक बड़ी समस्या यह है कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में आर्डर नहीं है।  जो हमारा खरीदार है उसके सामने अनिश्चय की स्थिति है । उसे समझ नहीं आ रहा है कि यह सब कितने दिन चलेगा और आगे इसका क्या असर होगा । खरीदार भी डर डर कर आर्डर दे रहा है । इसी तरह से उद्योगों के सामने फाइनेंस की भी समस्या है ।  लॉक डाउन के पहले जिन्हें माल दिया गया था ,उनका पैसा अब तक नहीं मिल पाया है । ऐसे में उद्योगों को चलाने में सबसे ज्यादा  दिक्कतें आ रही है।  सरकार ने राहत पैकेज के तहत लोन मैं सहूलियत देने की बात की है । लेकिन बैंक मैं निचले स्तर के अधिकारियों की मानसिकता अभी नहीं बन पाई है ।  इस तरह की दिक्कतें हैं । हालांकि हरीश केडिया यह भी मानते हैं  कि रोज-रोज दिक्कतें दूर होती जा रही हैं । यह एक अच्छा संकेत है। वे कहते हैं जब  भी शत प्रतिशत लॉक डाउन खुलेगा ,तब इस तरह की समस्या सामने होगी । लेकिन धीरे धीरे कर खोलने से उसका समाधान भी निकलता जाएगा । उनका मानना है कि केंद्र और राज्य  दोनों ही सरकारों को समझने की जरूरत है कि उद्योग – धंधों  को बंद करना आसान है । बंद करने से व्यवसाई को कम नुकसान होता है  । लेकिन देश को जबरदस्त नुकसान होता है । उन्होंने उदाहरण दिया कि उद्योग- धंधा बंद होगा तो जीएसटी पटाने की जरूरत नहीं होगी  । सरकार को टैक्स नहीं मिलेगा। उद्योग को मुनाफ़ा नहीं होगा तो  इनकम टैक्स देने की जरूरत नहीं पड़ेगी  । एक तरफ उद्योग  – व्यवसाय टैक्स नहीं देंगे और दूसरी तरफ राहत पैकेज की मांग करेंगे  । जिससे सरकार के पास रिवेन्यू के रूप में पैसा तो आएगा नहीं और राहत पैकेज का दबाव अलग रहेगा । ऐसे में यदि उद्योग -धंधे चालू रखे जाएं तो सरकार को राजस्व भी मिलेगा और राहत पैकेज की भी जरूरत नहीं पड़ेगी ।

एक सवाल के जवाब हरीश ने कहा कि व्यवस्था में बैठे लोग लगता है कि इस स्थिति में मजा ले रहे हैं ।  जब उनसे पूछा गया कोरोना  संकट के इस दौर में मजदूरों से काम लेने और फिर से फैक्ट्री  चलाने में क्या संक्रमण फैलने का खतरा नहीं होगा ….?  इस सवाल के जवाब में हरीश केडिया  कहते हैं कि 23 अप्रैल को जैसे ही फैक्ट्री चालू करने के आदेश मिले ,उसके बाद संक्रमण रोकने की दिशा में कई कारगर उपाय किए गए । जिसके तहत 3 दिनों तक सभी  फैक्ट्रियों को पूरी तरह से सैनिटाइज कराया गया । उद्यमियों को लिस्ट बनाकर दी गई कि उन्हें क्या-क्या काम करना है । मसलन सभी को मास्क पहनना है।  साबुन से लगातार हाथ धोना है और दूरी बनाकर बैठना है । इस तरह के निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है । उद्योगपति भी समझदार है।  मजदूर वर्ग भी जागरूक हो गया है । मीडिया के जरिए यह बात पहुंच रही है और लोग  सतर्कता  भी बरत रहे हैं । उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में कोरोना तभी आएगा ,जब बाहर से कोई लेबर,  पर्यटक या नाते- रिश्तेदार छत्तीसगढ़ आएंगे ।  छत्तीसगढ़ के लोगों से कोरोना का ख़रता नहीं है।  आज जो लोग बाहर से आ रहे हैं , उनकी कड़ाई से जांच होनी चाहिए । तभी छत्तीसगढ़ कोरोना मुक्त होगा ।

देश की आर्थिक स्थिति से जुड़े सवाल पर हरीश केडिया  कहते हैं कि इस दौर में देश ,प्रदेश, उद्योगपति , किसान ,कामगार सभी  की आर्थिक स्थिति पर विपरीत असर पड़ा है । बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो रहे हैं । उद्योगों में काम करने वाले लोगों को वेतन किसी तरह दिया जा रहा है । लेकिन एक्स्ट्रा मजदूर से काम नहीं लेने के कारण उनके सामने संकट की स्थिति है । सब्जियों की हालत यह है कि किसान अपना उत्पाद बाहर नहीं भेज पा रहे हैं।  उन्हें भी भाव नहीं मिल रहा है । उपभोक्ता को भले ही सही मिल जाए पर किसानों की स्थिति काफी खराब है।  बाहर और औद्योगिक क्षेत्रों में सब्ज़ियां नहीं जा पा रही हैं । एक बड़ी समस्या है यह भी है कि कभी शनिवार बंद, इतवार बंद, बुधवार बंद….. नए नए आदेश जारी कर लोग मजा ले रहे हैं  । ऐसा लगता है जैसे उनकी कोशिश है कि लोगों को आखिर कितना परेशान किया जा सकता है।  इसकी वजह से भ्रम की स्थिति रहती है और रोज पूछना पड़ता है कि आज क्या है ….?  यह पूछे जाने पर कि बाहर काम पर गए मजदूरों के बारे में किस तरह की व्यवस्था होनी चाहिए ….?  इस सवाल पर हरीश केडिया ने कहा कि या  तो मजदूरों को वापस लाना पड़ेगा या उन्हें वहीं पर काम देना होगा  । जैसे कर्नाटक सरकार ने किया है कि एक भी लेबर को जाने की जरूरत नहीं है । उन्होंने सभी ट्रेन कैंसिल की और दो हजार करोड़ का तुरंत काम मंजूर करके सभी को काम पर लगाया । इस तरह काम दिया जाए या फिर  फिर मजदूरों को उनके घर छोड़ा जाए  । मजदूरों के साथ दिक्कत है वह घर से भी बाहर हैं और उन्हें काम भी नहीं मिल रहा है । छत्तीसगढ़ के मजदूरों के बारे में वे  कहते हैं कि यह छत्तीसगढ़ के लेबर के वापस लौटने का समय है।  ज्यादातर मजदूर मई या जून महीने में वापस लौट कर खेती का काम शुरू  करते हैं । उनके काम और कमाई का प्रमुख समय अप्रैल-मई होता है । इस बार लॉकडाउन के कारण उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा है ।

यह पूछे जाने पर कि सरकार की ओर से उद्योग – व्यवसाय को किस तरह का सहयोग किया जाना चाहिए ….. ? इस बारे में हरीश केडिया ने कहा   कि  उद्योग – व्यवसाय का जो पैसा सरकार के पास रुका हुआ है, उसका भुगतान तत्काल किया जाना चाहिए ।  हम किसी राहत की बात नहीं करते । हमारा पैसा तत्काल दे दिया जाए ,यही सबसे बड़ी राहत होगी।  इसी तरह जिन बड़े उद्योगपतियों के पास हमारा पैसा रुका है ,उन्हें भी तत्काल भुगतान का निर्देश देना चाहिए । यह सबसे बड़ी मदद होगी ।  इसी तरह उद्योगों का जो उत्पाद बाहर जाता है या कच्चा माल अन्य राज्यों से आता है ,वह सुविधाजनक ढंग से आए – जाए तो काफी मदद मिल सकती है ।  इससे काम भी आसान होगा और पुरानी दर पर ही ट्रांसपोर्टिंग हो सकेगी । शासन- प्रशासन को चाहिए कि वह लगातार स्टेटमेंट जारी करें की उद्योग – व्यापार भयमुक्त होकर चलाएं  । इससे भी काम करने में आसानी होगी ।

छत्तीसगढ़ शासन की ओर से बिजली में दी गई राहत पर हरीश केडिया ने कहा कि  बिजली चार्ज 3 महीने तक नहीं लेने का निर्णय लिया गया है । लेकिन इसे बाद में जमा  करना होगा  । इससे आखिर उद्योग पर यह बोझ बना रहेगा । उन्होंने बताया कि दो तरह की बिजली का उपयोग उद्योग में किया जाता है । एक फिक्स चार्ज देना होता है और दूसरा वास्तविक खपत के आधार पर बिजली बिल मिलता है । हमने लॉक डाउन के दौरान सरकार के कहने पर अपना व्यवसाय बंद किया है । ऐसे में लॉक डाउन के दौरान फिक्स रेट का बिल नहीं लिया जाना चाहिए।  जब उद्योग ही बंद कर दिया गया तो इसका पैसा भी नहीं लिया जाना चाहिए । सैद्धांतिक तौर पर सभी इस पर सहमति देते हैं लेकिन इस तरह का आर्डर निकालने में देरी हो जाती है।

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