जिला स्थापना दिवस: माड़िया लोग अब देश-दुनिया की गतिविधियों से नहीं अनजान…हाईटेक हो रहे माड़िया

नारायणपुर।देश का 9वां बड़ा राज्य छत्तीसगढ़ के नारायणपुर का आज 11 मई को स्थापना दिवस है। नारायणपुर जिला 11 मई 2007 को बनाए गए दो नए जिलांे मंे से एक है। जो आज 14वें वर्ष में चहुंमुखी विकास के साथ शान से कदम बड़ा रहा है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने जिलेवासियों को बधाई दी। जिले में इन 13 वर्षो मंे विकास का जो पहिया घूमा वह अनवरत जारी है। पूरे जिले में लॉकडाउन-3 में मिली कुछ रियायत से पुनः निर्माण कार्य, सड़क, पुल-पुलिया और मनरेगा के काम शुरू हो गए है। जो मानसून से पहले पूरे कर लिए जायेंगे। कलेक्टर पी.एस. एल्मा ने भी जिले की जनता को जिला स्थापना दिवस की शुभकामना देते हुए समय रहते निर्माण कार्यो पूरा करने का भरोसा दिया है।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप NEWS ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

देश-दुनिया के लिए पहले अबूझ माने जाने वाले नारायणपुर जिले के विकासखण्ड ओरछा (अबूझमाड़) के माड़िया जनजाति आधुनिकता की दौड़ से कोसों दूर थे। विषम भौगोलिक परिस्थियों से इस क्षेत्र में सुविधाओं का अभाव होने के कारण माड़िया लोग देश-दुनिया में होने वाली गतिविधियों से भी अनजान बने रहते थे। लेकिन अब अबूझमाड़ को बूझने के लिए नई पहल शुरू हो गई है। अब माड़ में विकास का पहिया घूम रहा है। चौतरफा हो रहे विकास से माड़िया लोगांे के चेहरे पर मुस्कान आने लगी है। ओरछा विकासखंड के ग्राम बासिंग में पहला मिनी थिएटर कम डेवलेपमेंट सेंटर खोला गया। थिएटर के खुल जाने से अबूझमाड़ियों का मनोरंजन के साथ ही देश-दुनिया की ताजा खबरों और गतिविधियों से अवगत हो रहे है। इसमें प्रोजेक्टर के माध्यम से बड़ी स्क्रीन पर टेलीविजन दिखाने की सुविधा उपलब्ध है।

नेट कनेक्टिविटी के लिए दूरसंचार ने टॉवर खड़े किए हैं। पहले से काफी बेहतर नेट कनेक्टिविटी होने से यहां के माड़िया लोग और लोक कलाकार भी हाईटेक होने लगे है। वही बैंक के साथ अन्य सरकारी काम ऑनलाइन हो रहे है। दूर-दराज वाले इलाके में घर-घर तक बिजली की सुविधा मुहैय्या कराना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य था लेकिन इस दिशा में किए गए कामों की जानता ने सराहना की है। जहां पारंपरिक विद्युत लाईन नहीं पहंुचाई जा सकी, वहां सौर ऊर्जा चलित संयत्र स्थापित कर बिजली मुहैय्या कराई जा रही है। जहां बिजली की व्यवस्था होने से जहां गामीणों को सुविधा हुई वहीं स्कूली बच्चों को रात में पढ़ाई करने आसानी हुई ।

विकास ही नक्सल हिंसा से निपटने के लिए कारगर कदम है। जिले के दूरस्थ अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और समय पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाकर लोगों का दिल जीतने का प्रयास किया गया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सड़क, पुल-पुलिया निर्माण अन्य जगह से यहां ज्यादा कठिन है। जिला मुख्यालय से ओरछा (अबूझमाड़) विकासखंड मुख्यालय तक सड़क निर्माण कार्य में कई बाधाएं एवं विपदा आयी लेकिन इसके बावजूद सड़क निर्माण कार्य अन्तिम दौर में है। अब यहां की जनता को पक्की सड़कों की बारहमासी यातायात सुविधाएं मिलने लगी है। विकास की मुख्यधारा सहज-सुगम, सुरक्षित और बेहतरीन रास्तों से ही दूर-दूर तक और जन-जन तक पहुंच सकती है और पहुंच भी रही है।

ओरछा मुख्यालय में नवीन तहसील कार्यालय के साथ-साथ अधिकारी, कर्मचारियों को सरकारी आवास का निर्माण भी तेज गति से हो रहा है। वही ट्रांजिट हॉस्टल का काम भी पूरा हो गया है। प्रकृति को करीब से जानने और समझने वालों के लिए उनके रूकने के लिए आधुनिक सुख-सुविधाओं और स्थानीय कला से साज-सज्जित और फर्नीचर से परिपूर्ण नवीन रेस्ट हाऊस बनकर तैयार हो गया है। छोटी पहाड़ी पर स्थित यहां से सुबह और शाम के समय घने जंगल, खूबसूरत नजारे और पहाड़ों को निहारने का आनंद ही अलग है।

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