मां की हड्डी चुराते पकड़ाया भाई..बेटी पहुंच गयी थाना..फिर विधायक ने सुलझाया मामला

बिलासपुर— सिविल लाइन पुलिस थाना में अजीबो गरीब मामला सामने आया। थाना पहुंचकर एक महिला ने बताया कि भाई के नकारने के बाद उसने मां का 13 मई को अंतिम संस्कार किया। तीसरे दिन उसका भाई चोरी से फूल चुनने पहुंच गया। जबकि मां ने उसे अंतिम संस्कार के सभी क्रिया कर्म से दूर रहने की वसीयत लिखी है। सिविल लाइन थाना में मामला घंटों तक उलझा रहा। किसी तरह विधायक शैलेष पाण्डेय ने भाई बहन को समझा कर मामला शांत कराया।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप NEWS ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

                                सिविल लाइन पुलिस थाना में एक अजीबो गरीब मामला सामने आया। यद्यपि घंटो माथा पच्ची के बाद विधायक के हस्तक्षेप के बाद सुलझा लिया गया। मामला कुछ इस तरह का है।

बेटी को अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी

                 शिकायत कर्ता शीला ऊर्फ गुड़िया ने बताया कि उसकी 90 साल की माता का निधन 13 मई को को हो गया। मरने से पहले मां ने नोटिफाइ स्टाम्प में वसीयत कर बताया कि मरने के बाद उसका भाई बेटा चन्द्रशेखर शुक्ला का उसके शरीर पर अधिकार  नहीं रहेगा। ना ही वह अंतिम संस्कार यात्रा और क्रिया कर्म में शामिल होगा। बेटी शीला ऊर्फ गुड़िया ही अंतिम संस्कार करेगी। 

               शीला ने बताया कि मां ने एक वीडियोग्राफी में इस बात का जिक्र किया है। 13 मई को मां का निधन हो गया। लाकडाउन के दौरान शासन के निर्देश पर मां का अंतिम संस्कार भारतीय नगर मुक्तिधाम में किया गया। उसका भाई भी संस्कार कार्य में शामिल हुआ।

वसीयत में बेटे को दूर रखने की मांग

                शीला ने बताया कि वह 25 बंगला भारती नगर क्षेत्र में रहती है। पिछले तीस साल मां उसके साथ है। जबकि एक भाई चन्द्रशेखर मिश्रा भी है। लेकिन उसने मां को घर से ना केवल निकाल दिया। बल्कि दवा दारू करने से भी इंकार कर दिया। इतना ही नहीं मां ने उसके चाल चलन और आवारगी से परेशान होकर मिलना जुलना छोड़ दिया। मरने के पहले उसने वीडियो और स्टाम्प में अपनी इच्छा को जाहिर किया। इच्छा के अनुसार मां निर्मला मिश्रा की अंतिम संस्कार भारती नगर में किया गया।

         दाह संस्कार के दूसरे दिन मुक्तिधाम के चौकीदार ने फोन कर बताया कि कोई उनकी मा फूल चुन रहा है। खबर मिलने के बाद मुक्तिधाम पहुंची। उसका भाई चोरी छिपे मां की हड्डी चुनते पकड़ा गया। उसने कहा कि वह बेटा है इसलिए मां का अंतिम संस्कार भी वही करेगा। शीला ने बताया कि दाह संस्कार करते समय भी भाई ने लड़ाई झगड़ा किया था। इसके बाद सामाजिक लोगों के दवाब में दोनो ने मिलकर अंतिम संस्कार किया था। लेकिन फूल चुनने वह एक दिन पहले ही मुक्तिधाम पहुंच गया।

असमंजस में पुलिस..विधायक ने संभाला मोर्चा

                   मामले को सुनने के बाद पुलिस असमंजस में पड़ गयी। इस बीच भाई और बहन ने अलग अलग विधायक शैलेष पाण्डेय से सम्पर्क किया। दोनों को विधायक ने समझाने का प्रयास किया। लेकिन दोनो अपनी बातों से टस से मस नहीं हुई। इस बीच विधायक को जानकारी मिली कि मृतिका निर्मला ने एक वसीयत की है। जिसमें उसने अंतिम संस्कार कार्यक्रम में बेटे को दूर करने के लिए लिखा और कहा है।

            बात सामने आने के बाद मृतक महिला का बेटा और शीला के भाई ने अंतिम संस्कार करने की जिद पर अड़ा रहा। पुलिस ने वसीयत और वीडियो देखने के बाद मामले को कानूनी बताया। लेकिन दोनों अपनी जिद पर अड़े रहे।

            विधायक ने एक बार फिर दोनों को बुलाकर घंटो समझाया। दोनों ने अलग अलग होकर विधायक से एक दूसरे की जमकर शिकायत की। बावजूद इसके शैलेष पाण्डेय दोनों को समझाने मे कामयाब हो गए। जिसके चलते थाने मेंमामला दर्ज होने से रह गया। 

मिलकर करेंगे सांस्कारिक कार्य

          विधायक शैलेष पाण्डेय ने बताया कि दोनों ने बातों को समझा और एक साथ अंतिम संस्कार और क्रिया कर्म कराने का फैसला किया। महिला ने बताया कि वह मां की अंतिम इच्छा को पूरा करेगी। जबकि महिला के भाई ने कहा कि वह शास्त्र के अनुसार अंतिम संस्कार करने का अधिकारी है। लेकिन शैलेष पाण्डेय ने दोनों को अच्छी तरह से ब्रेन वाश करते हुए मिलकर अंतिम संस्कार किए जाने की नसीहत दी। करीब चार पांच घंटे बाद मामले को सुलझाया जा सका।

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