राजीव गांधी किसान न्याय योजना की ऐतिहासिक शुरुआत,सरकारी कैलेण्डर मई की बोलती तस्वीर

नारायणपुर।मैं शयनकक्ष में पलंग पर पड़े शून्य को ताक रहा था, तभी दीवाल पर टंगे सरकारी कैलेण्डर तेज पंखा की हवा से जोर से फडफड़ाया और मेरी नज़र टिकी। पल भर बाद ही दृष्टि दो ग्रामीण महिलाओं के चित्रों पर आकर टिक गई। जो सुनहरी धान की बालियों के संग मुस्कुराती, बातें करते दिख रही थी। सामान्य तौर पर कलेण्डर पर नज़र रोज़ ही पढ़ती थी लेकिन याद  तो नहीं, पर लगभग दो महीने से इतना मुस्कुराने की तस्वीर पहले नहीं देखीं थी। महज़ यह इत्तफ़ाक़ है या मुख्यमंत्री की राजीव गांधी किसान न्याय योजना का बेहतरीन नज़राना का असर। ये तो बाद की बात है।मुझे न जाने ऐसा क्यों लगा कि कलेण्डर के मई माह में प्रदर्शित चित्र की दोनों खेती-किसानी ग्रामीण महिलाओं में सास-बहु का रिश्ता है। जैसे बिन्नी (बहु काल्पनिक नाम) कह रही थी, काकी (काल्पनिक सास) से धान तो पक गयी है, पर क्या फसल काटने मजदूर मिलेंगे। कोरोना वायरस संक्रमण  फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण मजदूर नहीं मिल रहे और ना ही आ रहे है। सीजीवालडॉटकॉम NEWS के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए

हम कैसे अपनी फसल को काट पायेंगे। अगर नहीं काट पाये तो खायेंगे क्या और नया क़र्ज़ कैसे उतारेंगे। पहले बिक़े धान के पैसे भी नही मिलें है। चुप हो जा बिन्नी हंसते हुए काकी ने धीमे स्वर में बोला। अपने मुख्यमंत्री ने सब व्यवस्था कर दी है। खेती-किसानी के काम के लिए छूट दी है, और तो और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की पुण्यतिथि 21 मई को ‘‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’’ के तहत धान बेचने का अब बचा पूरा पैसा भी किसानों के खाते में यानि कि 5700 करोड़ रूपऐ सीधे किसानों में खातों में डाली जा रही है। मुख्यमंत्री ने 2500 रूपए क्विंटन धान खरीदने का जो वादा किया था, वो पूरा हो रहा है। उनमें अपना भी नाम है, काकी से यह बात सुनकर बिन्नी के चेहरे पर सुकुन भरी मुस्कान साफ  दिख रही थी। काकी धीरे-धीरे बोली जा रही थी, सरकार हर गरीब, मजदूर जरूरतंमद के लिए काम जो कर रही है। तभी बिन्नी बीच में टोकते हुए बोली सच्ची काकी तुम्हें कैसे मालूम यह सब… अरे… गांव के सरपंच, सचिव और सरकारी अधिकारी-कर्मचारी सब बतावे हैं।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना की ऐतिहासिक शुरुआत मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में हुई। छत्तीसगढ़ के 19 लाख धान, मक्का, गन्ना पैदा करने वाले किसानों को सीधा फ़ायदा मिलेगा। गुरुवार 21 मई को 1500 करोड़ की पहली किश्त प्रदेश के किसानो के खाते में आने की शुरुआत हुई। इसके माध्यम से किसानों एवं कमजोर वर्ग के लोगों को न सिर्फ सम्मान से जीने का अवसर उपलब्ध कराएंगे बल्कि गरीबी का कलंक मिटाने में भी सफल होंगे। राजीव गांधी किसान न्याय योजना से राज्य के किसानों के जीवन में खुशहाली का नया दौर शुरू होगा। उन्होंने कहा कि इस योजना से लाभान्वित होने वालों में 90 प्रतिशत लघु-सीमांत किसान अनुसूचितजाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं गरीब तबके के हैं। इस योजना की प्रथम किश्त की राशि 1500 करोड़ रूपये हम सीधे किसानों के खाते में अंतरित कर रहे हैं।

योजना के तहत राज्य के 19 लाख किसानों को इस वर्ष 5750 करोड़ रूपये दिए जाएंगे। इसके अंतर्गत धान की खेती के लिये किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रूपये तथा गन्ना की खेती के लिये प्रति एकड़ 13000 रूपये आदान सहायता दी जाएगी। योजना से नारायणपुर जिले के 3684 किसानों को फ़ायदा होगा। उनके खातों में पहली किस्त के 2 करोड़ 60 लाख 42 हज़ार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर की शुरुआत हुई है। एकाएक मेरे मोबाइल की घंटी बज उठी। हड़-बड़ाकर देखा तो आफिस से फ़ोन था, मैं दौड़ पड़ा। सोचा आज दिन का खाना मुझे रात में मिल जायेगा। सरकारी कलेण्डर की बोलते चित्रों की बात का स्मरण करने लगा कि इस संकट के दौर में भी मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के रहते इन गरीब, मजदूर और किसानों को रोज ही दोनों समय का खाना अवश्य मिल रहा है। और इनके रोज़ी रोटी के साथ काम की भी चिन्ता है। 

बतादें कि छत्तीसगढ़ शासन के वर्ष 2020 का कलेण्डर समय पर जारी था और इसकी थीम है छत्तीसगढ़ का राज्य गीत है। प्रख्यात लोक कवि स्व. डॉ.नरेन्द्र वर्मा द्वारा लिखित इस छत्तीसगढ़ी गीत को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा राज्यगीत घोषित किया गया है। छत्तीसगढ़ की ग्रामीण सांस्कृतिक पारंपरिक खेलकूद-पर्व आदि की खूबसूरत, मनमोहक तस्वीरों के साथ राज्यगीत की पंक्तियां प्रस्तुत की गई है। आज के दौर में सरकारी कैलंेडर की न केवल सरकारी दफ्तरों में, बल्कि छोटे-बड़े सब घरों में भी सख्त जरूरत रहने लगी है।

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