बिलासपुर को चाहिए एजुकेशन जोन–हर्ष पाण्डेय

harsh3बिलासपुर— मैने कहीं पढ़ा था कि.. महत्व इस बात का नहीं है कि देश ने आपके लिए क्या किया…महत्व इस बात का है कि आपने देश के लिए क्या किया। ये पंक्तियां आज भी रह-रह कर कौंधती हैं। इन पंक्तियों ने मुझे नौकरी से मोह भंग कराया। मैने शिक्षा को ही देश सेवा का जरिया बना लिया। हर साल सैकड़ों बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं में निशुल्क कोचिंग देना शुरू किया। आज सफल बच्चे ऊंचे पदों पर बैठकर वही कर रहे हैं जिसे मैने जीवन का लक्ष्य बनाया। यह बातें शिक्षा शिक्षाविद् हर्ष पाण्डेय ने सीजी वाल से एक मुलाकात में कही।

               सीजी वाल से एक मुलाकात में हर्ष पाण्डेय ने बताया कि मेरा जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ। पढ़ने पढ़ाने का शौक बचपन था। पीएससी परीक्षा के दौरान महसूस किया कि मोटी फीस के कारण कोचिंग संस्थाओं तक गरीब बच्चों की पहुंच ना के बराबर है। इन बच्चों में प्रतिभाओं की कमी नहीं थी। लेकिन अर्थ की कमी ने उन्हें प्रशासनिक अधिकारी बनने से रोका। कई गरीब मेधावी बच्चे अपने दम पर प्रशासनिक पद पर पहुंचे। लेकिन उनकी संख्या उम्मीद से बहुत कम थी। ऐसी तमाम बातों ने मुझे कोचिंग खोलने को विवश किया।

           शिक्षा के क्षेत्र में..कई मंच से….कई बार सम्मानित शिक्षाविद् हर्ष पाण्डेय़ ने बताया कि…छत्तीसगढ़ में अच्छे शिक्षकों की हमेशा से कमी रही है। चूंकि मेरी पृष्ठभूमि गांव से है। मैने हमेशा अच्छे शिक्षकों की कमी को महसूस किया है। विद्यार्थी जीवन के दौरान मार्गदर्शन के अभाव में मैने प्रतिभाओं को दफन होते देखा है। जैसा कि बताया कि देश के लिए मैं क्या कुछ कर सकता हूं। इन तमाम बातों ने मुझे नौकरी से प्रायवेट शिक्षक बनने को मजबूर किया। नौकरी छोडने पर मुझे पारिवारिक नाराजगी का शिकार होना पड़ा है। लेकिन गरीब और प्रतिभावान बच्चों के लिए मुझे ऐसा करना पड़ा।

harsh5           कोचिंग व्यवसाय है के सवाल पर हर्ष पाण्डेय ने बताया कि यदि मुझे केवल अपनी चिन्ता रहती तो अच्छी खासी नौकरी नहीं ठुकराता। और मैं इन बातों की परवाह भी नहीं करता। मैने जिस पीड़ा को देखा और भोगा है उस पीड़ा को कम करने का प्रयास कर रहा हूं। संस्था में ऐसे भी बच्चे हैं जिनके पास किताब खरीदने की क्षमता नहीं है। गरीब बच्चों को समाजसेवियों के प्रयास से निशुल्क हास्टल की सुविधा हमेशा की तरह दी जा रही है । ऐसे बच्चे जिन्होंने नाम मात्र की फीस देकर ऊंचे पोस्ट को हासिल किया है। उनका भी गरीब प्रतियोगियों को समर्थन मिल रहा है।

         मेरा उद्देश्य समस्या हल करना है..ना की पैदा करना। यदि ऐसा होता तो आज कोंटा से लेकर वाड्रफनगर तक मुझे गरीब आदिवासी प्रशासन आंमत्रित नहीं करता। संस्था को समय-समय पर सम्मानित भी नहीं करता।

         हर्ष ने बताया कि जिले में नामचीन कोचिंग संस्थाएं हैं। मुझे मालूम है कि सब जगह एक ही चीज पढ़ाई जा रही है। लेकिन मेरी प्राथमिकता में गरीब बच्चों का भी वही स्थान है जो समर्थवान बच्चों का है। यदि व्यवसायिक दृष्टिकोण को अपना लूंगा तो उन सिद्धांतों का क्या…जिसे मैने अपने विद्यार्थी जीवन में आत्मसात किया था।

             पाण्डेय ने बताया कि मेरा उद्देश्य शिक्षा और अवसर जन जन तक पहुंचाना है। मैं सरकार नहीं हूं लेकिन सहयोगी बन सकता हूं। सुदुर गांवों में प्रतिभा की खोज करता हूं। गरीब विकलांग बच्चों को मार्गदर्शन देता हूं। चाहे वह स्थान सुकमा हो या फिर अंबिकापुर। टीम के साथ शिक्षा शिविर लगाता हूं। आज उनमें से कई बच्चे उंचे पोस्ट पर हैं। देखकर खुशी होती है।

    harsh1     हर्ष पाण्डेय ने बताया कि कई बच्चों को यह भी नहीं मालूम कि पीएससी के अलावा भी कई पदों पर उनका इंतजार है। प्रदेश के कोने में काउंसिलिंग कर इस बात को बताने का प्रयास किया है। काफी हद तक सफल भी हुआ। लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

           हर्ष ने बताया कि पिछले पन्द्रह साल में बिलासपुर प्रतियोगी परीक्षाओं का गढ़ है। यह कमाल प्रदेश के प्रतिभाशाली बच्चों ने किया है। जो बच्चे कल इंदौर और कोटा में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने नहीं पहुंच पाए आज वे ही बच्चे वहां पर अधिकारी हैं।

       सीजी वाल से हर्ष पाण्डेय ने बताया कि बिलासपुर में सार्वजनिक लायब्रेरी के सख्त जरूरत है। छोटा सा प्रयास मैने किया है। उस पर अभी ज्यादा बोलना मुनासिब नहीं। प्रतियोगी बच्चे लायब्रेरी सुविधा का निशुल्क लाभ उठा रहे हैं। जब शानदार लायब्रेरी बन जाएगी तब इस पर जरूर कुछ बोलूंगा।

           पाण्डेय़ ने बताया कि जब तक प्रदेश का एक–एक गांव शिक्षा के महत्व और अधिकारों को नहीं समझेगा तब तक मेरा प्रयास कोचिंग के जरिए चलता रहेगा। उन्होने कहा कि अवसर के अलख को सुदूर आदिवासी अंचल तक फैलाने की जरूरत है। सरकार अपना काम कर रही है। इस अभियान में स्वयं सेवी संस्थाओं और बुद्धिजीवियों की जरूरत है। कोई मेरे साथ चले या ना चले लेकिन हर्ष ट्यूटोरियल्स की टीम ज्ञान गंगा के प्रवाह को कम नहीं होने देगी।

harsh4         हर्ष पाण्डेय़ ने बताया कि रूसा के तहत स्कील डेवलपमेंट और तकनीकि शिक्षा पर सरकार के साथ 27 जिलों के कालेजों में काम करने का अवसर मिला। इसका फायदा युवा छात्रों को मिलना निश्चित है। उन्होने बताया कि बिलासपुर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिल गया है। बच्चों ने अपने दम पर बिलासपुर को एजुकेशन हब बनाया। अब प्रशासन से उम्मीद है कि बच्चों के हितों के मद्देनजर शहर के किसी कोने को एजुकेशन जोन के रूप में विकसित करे। जहां सभी सुविधाएं उपलब्ध हों। ताकी बाहर से आए बच्चों को दर-दर भटकना ना पड़े। उन्होने कहा कि मेरा लक्ष्य स्पष्ट है…क्योंकि शिक्षा मेरी ताकत है और सेवा जुनून …।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *