वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने के आदेश को वापस ले सरकार- फेडरेशन

जशपुर नगर । छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी,जशपुर जिला अध्यक्ष विनोद गुप्ता एवं महामंत्री संजीव शर्मा ने शासकीय सेवकों को देय वार्षिक वेतन वृध्दि पर,राज्य शासन द्वारा लगाए गए रोक को शासकीय सेवाशर्तों के अंतर्गत मूलभूत अधिकार का हनन बताया है।उन्होने मांग की है कि वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का आधेश सरकार वापस ले। सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप NEWS ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

उनका कहना है कि,कोविद 19 के संक्रमण से जनमानस के बचाव हेतु शासकीय सेवक दिन रात काम कर रहे हैं। शिक्षक मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन घर-घर पहुंचा रहे हैं। शिक्षक गली -मोहल्ले -घूम कर प्रत्येक घर परिवार के कोरोना संक्रमण संबंधी सर्वे का काम कर रहे हैं।यहाँ तक कि क्यवारेंटाइन सेन्टर में अप्रवासी मजदूरों का देखभाल कर रहे हैं।शासकीय सेवक अपने परिवार का भविष्य तथा अपने प्राण को दांव पर लगाकर,अपने कार्यक्षेत्र से अलग काम कर रहे हैं।सेवा के एवज में सरकार पुरस्कार देने के स्थान पर,वार्षिक वेतन वृध्दि रोककर दण्ड दे रही है ।

  फेडरेशन का कहना है कि शासकीय व्यय में मितव्ययिता एवं वित्तीय अनुशासन के आड़ में राज्य शासन नें 1 जुलाई 2020 एवं 1 जनवरी 2020 को मिलने वाले वार्षिक वेतन वृद्धि को आगामी आदेश तक रोकने का आदेश 27 मई को जारी हुआ है।जोकि एक प्रकार से दंडात्मक आदेश है।कोरोना योद्धाओं का सम्मान के बदले,अपमान करने वाले आदेश को वापस लेना होगा।       फेडरेशन के कहना है कि राज्य के वित्तीय प्राप्तियों एवं शासकीय व्यय का युक्तियुक्तकारण एवं राज्य के आर्थिक संतुलन को बनाये रखने के अनेक उपाय हैं।सरकार को पहले अपने राजधर्म का पालन कर फिजूलखर्ची पर रोक लगाना चाहिए।राजकर्म में लगे शासकीय सेवकों को हतोत्साहित करना राजहित में नहीं है।     फेडरेशन का कहना है कि विगत मार्च में मुख्यमंत्री ने शासकीय सेवकों के वेतन से कोई कटौती नहीं करने का सार्वजनिक  बयान दिया था । उन्होंने कोरोना महामारी के रोकथाम हेतु मुख्यमंत्री राहत कोष में संकट के इस घड़ी में स्वेच्छा से ही दान देने का अपील किया था।शासकीय सेवकों ने उनके अपील का सम्मान रखा था।लेकिन एकाएक वित्त विभाग द्वारा 1जुलाई 20 एवं 1 जनवरी 22 का वार्षिक वेतन वृध्दि को विलंबित करने का आदेश जारी होना,बेहद दुःखद और आश्चर्यजनक है। फेडरेशन का कहना है कि आदेश 31 मार्च 21 तक प्रभावशील है।जुलाई 20 से मार्च 21 तक कुल 9 माह में आदेश के कारण प्रतिमाह वेतन में होने वाले नियुनतम कमी के आंकलन अनुसार सातवे वेतन में ग्रेड पे @1400 रुपए को प्रतिमाह 900 रुपए कुल 8100 ₹; @ 1900 रुपए को प्रतिमाह 800 रुपए कुल 7200 रुपए ; @2800 ₹ को प्रतिमाह  1100 रुपए कुल 9900 रुपए ;@ 4300 रुपए को प्रतिमाह 1900 रुपए कुल 17100 रुपए ; @ ₹4400 को प्रतिमाह रुपए , 2000 कुल 18000 रुपए ; @ 5400 रुपए को प्रतिमाह 2300 रुपए कुल 20700 रुपए तथा @ 6600 रुपए को प्रतिमाह 2400 रुपए कुल 21600 रुपए की कटौती औसतन होगी।जोकि वर्तमान में 12 % महंगाई भत्ता एवं प्रचलित दर पर 10 % गृह भाड़ा भत्ता जोड़कर और अधिक होगा।इसके अलावा पेंशनरों का 33 माह का मंहगाई भत्ता का एरियर्स,शासकीय सेवकों को मई 2018 से 31 दिसंबर 2018 तक एरियर्स का आज तक भुगतान नहीं हुआ है।शासकीय सेवकों को जुलाई 2019 का 5 % तथा जनवरी 2020 का 4 % मंहगाई भत्ता कुल 9 % नहीं दिया गया है।फेडरेशन के कहना है कि शासकीय सेवक एवं उनके परिवार को अनदेखी करना अनुचित है,जिसका पुरजोर विरोध होगा।

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