नए कलेक्टर से लिंगियाडीह में जगी उम्मीद..लोगों ने बताया…यहां कोरोना से नहीं..गंदगी से होगी मौत..कमिश्नर ने भी नहीं दिया ध्यान

बिलासपुर—- एक दिन पहले कलेक्टर सारांश मित्तर ने पदभार ग्रहण कर लिया है। उन्होने शहर के लिए अपनी पहली दो प्राथमिकताओं में सफाई अभियान को महत्व दिया है। इसके साथ ही लिंगियाडीह के लोगों को उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है कि हो ना हो क्षेत्र में बजबजाती नालियों और कचरों के ढेर से अब जल्द ही छुटकारा मिल जाएगा। स्मार्ट सिटी की पानी टंकी भी साफ हो जाएगी और पाइप लाइन भी बदल जाएगा।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप NEWS ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये
 
                 प्रदेश कोरोना संकट से जूझ रहा है। लेकिन लिंगियाडीह के लोगों को दोहरी मुसीबत से जूझना पड़ रहा है।बिलासपुर नगर निगम विस्तार के बाद लिंगियाडीह वासियों की मुसीबत कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी है। पंचायत हटने के बाद यहां कचरों का पहाड़ और बजबजाती नालियों का संकट खड़ा हो गया है। ऊपर से कोरोना का प्रकोप कोढ़ में खाज साबित हो रहा है। लेकिन  पदभार लेने के बाद नए कलेक्टर की सफाई प्राथमिकता को लेकर दिए गए बयान से लिंगियाडीह वासियों में सफाई व्यवस्था को लेकर उम्मीद किरण जिंदा हो गयी है।
 
          सफाई व्यवस्था को लेकर लिंगियाडीह के नागरिकों की समस्या पिछले 6 महीने से बरकरार है। कोरोना प्रकोप के बाद यह समस्या कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी है।एक समय ऐसा लगा था कि निगम कमिश्नर सुबह साइकिलिंग कर क्षेत्र में आएंगे। और सफाई व्यवस्था को लेकर सफाई कर्मचारियों को फटकारेंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। कमिश्नर ने साइकिलिगं वहीं की जहां उनके मातहतो ने कराया। नतीजा यह हुआ कि लिंगियाडीह का यक्ष क्षेत्र आज भी बजबजाती नालियों और कचरों के पहाड़ से निकलने वाले दुर्गन्ध का साहस के साथ सामना कर रहा है। 
 
                              निगम में शामिल होने के बाद लिंगियाडही की सफाई व्यवस्था बद से बदतर हो गयी है। जहां तहां कचरों के बड़े बड़े कचरों के ढेर पैदा हो गये हैं। नालियां बजबजा रहीं हैं। सड़कों पर पसरी गंदगी के बीच से लोगों का चलना दूभर हो गया है। स्थानीय निवासियों की बार-बार शिकायतों के बाद भी निगम प्रशासन पूरी तरह उदासीन है। कहने को तो निगम ने कचरा के लिए डस्टबिन दिया है। लेकिन यहां यहाँ न तो डस्टबिन का वितरण किया गया है। और न ही निगम की कचरा लेने वाली गाड़ी ही आती है। 
 
                                          वार्डवासियों ने बताया कि निगम स्वास्थ्य विभाग प्रमुख डॉ.ओम्कार शर्मा से लेकर स्थानीय सफाई प्रभारी संजय श्रीवास और गिरिजा तक शिकायत की। लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। बार-बार कहने के बावजूद स्थिति जस की तस है। निगम कमिश्नर से मिलना मुख्यमंत्री से मिलने से कहीं ज्यादा मुश्किल काम है।
 
        वार्ड के लोगों ने बताया कि सड़कें खस्ताहाल है। पेयजल पाइपलाइन  नालियों के अन्दर होकर बहती हैं। कई जगह टूटे फूटे पाइपलाइन से गंदा पानी घरों तक पहुंच रहा है। इस बात से सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि स्थानीय लोग निगम की तुर्राशाही और व्यवस्था से किस हद तक परेशान हैं।
 
                स्थानीय लोगों ने बताया कि सफाई अव्यवस्था और पानी गंदगी की शिकायत को लेकर कई बार समाचार छपा। मजाल है कि किसी निगम कर्मचारी पर इसका असर पड़ा हो। वार्ड क्रमांक-52 हाई स्कुल स्थित पानी की टंकी की सफाई अभी तक नही हुई है। अखबार में लिंगियाडीह में डायरिया फैलने की ख़बर के बाद से निगम और यहाँ के पार्षद हरकत में आए और आनन-फानन में पाइपलाइन बदलने के लिए सड़कें खोदी गयी। लेकिन अभी सबकुछ ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
 
             अब तो लोगों की परेशानी को लेकर ना तो स्थानीय चुनाव दलाल दिखाई दे रहे हैं। और ना ही बड़े नेता। स्थानीय लोगों ने चिंता जाहिर करते हुए बताया कि गंदे कचरे ,बजबजाती नालियों से डेंगू, डायरिया, चिकनगुनिया, हैजा, पीलिया, मलेरिया जैसी प्राणघातक बिमारियों का खतरा है। समय रहते ही यदि शासन-प्रशासन ने लिंगियाडीह वार्ड क्रमांक-52 में सफाई व्यवस्था और पेयजल व्यवस्था, का ध्यान नहीं दिया तो स्थिति बद से बदतर हो जाएगी। 
 
          डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की सुमुचित व्यवस्था नही होने से चारो तरफ गन्दगी ही गन्दगी है। निगम प्रशासन के जिम्मेदारों को फेसबुकिया प्रमोशन छोड़कर जमीन पर कार्य करने की जरुरत है।निगम में शामिल होने के बाद यहां के निवासियों में उम्मीद थी कि व्यवस्थाएं सुधरेंगी । लेकिन ग्राम पंचायत से निगम क्षेत्र में शामिल होेने के बाद हालात बद से बदतर हो ग हैं।
 
          फिर भी नए कलेक्टर से उम्मीद जग गयी है। उन्होने पदभार लेते ही सफाई व्यवस्था को अपनी प्राथमिकता में शामि होना बताया है। उम्मीद है कि लिंगियाडीह वार्ड क्रमांक 52 के दिन बहुरेंगे।

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