कलेक्टर की अध्यक्षता में समय-सीमा की बैठक सम्पन्न,अधिकारियों से वन-टू-वन ली जानकारी,जाति प्रमाण पत्र आवेदनों की ऑनलाइन एंट्री में लाए तेजी

महासमुंद-कलेक्टर कार्तिकेया गोयल ने आज यहां कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में समय-सीमा की बैठक लेकर विभिन्न विभागों के जिला अधिकारियों से समय-सीमा के प्रकरणों के निराकरण के संबंध में वन-टू-वन जानकारी ली। कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक आज यहां कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष मंे सम्पन्न हुई। कलेक्टर ने स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्रों के आॅनलाईन एण्ट्री की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त की। कलेक्टर श्री गोयल ने जिला शिक्षा अधिकारी से कहा कि यह काम सर्वोच्च प्राथमिकता का हैं। इस कार्य को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक सप्ताह 400 से 500 जाति प्रमाण पत्र आवेदनों का आॅनलाईन एण्ट्री का प्रयास करें।उन्होंने जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से भी कहा कि उनकी तहसीलों में अभी इन जाति प्रमाण पत्रों की आवेदनों की एण्ट्री संतोषजनक नहीं हैं।

कलेक्टर ने सभी अनुविभागीय अधिकारी से वीडियों कांन्फ्रेसिंग के माध्यम से यह बात कहीं। बैठक में सभी खण्ड शिक्षा अधिकारी की उपस्थित नहीं होने पर भी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि प्रत्येक समय-सीमा की बैठक में वे उपस्थित रहें। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी डाॅ रवि मित्तल, डिप्टी कलेक्टर पूजा बंसल, सहित अन्य विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित थे।कलेक्ट कार्तिकेया गोयल ने सभी अनुविभागीय अधिकारियों से कहा कि वे गढ़कलेवा के लिए उपयुक्त जमीन चिन्हांकित कर अवगत कराएं ताकि गढ़कलेवा खोलने की कार्रवाई की जा सकें। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि माॅस्क ने पहनने वालें लोगों पर जरूरी कार्रवाई की जाएं और उन पर आवश्यक जुर्माना भी लगाया जाए। उन्होंने शुद्ध पेय जल की भी जानकारी ली।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हैण्डपम्प और बोरवेल की मरम्मत एवं नियमित जाॅच करने को कहा ताकि बारिश में आम जनता को शुद्ध पानी मिलें। कलेक्टर गोयल ने कहा कि जिले में प्रवासी श्रमिको का आना कम हो गया है और क्वारेंटाईन सेंटर में क्वारेंटीन व्यक्तियों की समयावधि पूरी होने के कारण उन्हें होम क्वारेंटाईन के लिए छोड़ा गया हैं। अब ऐसे क्वारेंटाईन सेंटर जो स्कूल, काॅलेज, आश्रम-छात्रावास और पाॅलिटेक्निक काॅलेज मेें बनाएं गए थे, उनमें अब संभव हो तो क्वारेंटीन न किया जाए। अगर कोई बाहर से व्यक्ति आता हैं और उसे क्वारेंटीन किया जाता हैं तो उसे सामुदायिक भवन या अन्य जगह बनाए गए क्वारेंटाईन सेंटर में रखा जाएं। इन संस्थाओं को सैनेटाईज और जरूरी मरम्मत कराकर साफ-सुथरा रखा जाएं ताकि आने वाले दिनों में शासन से निर्देश आने पर स्कूल, काॅलेज खोले जा सकें।

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