समझौते पर एसईसीएल का हस्ताक्षर.. 2023 तक बन जाएगा कोरिडोर.. कम्पनी की 64 प्रतिशत भागीदारी

बिलासपुर—-छत्तीसगढ़ में रेल संरचना विकसित करने को लेकर एसईसीएल ने गंभीरता दिखाते हुए शासन के एग्रीमेन्ट पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा प्रबंधन ने बैंक ऋण को लेकर अन्य औपचारिकताओं को भी पूरा कर दिया है।

           ईस्ट-वेस्ट रेल काॅरीडोर को तेजी से विकसित करने एक दिन पहले एसईसीएल, ईरकाॅन और छत्तीसगढ़ शासन ने  स्पांसर सपोर्ट एग्रीमेन्ट पर हस्ताक्षर किए । बैंकों से लिए जाने वाले 3,976 करोड़ रूपये के कर्ज के लिए फिनान्सीयल क्लोजर की औपचारिकता भी पूर्ण हो गयी है। इस प्रकार एसबीआई की अगुवाई में बैंकों के समूह से 3,976 करोड़ रूपए के ऋण की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।

                एसईसीएल प्रबंधन के अनुसार यह ऋण प्रोजेक्ट के कुल लागत 4,970.11 करोड़ का है। यह ऋण स्टेट बैंक आफ  इण्डिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया और इण्डियन बैंक समूह से लिया जाएगा।

           सीडब्ल्यूआरएल के इस प्रोजेक्ट में 135.30 किलोमीटर ब्राडगेज इलेक्ट्रिफाईड डबल रेलवे लाईन और  56 किलोमीटर की कनेक्टिविटी रेलवे लाईन शामिल है। काॅरीडोर के पूर्ण होने से गेवरा रोड से चाम्पा के बीच सिंगल रेल लिंक पर ढुलाई का भार कम होगा। गेवरा रोड स्टेशन को पेण्ड्रा में बिलासपुर-अनूपपुर-कटनी रेल लाईन को जोड़ने से कोयला परिवहन में सबसे कम दूरी वाला रेल मार्ग मुहैया कराएगा।

                 ईस्ट-वेस्ट रेल काॅरीडोर के प्रमोटर्स की तरफ से अभी तक 650 करोड़ की लागत की जा चुकी है। लागत से मुख्यतः मेन लाईन में भूमि-अधिग्रहण और  वन स्वीकृति ली गयी है। अपेक्षा की जा रही है कि यह प्रोजेक्ट मार्च 2023 तक पूर्ण कर लिया जाएगा।

          छत्तीसगढ़ राज्य में रेल काॅरीडोर के निर्माण को लेकर ए.पी. पण्डा, सीएमडी एसईसीएल का विशष प्रयास रहा है। रेल काॅरीडोर के निर्माण से कोयला ढुलाई के साथ-साथ लोगों के आवाजाही में सुगमता होगी। रेल काॅरीडोर के आसपास के क्षेत्रों में तेजी से विकास होगा। लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

             इनही तमाम बातों को देखते हुए सीएमडी एसईसीएल ए.पी. पण्डा ने रेल काॅरीडोर को तेजी से विकसित करने और  कार्य को लेकर लगने वाले संसाधन को उपलब्ध कराने पर जोर दिया। ताकि  क्षेत्रवासियों का इसका समुचित और तेजी के साथ लाभ मिल सके। 

      जानकारी हो कि छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तरीय क्षेत्र में रेल काॅरीडोर विकसित किए जाने को लेकर रेलवे मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन के मध्य 27 फरवरी 2012 को समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। एसईसीएल ने, राज्य के इस क्षेत्र में कोयला उत्पादन में अग्रणी कम्पनी होने के कारण, रेल काॅरिडोर विकसित करने के लिए गठित की गयी स्पेषल परपस व्हीकल में सहभागी होने का निर्णय लिया। इसके तहत  दो रेल काॅरीडोर जिनमें ईस्ट रेल काॅरीडोर (मांड-रायगढ़ कोलफील्ड्स) और ईस्ट-वेस्ट रेल काॅरीडोर (कोरबा कोलफील्ड्स) के निर्माण में एसईसीएल की सहभागिता है।

                  इसी क्रम में एसईसीएल, इरकाॅन और छत्तीसगढ़ शासन के बीच 3 नवम्बर 2012 को ज्वाईंट वेन्चर कम्पनी से दोनों रेल काॅरीडोर को विकसित करने को लेकर समझौता हुआ। समझौते के तहत ज्वाईंट वेन्चर कम्पनी में एसईसीएल की 64, इरकाॅन की 26 और  छत्तीसगढ़ शासन की 10 प्रतिशत भागीदारी है।  रेल काॅरीडोर माल ढुलाई के साथ-साथ जन-सामान्य की आवाजाही के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा। 

             दोनों रेलवे प्रोजेक्ट्स को ’’स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट’’ का दर्जा दिया गया है। इसके निर्माण के लिए सरकार की तरफ से प्राथमिकता मे लिया गया है। पिछले साल 12 अक्टूबर 2019 को ईस्ट रेल काॅरीडोर फेस-1 के खरसिया-कोरीछापर सिंगल रेल लाईन (45 किलोमीटर) शुरू हो गयी है।

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