..वाह सिम्स..बदल गयी लाश…दादा का शव समझ पोते ने किया संस्कार..फिर जमकर हुआ हंगामा..दूसरा परिवार मलता रह गया हाथ

बिलासपुर— सिम्स जो करे..थोड़ा…..सोमवार को दोपहर बाद लाश को लेकर दो परिवार आपस में उलझ गए। मामले को समझने के बाद सिम्स प्रबंधन के होश फाख्ता हो गए।  क्योंकि भूल से लाश बदल गयी। और अग्रवाल परिवार ने दूसरे परिवार के लाश का अंतिम संस्कार कर दिया। मामला जब समझ में आया ..तब तक बहुत देर हो चुकि थी।

                   सोमवार दोपहर बाद दो परिवार के बीच लाश को लेकर सिम्स में जमकर हंगामा हुआ। मामला कुछ इत तरह से है। एक दिन पहले दो समान उम्र के बुजुर्गों की मौत कोरोना संक्रमण से हुई। एक बुजुर्ग की मौत महादेव अस्पताल में हुई तो  दूसरे की मौत बिल्हा से सिम्स लाने के दौरान हो गयी। दोनों के शव को देर शाम सिम्स मर्च्युरी में रख दिया गया।

                   दूसरे दिन सारी प्रक्रिया के बाद टिकरापारा निवासी अग्रवाल परिवार का सदस्य बालकृष्ण की लाश लेने सिम्स पहुंचा। पूरी प्रक्रिया के बाद मृतक बालकृष्ण का पोता लाश को  घर गया। इसके बाद परिवार ने विधि विधान से बालकृष्ण का अंतिम संस्कार किया। इसी बीच बिल्हा निवासी मृतक मजुमदार के परिजन भी सिम्स पहुंचे। शव को सुपुर्दनामा के साथ हासिल किया। घर पहुंचने पर जानकारी मिली कि दरअसल यह लाश मजुमदार की है ही नहीं।

                   आनन फानन में बिल्हा का मजुमादार परिवार सिम्स पहुंचकर बताया कि लाश उनकी नहीं है। इस बीच सिम्स प्रबंधन को मालूम हो चुका था कि लाश बदल गयी है। प्रबंधन की तरफ से एक फोन बालकृष्ण परिवार को किया गया। सिम्स प्रबंधन और मजुमदार परिवार ने वस्तुस्थिति की जानकारी दी। तब तक बालकृष्ण का पोता अपने दादा के शव को अग्नि के हवाले कर चुका था।

                  लेकिन खबर मिलते ही बालकृष्ण अग्रवाल का परिवार सिम्स पहुंच गया। इसी बात को लेकर दोनों परिवार के सदस्यों ने सिम्स में जमकर हंगामा किया।

              सिम्स से मिली जानकारी के अनुसार बालकृष्ण का शव महादेव अस्पताल से लाया गया था।  जिसे बिना टैग के मर्च्युरी में रखा गया। ठीक उसी समय बालकृष्ण के उम्र का ही दूसरा शव मजुमदार परिवार का भी आया। उसे भी कोरोना टेस्ट के बाद मर्च्युरी में रखा गया। दूसरे दिन दोनों के शव को परिजनों को सौंपा गया। 

                  सिम्स प्रबंधन ने बताया कि शव को पीपीई किट में लपेटकर रखा जाता है। इस दौरान ध्यान रखा जाता है कि शव से किसी को किसी प्रकार का संक्रमण ना हो। सिर्फ शव का चेहरा नजर आता है। लाश लेने के दौरान परिजनों से जल्दबाजी में गलतियां हुई है। लेने वाले ने शव को नहीं पहचाना। 

लौट के बुद्धु घर को आए

              हंगामे के बीच लोगों ने सबको समझाया। जहां बालकृष्ण अग्रवाल समझकर पोते ने मजुमदार का अंतिम स्ंस्कार किया। अब उसे  दुबारा मजुमदार परिवार से दादा का शव लेकर  अंतिम क्रिया कर्म करना पड़ा। दूसरी तरफ मजुमदार परिवार सिर पकड़कर कभी अपनी लापरवाही पर आक्रोश जाहिर करता रहा। साथ ही सिम्स प्रबंधन की अव्यवस्था को जमकर कोसता रहा।

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