शासकीय कर्मचारियों को असामयिक सेवानिवृत्त करने का आदेश,फेडरेशन ने कहा -केंद्र सरकार की नीति दमनपूर्ण

जशपुर।शासकीय कर्मचारियों को असामयिक सेवानिवृत्त करने केंद्र सरकार ने 28 अगस्त 20 को आदेश जारी किया है।अच्छे दिन आने का भरोसा देकर सत्ता को हासिल करने के बाद,केंद्र सरकार ने यह दमनकारी आदेश अपने कर्मचारियों के विरुद्ध जारी किया है। यह प्रेस नोट जारी कर छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी ने बताया कि केन्द्र सरकार ने शासकीय सेवकों के लिए मूलभूत नियम 56(जे),56(एल) तथा सी सी एस(पेंशन) नियम 1972 के आधार पर 50 से 55 वर्ष आयु या 30 वर्ष सेवाकाल पूर्ण करने पर,शासकीय सेवक को लोकहित में असामयिक सेवानिवृत्त.. करने आदेश जारी किया है।आदेश की कंडिका-2 में, प्रक्रिया को अनिवार्य सेवानिवृत्ति से अलग बताया गया है। हालाँकि मामला एक ही है।

राजेश चटर्जी ने बताया कि भारत शासन के अवर सचिव सूर्या नारायण झा के हस्ताक्षर से जारी आदेश की कंडिका-3.1 में उल्लेख है कि सक्षम अधिकारी को, लोकहित में कर्मचारी को असामयिक सेवानिवृत्त करने का अधिकार दिया गया है।उन्होंने बताया कि आदेश की कंडिका- 3.2 में उल्लेख है कि कर्मचारी को 3 माह पूर्व नोटिस देकर असामयिक सेवानिवृत्त किया जा सकता है,भले ही ग्रुप A या B का कर्मचारी स्थाई हो अथवा अस्थाई हो।आदेश में कहा गया है कि ऐसे कर्मचारी जो 35 वर्ष आयु के पहले सरकारी नौकरी में भर्ती हुआ है,तो उसके 50 वर्ष आयु पूर्ण करने पर सेवानिवृत्त किया जा सकता है। वहीं 35 वर्ष आयु के बाद नौकरी मिलने वाले को 55 वर्ष आयु पूर्ण करने पर मूलभूत नियम 56(जे) के तहत सेवानिवृत्त किया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी बताते कि सरकार की मंशा को समझने की जरूरत है…..! सरकारी कर्मचारियों की अर्धवार्षिकी आयु 33 वर्ष है।जिसके पूर्ण होने पर पूर्ण परिपक्व पेंशन अथार्त मूलवतन का 50 % राशि पेंशन के तौर पर मिलता है। सरकार की नजर दो जगह पर है…! पहला सरकारी कर्मचारियों को बेरोजगार करो और दूसरा पेंशन भी काम कर दो…! क्योंकि मात्र 15 से 20 वर्ष सेवाकाल के लिये सरकार को पेंशन भी कम देना पड़ेगा।उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार के 23 अगस्त 2003 के अनुमोदन से  पहले ही 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा अंतर्गत लागू हुए, पुराने पारिवारिक पेंशन योजना से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

अब उसी विचारधारा की सरकार ने रोजगार छिनने के लिए 28 अगस्त 20 को दमनकारी आदेश ऐसे वक्त में जारी किया है,जब देश के कर्मचारी कोरोना योद्धा के रूप में लोकहित को अपना सर्वोपरि धर्म और कर्म मानकर जी-जान से जुटे हैं। जोकि सरकार के नीति और नियत को बता रहा है।

     उन्होंने बताया कि सरकार के  आदेशानुसार,एक रजिस्टर तैयार किया जाएगा। जिसमें 50 वर्ष एवं 55 वर्ष आयु तथा 30 वर्ष सेवाकाल पूर्ण करने वाले कर्मचारियों का नाम दर्ज रहेगा। हर 3 माह में,विभाग के सक्षम अधिकारी,कर्मचारी के कार्यक्षमता की समीक्षा करेंगे। इन अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा के लिए अथार्त ग्रुप A एवं B के राजपत्रित अधिकारी के लिए इनके ऊपर सचिव स्तरीय अधिकारी होंगे।उनका कहना है कि सरकार के इच्छा के विरुद्ध कार्य करने वाले अथार्थ जी-हजूरी नहीं करने वाले कर्मचारी को उनके ऊपर के अधिकारी नौकरी से निकाल सकते हैं,वहीं इन अधिकारियों से सरकार खुश नहीं रहने पर इनकी भी छुट्टी हो सकती है।

उन्होंने बताया कि आदेश में कर्मचारियों को संदेहास्पद अखंडता , आचरण एवं सेवा में निष्क्रियता को आधार बनाकर असामयिक सेवानिवृत्त करने का प्रावधान कंडिका-10 में है। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कुछ निर्णयों का उल्लेख कर आदेश के औचित्य को साबित करने का प्रयास किया गया है।

कर्मचारी नेता राजेश चटर्जी ने बताया कि असामयिक सेवानिवृत्त किये जाने पर कर्मचारी को आदेश प्राप्ति के 3 सप्ताह के भीतर अपना पक्ष अभ्यावेदन समिति को देना होगा।अभ्यावेदन समिति दो सप्ताह के भीतर अपनी अनुशंसा सरकार को प्रस्तुत करेगी।

    फेडरेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि देश अब आर्थिक गुलामी के साथ साथ सामाजिक गुलामी की तरफ बढ़ रहा है।पदाधिकारियों का कहना है कि  देश का कुल घरेलू उत्पादन दर (जीडीपी) -23.9 तक पहुँच गया है।जिसका तात्पर्य है कि देश की भीतर सामान का उत्पादन एवं सेवाएँ बुरी तरह से प्रभावित हो गया है।ऐसे स्थिति में जहाँ एक तरफ,नए रोजगार के लिए संकट उत्पन्न हो गया है।वहीं सरकार लोगों के रोजगार को छिनने का आदेश जारी कर रही है।उनका मानना है कि यदि लोकतंत्र में राजनेताओं के शारीरिक क्षमता कार्यक्षमता एवं कार्यदक्षता के  लिए कोई पैमाना निर्धारित नहीं है तथा उनको,सभी निर्वाचित पदों के लिए पेंशन की पात्रता है तो मेहनतकश कर्मचारियों के साथ ही  यह अन्याय क्यों ?

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