हमालों का राइस मिलर पर हमला..बाल बाल बचा मालिक..पुलिस सक्रियता से शांत हुआ मामला..धान उठाव को लेकर विवाद

मुंगेली—धानमण्डी केन्द्र नवाडीह में धान उठाव के समय हमालों ने राइस मिलर पर हमला कर दिया। राइस मिलर तेजस अग्रवाल ने बताया कि हमालों ने चाचा को धान की बोरी के नीचे दबाकर जान से मारने का प्रयास किया। लेकिन मिल कर्मचारियों के प्रयास से चाचा को बचाया गया। जिसके चलते बड़ी घटना को टालने में सफलता मिली है। राइस मिलर ने बताया कि विवाद की असली वजह हमालों की मनमानी है।शनिवार को मुंगेली जिले के लोरमी तहसील स्थित नवाडीह धान संग्रहण केंद्र में हमालों ने मिलकर राइस मिलर पर हमला कर दिया। विवाद पुलिस थाने तक पहुंच गया। मिल मालिक तेजस अग्रवाल ने बताया कि दोपहर को शासन के निर्देश पर मिल स्टाफ ट्रक लेकर नवाडीह धान मण्डी पहुंचा। मण्डी के हमालों ने पहले तो धान लोड करने से मना कर दिया। बाद में प्रति बोरी दो रूपए अतिरिक्त दिए जाने की शर्त पर धान उठाव करने को कहा।CGWALL NEWS के व्हाट्सएप ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

 
                              राइस मिलर ने बताया कि हमालों की तरफ से धान उठाव नहीं किए जाने की जिद के बाद हमने मिल  कर्मचारियों से धान उठाव शुरू किया। इसके बाद मण्डी के सभी हमाल एक जुट होकर कर्मचारियों को ना केवल धान उठाव करने से रोका। बल्कि धान उठवा रहे चाचा निलेश अग्रवाल हमला कर दिया। बोरी के नीचे दबाकर मारने का प्रयास भी किया। विरोध करने पर उस पर भी हमला किया गया। मामले की खबर लगते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गयी।
 
               पुलिस ने बीच बचाव कर दोनों पक्षकों को थाना लाकर पूछताछ की।   तेजस  ने पुलिस को बताया कि शासन का स्पष्ट निर्देश है कि अपनी व्यवस्था पर धान का उठाव करें। बावजूद इसके हम परम्परानुसार मण्डी के हमालों से ही धान का उठाव कराते हैं। यह जानते हुए भी कि प्रति बोरी धान उठाव पर हमलों को दो रूपए दिया जाना है लेकिन हमालों ने चार की मांग की। जब हमने अपने कर्मचारियों से धान उठाव करवाना चाहा तो हमलों ने हमला कर दिया।             
 
            दोनों पक्षो को सुनने के बाद लोरमी पुलिस ने मिलर को कलेक्टर से धान उठाव को लेकर  एक आदेश लाने को कहा। तेजस ने बताया कि कलेक्टर से बातचीत हो गयी है। सोमवार को थानेदार के सामने कलेक्टर आदेश को दिखाकर धान का उठाव करेंगे। 
   
                          
मिलर ने बतायी पीड़ा       
        
                      तेजस ने बताया कि नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि प्रदेश में अधिकारियो की तरफ से मिलरों पर धान उठाव को लेकर लगातार दबाव बनाया जाता है। लेकिन मण्डी में हमालों की दादागिरी समेत कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस पर नियंत्रण किया जाना बहुत जरूरी है।  संग्रहण केंद्रों की अव्यवस्था की तरफ ध्यान नही दिया जाता। बारिश की वजह से कीचड़ होने से गाड़ियां फंसती हैं। 2  से 5 हजार रुपए प्रति गाड़ी खर्च होता है। 
 
 अधिकारियों की मनमानी से परेशान 
      
          धान निकालने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मजबूरी में सड़ा गला  धान भी उठाना पडता है। जबकि हम जानते हैं कि चावल खाने लायक नहीं होता। फिर भी अधिकारी सड़े गले धान को जबरदस्ती उठवाते हैं।
 
धान की कम तौल
 
                 धर्मकांटे में सेटिंग का खेल होता है। प्रति ट्रक डेढ़ से 3 क्विंटल वजन धान कम दिया जाता है।  सड़ी गली बोरियों में गीला और खराब धान दिया जाता है। अधिकारी अपनी गलतियों और धान सड़ने की लापरवाही को मिलरों पर थोप देते हैं।

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