संसद में घोंघा जलाशय की गूंज..सांसद साव ने की बर्ड सेंचुरी की मांग..बताया यहां आते हैं दुनिया के दुर्लभ पक्षी..मंत्री पोखरीयाल ने कहा..मुंगेली में खुलेगा केन्द्रीय विद्यालय

बिलासपुर—सांसद अरूण साव ने संसद मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में छत्तीसगढ़ में नवीन केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना और  घोंघा जलाशय से लगी करीब 20 एकड़ भूमि को ‘बर्ड सेंचुरी’ के रूप में विकसित किए जाने का मुद्दा उठाया है। 
 
                     कोरोना संक्रमण की विषम परिस्थितियों में संसद का मानसून सत्र सोमवार को शुरू हुआ। समयाभाव के कारण सांसदों को तारांकित प्रश्न पूछने की अनुमति दी गयी। सांसद साव ने तारांकित प्रश्न में छत्तीसगढ़ में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना का मुद्दा उठाया। साव को लिखित उत्तर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने बताया कि केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना एक सतत प्रक्रिया है। राज्य सरकार से प्राप्त प्रस्तावों को केंद्रीय विद्यालय संगठन के मापदंड के अनुसार आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। छत्तीसगढ़ के 8 जिलों बालोद, बलौदाबाजार, बलरामपुर, बेमेतरा, गरियाबंद, मुंगेली, सूरजपुर, और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में केंद्रीय विद्यालय नहीं है।
 
            मंत्री पोखरीयाल ने बताया कि मुंगेली में नया केंद्रीय विद्यालय प्रारंभ किया जा रहा है। इसके लिए लखनपुर में 12 एकड़ भूमि को चिन्हित किया गया है। वर्तमान में शासकीय उच्चतर विद्यालय भटगांव में 10 कमरों वाली एक इमारत की पहचान की गई है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में नया केन्द्रीय विद्यालय खोलने के लिए राज्य सरकार से अभी प्रस्ताव नहीं मिला है।
 
                       सदन में सांसद साव ने नियम 377 के तहत ग्राम शिवतराई कोटा में घोंघा जलाशय यानि कोरी बांध के निकट क्षेत्र को ‘बर्ड सेंचुरी’ के रूप में  विकसित करने उचित पहल और आवश्यक कार्रवाई के लिए सरकार से आग्रह किया। सांसद ने सदन को अवगत कराया कि विकासखंड- कोटा,  के ग्राम-परसदा, शिवतराई के पास घोंघा जलाशय यानि कोरी बांध है।
 
          अचानकमार टाईगर रिजर्व से जुड़े इलाके में सैकड़ों की संख्या में दुर्लभ प्रजाति के विदेशी पक्षी दिखाई देते हैं। घोंघा जलाशय के आसपास घने जंगल हैं। यह क्षेत्र गोल्डन बर्ड, डाटेड डब, ब्लैक स्टार, हुदहुद, ब्लैक व्हाईट , किंगफिशर, ब्लैड डग, ग्रे हार्नविल, जंगली मुर्गा-मुर्गी, उड़न गिलहरी, मयूर, जंगली मैना समेत दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों की आरामगाह के रूप में प्रसिद्ध है।
 
         साव ने सदन को जानकारी दी कि इसमें से कई पक्षी विलुप्ति के कगार पर हैं,। लेकिन इन  दुर्लभ प्रजातियों के परिंदों के संरक्षण में अब तक कोई पहल नहीं की गयी है। घोंघा जलाशय  से लगी लगभग 20 एकड़ भूमि पर परिंदों की आरामगाह के रूप में “बर्ड सेंचुरी” का निर्माण कराए जाने की आवश्यकता है ।

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