जोगी ने किया भावानात्मक शोषण- झगरराम

congress- panjaबिलासपुर–अमित जोगी य़ा जोगी परिवार का कोई भी सदस्य दलित समाज का कभी हितैषी नहीं रहा। उन्होने अपने कार्यकाल में करीब 95 प्रतिशत मंत्री पद उच्च जातियों को बांटे थे। दरअसल उन्हें उच्च जातियों को झुकान में मजा आता था। जो सभ्य सामाज के लिए किसी भी सूरत में अच्छा नहीं कहा जाएगा। उन्होने दलितों और वनवासियों का उपयोग केवल अपने हितों के लिए किया। जोगी ने दलितों का भावानात्मक शोषण कर अपनी ताकत को बढ़ाया है। लेकिन किया कुछ नहीं । यह बातें अनुसूचित जनजाति समाज के नेता झगरराम सूर्यवंशी ने कही।

                झगरराम ने बताया कि जोगी कभी दलित और आदिवासी समाज के हितैषी नहीं रहे। उन्होने दलित समाज का उपयोग अपनी ताकत दिखाने के लिए किया। उन्हें सवर्ण समाज को झुकाने में मजा आता है। उन्होंने संख्याबल दिखाकर कांग्रेस को हमेशा गुमराह किया है।

               झगरराम ने बताया कि अमित जोगी और अजीत जोगी कभी दलित नहीं हो सकते हैं। इन्होने तो दलित नहीं होने का हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया है। वैसे भी कलेक्टर और उसका बेटा दलित हो ही नहीं सकता है।

                      झगरराम ने बताया कि जोगी परिवार कभी दलितों का शुभचिंतक ही नहीं था। वे जब मुख्यमंत्री थे तो अपने दाएं बाएं उच्च जातियों के अलावा किसी को फटकने नहीं देते थे। मंत्री से लेकर पंचायत तक दलितों को उन्होंने कभी पद नहीं दिया। झगरराम ने बताया कि उनके मुख्यमंत्री काल में दलित समाज का प्रतिनिधिमंडल बिलासपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए मिलने गए। लेकिन जोगी ने एक सिरे इन्कार दिया। हम लोग अपना सा मुंह लेकर लौट गए।

                    जोगी की कार्यशैली का नतीजा है कि 2003 में अनुसूचित जाति और जनजाति के क्षेत्रों में कांग्रेस को भारी पराजय का सामना करना पड़ा। यदि वे दलित और आदिवासी हितैषी होते तो बस्तर संभाग और सरगुजा संभाग में उनके मुख्यमंत्रित्व काल में भारी जीत होती। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। झगर ने बताया कि प्रदेश में कांग्रेस का पतन का मुख्य कारण अजीत जोगी और उनका परिवार है।

raipur-congress_20141015_92042_15_10_2014 (1)                                  प्रदेश अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष ने बताया कि जोगी के निष्कासन से ना केवल दलितों का बल्कि आदिवासी समाज और अन्य वर्गों का भला होगा। झगरराम के अनुसार 2013 विधानसभा  चुनाव में  अनुसूचित जाति के सुरक्षित 10 सीटों में से मात्र एक सीट कांग्रेस के हाथ लगी। यदि जोगी जनाधार वाले नेता थे तो कम से पांच या दस से थोड़ा बहुत कम सीट तो कांग्रेस को मिलनी ही चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

              प्रदेश अनुसूचित प्रकोष्ठ के नेताओं ने बैठक के बाद बताया कि जोगी यदि अपने निष्कासन को दलितों और शोषितों की हार बता रहे हैं तो सरासर गलत है। सच्चाई तो यह है कि जोगी को पार्टी से बाहर निकाले जाने के बाद दलित,जनजाति और प्रतिभावान अन्य किसी भी वर्ग के कार्यकर्ताओं को नेतृत्व करने अवसर मिलेगा।

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