जोगी का भूपेश पर वार..एमपी से जुड़े हैं टेप के तार

raipur-ajit-jogi-1434345884रायपुर—बिलासपुर में भूपेश बघेल के बयान के बाद अजीत जोगी ने कहा है कि  ‘‘दो बंगलों से जुड़े तार‘‘ का जिक्र उनकी बौखलाहट और घबराहट का प्रमाण है। जिस टेप में भूपेश बघेल ने अपनी और सिद्दकी की बातचीत को स्वीकार किया है उसमें सिद्दीकी को महामंत्री पद का प्रलोभन और पूरे संगठन को पीछे खड़ा करने की बात  सिद्ध करती है कि भूपेश बघेल अपने षडयंत्र को सफल बनाने के लिए कांग्रेस जैसे पवित्र संगठन की भी बलि चढ़ाने को तैयार हैं।

                        जोगी ने बताया कि टेप में वे लेटर पेड में पूर्व की तारीख डालकर नियुक्ति करने का आश्वासन दिया है। इससे साबित होता है कि बघेल की मानसिकता आपराधिक प्रकृति है। टेप में उन्होने पप्पू से एक और पद देने की बात कही है।  जोगी के अनुसार प्रदेश की जनता जानती है कि यह एक और एक (1+1) अर्थात 2 का तात्पर्य क्या है।  ॉ

                     जोगी ने बताया कि इस संबंध में थाने में जो शिकायत  हुई है उसकी जांच में भी क्या वे अपने दम से अपने स्वयं के हित को संरक्षित करने का प्रयास नहीं करेंगे? जब वे दूसरों के लिए मात्र समाचार पत्र के आधार पर बिना किसी जांच के कार्यवाही करते हैं तो अब उनके ही संबंध में उनके द्वारा प्रमाणित आडियो टेप सामने आया है तो वे नैतिक आधार पर क्यों नहीं इस्तीफा दे रहे हैं।

                       जोगी ने कहा कि जांच पूर्ण होने तक वे इस्तीफा दें जिससे प्राकृतिक न्याय हो सके। शिकायत के बाद संगठन के कई लोगों के उठाये गये मुद्दों की जांच के संबंध में व्यक्तिगत बधाई दी और संगठन में तानाशाही से परेशान और असहज महसूस कर रहे हैं। यदि भूपेश बघेल नैतिक आधार पर इस्तीफा नहीं देते हैं तो अन्य बातों की तरह स्थिति स्पष्ट हो जायेगी कि सर्वाधिक जनाधार वाले नेता की पहचान हो जाएगी। छत्तीसगढ़ के आदिवासियों, दलितों, बुजुर्गों और युवाओं के दिलों में राज करने वाला नेता कौन है उन्हें भी पता चल जाएगा।

                       कथित सी.डी. के तार दो बंगलों से जुड़े हैं अथवा यह तार मध्यप्रदेश के किसी नेता के बंगले से जुड़े हैं इसकी सच्चाई भी जांच के बाद सामने आ जाएगी। भूपेश बघेल में यदि साहस है तो उन्हें शीघ्र संगठन चुनाव करने की पहल करनी चाहिए। सभी स्तरों पर जनाधार वाले नेताओं की पहचान हो सके और उन्हें अपने मनोनीत ब्लाक और जिला स्तर पर नामांकित पदाधिकारियों के आधारहीन प्रस्तावों का सहारा लेने की नौबत न आये।

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