साइंस एक्सप्रेस देखने उमड़ी भीड़

Scienceबिलासपुर—भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पर्यावरण एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, रेल मंत्रालय के संयुक्त रूप से जलवायु परिवर्तन विषय पर आधारित विज्ञान एक्सप्रेस चलाया जा रहा है।  आठवें चरण में 15 अप्टूबर 2015 से दिल्ली सफदरजंग स्टेशन से निकली साइंस एक्सप्रेस भारत के अलग-अलग राज्यों के 64 स्टेशनों से होते हुए करीब 07 महीने की अवधि में 19,800 किमी की यात्रा तय करेगी। साइंस एक्सप्रेस दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर स्टेशन में प्रदर्शन के लिए 31 जनवरी को बिलासपुर स्टेशन पहुंची है। 02 फरवरी तक प्लेटफार्म नं. 07 पर रूकेगी।

                        प्रदर्शनी एक्सप्रेस का विधिवत शुभारंभ मंडल रेल प्रबंधक रविन्द्र गोयल 31 जनवरी को किया। पिछले दो दिनों में प्रदर्शनी को देखने जमकर भीड़ पहुंच रही है। सुबह 10 बजे से शाम 06.00 बजे तक लोगों का तांता देखने को मिल रहा है। प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को बताने का प्रयास किया गया है कि जलवायु परिवर्तन की समस्या को किस प्रकार से अनुकूलन के जरिए रोका जा सकता है।

                   प्रदर्शनी निःशुल्क लेकिन एक्सप्रेस के अंदर मोबाइल, केमरा, बैग, माचिस, सिगरेट, बीडी, तंबाखू, पानी की बोतलें, किसी भी प्रकार के तरल पदार्थ, नुकीली वस्तुओं को ले जाना मना है। पिछले दो दिनों में रेल प्रशासन के अनुसार 16 हजार से अधिक लोगों ने इसका लाभ उठाया।

                         ,       मोबाइल साइंस प्रदर्शनी एक्सप्रेस में 16 कोच लगाए गए हैं। 8 डिब्बों में जलवायु परिवर्तन के विविध पहलुओं पर सूचना, केस अध्ययन और समस्याओं को प्रदर्शित किया गया है। बुनियादी विज्ञान, जलवायु प्रभाव, अनुकूलन गतिविधियों, अल्पीकरण के समाधान और नीतियों के दृृष्टिकोण को बेहद सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। कोच संख्या 9 से 11 में भारत में विभिन्न अनुसंधान संस्थानों द्वारा वन्य जीवन एवं प्रकृति संरक्षण, खास तौर पर कछुआ, प्रवाल भित्ती, उभयचर संरक्षण के विषय में हो रहे कार्यों की प्रदर्शनी है। भारत में जैव-प्रौद्योगिक के क्षेत्र में हो रहे विकास, भारत में विज्ञान शिक्षण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिक विभाग की छात्रवृत्तियों और उपलब्ध व्यवसाय इत्यादि विषयों को भी बताया गया है।

                                कक्षा 3-5 के छात्रों के लिये किड्स-जोन कोच को भी जोड़ा गया है। इसमें छात्रों को दिमागी कसरत कराने और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने वाले खेल रखे गये हैं।इसके अलावा लोकप्रिय ज्वाय आफ साइंस प्रयोग शाला को एक अन्य कोच में स्थापित किया गया है। प्रयोग-शाला में छात्र विभिन्न प्रयोगों और गतिविधियों के जरिए रोचक ढंग से जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को समझाया गया है। पर्यावरण विज्ञान और गणित के शिक्षकों के क्षमता निर्माण के लिये एक चर्चा-सह-प्रशिक्षण केन्द्र की सुविधा भी ट्रेन में प्रदान की गई है।

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