विवादों के घेरे में पं. सुन्दरलाल शर्मा विश्वविद्यालय

sundarlalsundarlalबिलासपुर—लोखण्डीगुड़ा नकल प्रकरण के बाद एक बार फिर पं सुन्दरलाल शर्मा मुक्त विवि विवादों के घेरे में है। अध्यापकों की भती में रोस्टर नियम का पालन नही किया गया है। केन्द्र समन्यवकों के आरोप का विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक सिरे इंकार किया है। समन्यवयकों की माने तो अपने लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूर्व में निकाले गये विज्ञापन को निरस्त कर प्राध्यपकों की भर्ती के लिए नियम विरूद्ध विज्ञापन निकाला गया है।

                                    लोखण्डीगुड़ा नकल प्रकरण के बाद एक बार फिर पं. सुन्दर लाल शर्मा मुक्त विवि विवादों के घेरे में है। केन्द्र समन्यवयकों ने कुलपति और प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जानकारी के अनुसार पंडित सुन्दर लाल शर्मा विश्वविद्यालय में अध्यापकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद साक्षात्कार की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हुई । जैसा की हमेशा से होता आया है साक्षात्कार विवादों के घेरे में आ गया है।

                  कर्मचारियों का आरोप है कि साक्षात्कार प्रक्रिया में विश्वविद्यालय नियमों का पालन नही किया  गया है। मुक्त विवि के केन्द्र समन्वयक ने बताया कि विवि के पहले वाइस चांसलर प्रो. टी.डी. शर्मा के कार्यकाल में भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। तात्कालीन समय विवि प्रशासन ने कुल 21 पद के लिए आवेदन मंगवाए थे। आवेदन जमा भी हुए। लेकिन कुलपति शर्मा का कार्यकाल इस बीच खत्म हो गया। जिसके चलते भर्तियां लंबे समय तक नही हुई।

                          इसी तरह दूसरे कुलपति अवधेश चन्द्राकर के समय भी भर्तियां लंबित रहीं। एक बार फिर विश्वविद्यालय ने रिक्त पदों के लिए विज्ञापन जारी किया । लेकिन कुछ पदों की कटौती कर दी। साथ ही आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया। पदों की संख्या घटकर 13 हो गयी। समन्यवयकों का आरोप है कि भर्तियों में रोस्टर नियम का पालन नही किया गया है।

                          लोगों का आरोप है कि ऐसा कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है। नियमानुसार एक बार यदि रोस्टर नियम में विज्ञापन जारी होता है तो उसी विज्ञापन के लिए दुबारा नियम में विश्वविद्यालय को बदलाव करने का अधिकार नहीं है। बावजूद इसके विश्वविद्यालय ने ऐसा किया है। साक्षात्कार में कुछ भाजपा नेता और विवि में अधिकारी रह चुके बेटे,बेटियों चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया है। केन्द्र समन्वयक ने बताया कि इस बात की शिकायत राजभवन में की जाएगी।

भर्ती नियमानुसार

                         पंडित सुन्दर लाल शर्मा मुक्त विवि के कुलसचिव सचदेव के अनुसार अध्यापकों की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया नियमानुसार हुई है। नियमों के साथ कहीं भी छेड़छाड़ नहीं किया गया है। साक्षात्कार में पारदर्शिता का ध्यान रखा गया है। आवेदन देखने के बाद पात्र लोगों को ही साक्षात्कार में बुलाया गया है। विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र, अंग्रेजी समेत कई विषयों के अध्यापकों की भर्ती होगी। साक्षात्कार नियमानुसार होगा।

आरक्षण नियमों का पालन

             मुक्त विवि के मीडिया प्रभारी दीपक पाण्डेय ने बताया कि जिन पदों के लिए साक्षात्कार हो रहा है वे सभी पद विश्वविद्यालय के पहले वाइस चांसलर के कार्यकाल के हैं। किन्हीं कारणों से भर्तियां नहीं हो पयी थी। अब प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। आरक्षण नियम का पालन नही होने की बात गलत है।

                          बताना जरूरी है कि पडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना काल से ही स्नातक पाठ्यक्रम बीए ,बीकाम, बीएससी,बी.लिब और स्नातकोत्तर के लिए एमए, एमएससी समेत पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा, पीजीडीसीए और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया। विवि के पहले वाइस चांसलर प्रो. टी.डी. शर्मा के समय संसाधनों और अध्यापकों की कमी के बाद भी परीक्षार्थियों को प्रवेश दिया गया। दूरवर्ती शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं की भरमार हो गई। विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने से व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई। तात्कालीन समय और बाद में भी इसका प्रभाव परीक्षाओं पर पड़ा। विवि की सत्र परीक्षाएं काफी विलंब से होने लगी। छात्रों को रिजल्ट के लिए दो से तीन साल तक का इंतजार करना पड़ा है। अव्यवस्था इस हद तक थी कि कई परीक्षार्थी सालों अंकसूची का इंतजार करते रहे।

                 पहले कुलपति के बाद मुक्त विवि की अगुवाई का जिम्मा अवधेश चन्द्राकर को मिला। काफी हद तक छात्रों की समस्याओं और प्रबंधन की कछुआ गति पर लगाम लगाया। नए परीक्षार्थियों के प्रवेश को रोकने के साथ ही पिछली परीक्षाओं को समय पर कराने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने भी विवि में प्राध्यापकों की भर्ती के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया। लेकिन भर्ती नही हो पायी।

                  एक बार फिर विश्व विद्यालय ने डॉ.बीजी.सिंह की अगुवाई में प्राध्यपकों समेत अन्य पदों के लिए विज्ञापन जारी किया। लेकिन यह विज्ञापन विवादों के घेरे में है। विवि में केन्द्र समन्वयक और सहायकों ने रोस्टर नियम में मनमानी करने का आरोप लगाया है। आरोप लगाने वालों के अनुसार विवि ने पुराने निकाले गय़े विज्ञापनों में बदलाव किया है। जो नियम विरूद्ध है । एक बार यदि कोई पद आरक्षित सीट से जारी हो जाता है तो वह बदल नही सकता है । लेकिन यहां आरक्षण नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पहली बात तो पद संख्या कम किया गया है। दूसरी चीज कि संशोधित पदों में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

 

 

 

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