बस्तर में लगेगा चलित कोर्ट…शासन का फरमान..दिव्यांग परेशान

handicappedबिलासपुर—  तीस जून को दिव्यांगों के लिए चलित कोर्ट जगदलपुर में लगाया जाएगा। चलित कोर्ट में प्रदेश के दिव्यांग अपनी शिकायतों को सामने रखेंगे। समाज कल्याण संचालनालय राज्य के सभी संयुक्त संचालकों ,उप संचालकों को निर्देश दिया है कि अपनी व्यवस्था पर दिव्यांगों को कोर्ट में अनिवार्य रूप से उपस्थित होना है।

                                 30 जून को बस्तर में दिव्यांगों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने बस्तर में मोबाइल कोर्ट लगाने का निश्चय किया है। संचालक, समाज कल्याण संचालनालय ने एक आदेश जारी कर राज्य के संयुक्त संचालकों और उपसंचालकों को कार्यक्रम में उपस्थित रहने को कहा है। आदेश के अनुसार जिलों से दिव्यांगों को अपने स्तर पर व्यवस्था के साथ  न्यायालय में पहुंचने होगा।

                                 सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चलित कोर्ट का आयोजन गुपचुप तरीके से किया जा रहा है। लोग समझने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर इतनी गोपनीयता रखने का कारण क्या हो सकता है। लोग स्थान चयन को लेकर भी खासे परेशान हैं। समझने की कोशिश कर रहे हैं कि दिव्यांगों के लिए चलित कोर्ट लगाने का फैसला आखिर बस्तर में ही क्यों लिया गया। रायपुर को दरकिनार कर जगदलपुर के चुनाव का आधार क्या है।

                    एक अधिकारी ने नाम नहीं छापे जाने के शर्त पर बताया कि सुदूर नक्सल प्रभावित रेड जोन में प्रदेश के दिव्यांगों को बुलाकर मोबाइल कोर्ट लगाने के पीछे विभाग की मंशा क्या है…समझ से परे है। लेकिन इतना तो निश्चित है कि अंबिकापुर, रायगढ़, जशपुर, बिलासपुर जैसे सुदुर उत्तरी जिलों से 300 से 700 किमी की दूरी तय कर जगदलपुर पहुचने में दिव्यांगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा।

                                      अधिकारी ने बताया कि जगदलपुर में मोबाइल कोर्ट का आयोजन गुपचुप तरीके से किये जाने का प्रयास विभाग कर रहा है। इसमें कुछ काला जरूर है। ऐसे में निःशक्तजनों की समस्याओं का निराकरण कोर्ट से कितना होगा इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। संभव है कि राज्य के कई जिलों के निःशक्तजन कोर्ट तक पहुंचने में चूक जाए।

            शासन ने दिव्यांगों को बेहतर अवसर के लिए सुविधाओं का लगातार विस्तार देने का प्रयास किया है। किन्तु संचालन करने वालों योजनाओं की धज्जियाँ उड़ाकर लोगों तक सुविधाओं के बजाय तकलीफ बाटने का कोई कसर नहीं छोड़ा है। मालूम हो कि सरकार की इन तमाम योजनाओं से साहबों की चांदी हो जाती हैं। दिव्यांगों के चलित कोर्ट में भी कुछ ऐसा ही होने वाला है। खर्च के आंकड़े कुछ और होंगे…बताए कुछ और ही जाएंगे। बिल व्हाउचर, यात्रा व्यय, भोजन व्यवस्था,आवागमन पर लाखों रूपए का खर्च दिखाया जाएगा। चलित कोर्ट का आयोजन इन्हीं सब फायदों को ध्यान में रखकर अधिकारियों ने बस्तर में करने का निर्णय लिया है।

 

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  1. By प्राण चड्ढ़ा

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