एक रमन का गाँव ……और एक जोगी का गाँव….

fixed_sunday  हम लोग छत्तीसगढ़ में रहते हैं। इसलिए छत्तीस के आँकड़े से अकसर रू-ब-रू होते रहते हैं…..। 21 जून की तारीख भी इसका गवाह बनी। जब सूबे के मौजूदा मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के पुश्तैनी गाँव ठाठापुर(रामपुर) और इधर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को गाँव-घर मरवाही में सियासी मेले लगे। यह हमारी सियासत का एक नायाब नमूना है… पन्द्रह साल से हम उसके आस-पास ही घूम रहे हैं। चूंकि हमारे ही फैसले की वजह से हमारे पास एक मुख्यमंत्री और एक पूर्व मुख्यमंत्री हैं। तभी तो बीजेपी की पूरी राजनीति मुख्यमंत्री के आस-पास ही घूम रही है और कांग्रेस की राजनीति का दायरा पूर्व मुख्यमंत्री से बाहर नहीं आ पाया। बीजेपी में भी अंदरुनी कलह है और लोग चाहते हैं कि मुख्यमंत्री के रूप में और नाम भी जुड़े। तभी तो कोई सोहन पोटाई बगावत करता है तो कभी नंदकुमार साय जैसे पक्के आदिवासी नेता की नाराजगी चर्चा में रहती है। लेकिन भाजपाई सीएम के सौम्य चेहरे के चारों तरफ जो आभा मंडल बना है, उसकी चमक में सब गुम हो जाते हैं। कांग्रेस की कहानी इससे उलट है। राज्य बनने के बाद कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिला। लेकिन 2003 के चुनाव में अजीत जोगी की अगुवाई में पार्टी हार गई। तब से कांग्रेस कचरे में गुम हुए मोती की तरह अपनी हार का ही कारण खोज रही है। कांग्रेस को खोया हुआ मोती तो नहीं मिला। लेकिन इस खोज अभियान में लगे लोगों को हर बार अजीत जोगी का चेहरा ही नजर आता रहा।

IMG-20160621-WA0019आखिर अब ताजा तस्वीर ऐसी है कि जोगी कांग्रेस से अलग हो गए और अपनी नई कांग्रेस बना ली। लेकिन 2018 के लिए अभी से जिस कार्पेट का ताना-बाना तैयार हो रहा है, उसमें मौजूदा मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के अपने गाँव ही सुर्खियों में रहे। पहले चलते हैं, डा. रमन सिंह के गाँव-ठाठापुर…..। कबीरधाम जिले के पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के इस गाँव का नाम अब रामपुर हो गया है। जोगी ने अपनी नई पार्टी के नाम का ऐलान करने इस गाँव को यकीनन यह संदेश देने के लिए ही चुना था कि बीजेपी ही उनकी दुश्मन नम्बर एक है। और दुश्मन के घर मे ही उसे ललकारने से आगे की जँग दिलचस्प हो जाएगी। गाँव के भाठाटोला के मैदान में लगा जोगी मेला कोटमी मेले से कहीं ज्यादा बड़ा भी था और लोगों में उत्साह भी अधिक था। लेकिन एक फर्क था कि कोटमी में मौजूद विधायक सियाराम कौशिक, आर.के. राय, डा. रेणु जोगी की इस बार गैरहाजिरी लग गई।  मँच पर विधायक अमित जोगी सहित पूर्व विधायक धरमजीत सिंह, विधान मिश्रा, चैतराम साहू, परेश बागबहरा, चन्द्रभान बारमते, गुलाब सिंह, भानुप्रताप सिंह , अनिल टाह और सुकमा जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश कवासी आगे की लाइन में थे। सड़क के किनारे चार पहिया गाड़ियों की लम्बी कतार लगी थी और “ ए दारी- जोगी के बारी “ के नारों के साथ बड़े-बड़े कटआउट लगे थे।भीड़ का उत्साह इतना अधिक था कि कोटमी की तरह यहां भी मंच और पंडाल के बीच खड़े लोगों की वजह से बार-बार धक्का-मुक्की और अव्यवस्था का आलम था।

IMG-20160621-WA0010  ठाठापुर में जोगी को चाँदी का ताज पहनाया गया और उनके ऊपर गेंदे के फूलों की बौछार की गई, तो लगा जैसे मौजूदा मुख्यमंत्री के गाँव में पूर्व मुख्यमंत्री की ताजपोशी का जश्न  मनाया जा रहा है। भाषण की शुरूआत में ही धरमजीत सिंह ने अपने खास चुटीले अँदाज में अपनी नई पार्टी की यह लाइन तय कर दी थी कि बीजेपी सरकार के कारनामों को उजागर करना है।उन्होने जोगी के तीन साल के काम-काज के मुकाबले बीजेपी के तेरह साल के भ्रष्टाचार को सिलसिलेवार पेश कर यह भी बताया कि फिर से जोगी  सरकार बनी तो किसानों , आम लोगों से लेकर व्यापारियों , कर्मचारियों , उद्यमियों को किस तरह की राहत दी जाएगी। फिर तो अजीत जोगी ने भी मौजूदा सरकार को उखाड़ फेंकने की गुहार लगाते हुए किस्सागोई के अँदाज में पूरी कहानी भीड़ के सामने रख दी।उनका भाषण सामने बैठे लोगों के साथ सीधे संवाद के की तर्ज पर  था। लेकिन लम्बे भाषण के दौगान नई पार्टी के नाम  को लेकर जिज्ञासा बनी रही। मेले में मौजूद लोगों को तभी ‘ताबीज” मिल पाया, जब गाँव की एक छोटी बच्ची नेहा साहू को बुलाकर अजीत जोगी ने बच्ची के कान में पार्टी का नाम बताया और बच्ची ने काले तख्ते में सपेद चाक से लिखा- “ छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ( जोगी)”…………….. और फिर जय जोगी के नारों के साथ मेला उजड़ गया………..।

20160621_134309 21 जून का ही दूसरा सीन मरवाही का है। जो पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का गाँव है। यहां पर भी इसी दिन कांग्रेस का बड़ा मेला लगा……..। इस मेले मे ऐसे लोग जुटे थे जो छत्तीसगढ़ कांग्रेस को जोगी राज और सूबे को रमन राज से मुक्त कराने की शपथ ले रखे हैं। जोगी की बगावत , कांग्रेस से बाहर होने और नई कांग्रेस बना लेने के बाद राहत की साँस ले रहे लोगों ने जोगी के गाँव में ही अपनी ताकत दिखा दी। यह भी दिखा दिया कि बिना जोगी के मरवाही में कांग्रेस कैसी नजर आती है। यह भी दिखा दिया कि सूबे के कितने कांग्रेसी उनके साथ हैं। यहां भी सैकड़ों चारपहिया गाड़ियों में लोग पहुंचे और काफी दूर-दूर से पहुंचे। इस मेले में सम्मेलन से पहले पेश किए गए “छत्तीसगढ़ी सांस्कुतिक कार्यक्रम ( नाचा) को कुछ ने भीड़ जुटाने की कवायद माना तो कुछ जोगी के कांग्रेस से बाहर होने का जश्न मान रहे थे। कांग्रेस को यह शो इस मायने में असरदार रहा कि इसमें पार्टी के प्रदेश प्रभारी बी. के.हरिप्रसाद सहित भूपेश बघेल,डा. चरणदास महंत. टीएस सिंहदेव, सत्यनारायण शर्मा, मोहम्मद अकबर  जैसे दिग्गज और कई जिलों के कांग्रेस अध्यक्ष शामिल हुए । सम्मेलन में करीब अठारह विधायकों की हाजिरी दर्ज हुई। खास बात यह भी रही कि अब तक जोगी के साथ समझे जाने वाले रामदयाल उईके, अमरजीत भगत औऱ दिलीप लहरिया जैसे विधायकों को मँच पर खड़े कर यह कहलवा लिया गया कि “जोगी के गाँव में जुटी कांग्रेस ही असली कांग्रेस है”। यहाँ भी भीड़ कम उत्साहित नहीं थी। और इस जलसे की तैयारी में लगे लोग इस जोश के साथ मरवाही से वापस लौटे कि “ अपना काम हो गया “……….।

20160621_141238  मजा यह है कि ठाटापुर में जैसे जोगी ने अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस का कोई जिक्र नहीं किया, ठीक उसी तर्ज पर मरवाही के मंच पर जोगी किसी के निशाने पर नहीं आए। दोनों जगह बीजेपी सरकार को ही आड़े-हाथों लिया गया।लोग इसका मतलब अपने-अपने तरीके से निकाल रहे हैं। ज्यादातर मानते हैं कि मौजूदा सरकार को उखाड़ फेंकने का लक्ष्य लेकर दोनों चल रहे हैं। लिहाजा नम्बर दो पर खुद को दिखाते रहना दोनों की मजबूरी है।जोगी की नजर में कांग्रेस औऱ कांग्रेस की नजर में जोगी तीसरे नम्बर पर दिखाई दे रहे हैं। मुकाबला तो इस बात का है कि बीजेपी को ठिकाने कौन लगाएगा ? हाँ….एक –दूसरे के खिलाफ जहर उगलने की बजाय चुप्पी लगाकर भूपेश-ठीएस बाबा की  कांग्रेस और जोगी कांग्रेस ने “खुली दुश्मनी” के साथ यह मैसेज भी दे दिया है कि 2018 के चुनाव के बाद सीटों के समीकरण में अगर फिर दोस्ती करने की नौबत आई तो शर्मिंदा ना होना पड़े…….। सियासत में दिलचस्पी रखने वालों ने मौजूदा और पूर्व मुख्यमंत्री के गाँव में एक ही दिन  हुए दंगल में जुटी भीड़ की गिनती लगाकर किसी नजीते पर पहुंचने की कोशिश भी की है। लेकिन अपना तो यही मानना है कि सभी जानते हैं भीड़ कैसे जुटती है और उसके लिए क्या-क्या करना पड़ता है………। भीड़ कुछ कहती नहीं……..। भीड़ भी वही सब देखने आती है, जिसे देखने राजनीतिक पंडित भी आते हैं………। भीड़ वर्तमान को भी देख रही है……भूतपूर्व को भी देख रही है…….और वर्तमान – भूतपूर्व से अलग खड़ी जमात को भी परख रही ही…….। किसके सिर पर चाँदी का ताज होगा और किस पर फूलों की वर्षा होगी ? फैसला आने में अभी काफी वक्त है………।

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  1. By प्राण चड्ढ़ा

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