झीरम कांड की सुनवाई अब 12 अगस्त को

JHEERAM_GHATI_VISUAL 001बिलासपुर—-झीरम मामले में आज विशेष न्यायालय के सामने विवेक वाजपेयी की याचिका पर सुनवाई होनी थी। पिछली सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार को वायजपेयी की पांच विभिन्न याचिका को लेकर तलब किया था। राज्य सरकार ने आज कोर्ट के सामने जवाब पेश नही किया। विशेष न्यायालय ने सरकारी वकील को मामले को गंभीरता से लेने को कहा है। झीरम घटना के चश्मदीद विवेक वाजपेयी की भी आज सुनवाई नहीं हो पायी है। सरकार से मिलने के बाद विवेक वाजपेयी का बयान दर्ज किया जाएगा।

                       झीरम हत्याकाण्ड मामले में आज विशेष न्यायालय के सामने सुनवाई हुई। झीरम काण्ड में तात्कालीन पीसीसी अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, महेन्द्र कर्मा,विद्याचरण,उदय मुदलियार समेत करीब 25 से अधिक कांग्रेसी नेताओं की नक्सलियों ने घेरकर हत्या की थी। घटना में नन्दकुमार पटेल के पुत्र को भी नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया था। बिलासपुर के कांग्रेस नेता विवेक बाजपेयी झीरम काण्ड के दौरान यात्रा में शामिल थे। घटना में वे बाल बाल बच गये।

                                डॉक्टर विवेक बाजपेयी के अनुसार यदि समय पर पुलिस पहुंचं जाती तो झीरम कांग्रेेस के कई नेताओं की जान बच सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पेट्रोलिंग के दौरान पुलिस की तरफ से काफी लापरवाही की गयी थी। विवेक बाजपेयी ने पिछली सुनवाई के दौरान विशेष न्यायालय के सामने सरकार से पांच बिन्दुओ की जानकारी देने की अपील की थी। झीरम कांड में शामिल नक्सलियो को सरेंडर के बाद पुनर्वास नीति के तहत सरकार ने क्या सुविधधाएं दी। सरेडंर किए गये नक्सलियों की भी कोर्ट में पेश होने की मांंग की थी। कोर्ट ने वाजपेयी की याचिका को मान्य करते हुए राज्य सरकार से मामले में जवाब मांगा था।

विवेक ने पिछली सुनवाई में तात्कालीन कलेक्टर एलेक्स पाल मेमन का भी बयान करने को कहा था। जिनका नक्सलियो ने अपहरण किया था। आज सुनवाई में राज्य सरकार की तरफ से जबाव पेश नहीं किया गया।विवेक वाजपेयी ने बताया कि सरकार ने गुप्तचर व्यवस्था पर मांगे गए जवाव में जो दस्तावेज पेश किए है उससे जाहिर होता है कि कुछ छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। कोर्ट के सामने पेश किए गए दस्तावेज 19 पन्नों की है जबकि उनके पास इंटेलिजेंस से 24 पन्नों का रिकार्ड उपलब्ध है।

विशेष न्यायाधीश जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने बताया कि अब सुनवाई 12 अगस्त को होगी। सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता से कहा कि सरकार मामले को गंभीरता लेते हुए सवालों का समय पर जवाब दे।

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