नक्सली इलाकों में हमारे शिक्षकों की कर्त्तव्य निष्ठा अनुकरणीय-रमन

2807cc♦बजट का 23 प्रतिशत हिस्सा नई पीढ़ी की शिक्षा के लिए खर्च
♦दूरस्थ इलाकों में कई शिक्षक सराहनीय कार्य

रायपुर।सोमवार को शिक्षक दिवस के मौके पर राष्ट्रीय शिक्षक कल्याण प्रतिष्ठान द्वारा राजभवन में आयोजित राज्य शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया।जिसमे राज्य के 22 स्कूल शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान से नवाजा गया, इनमें से चार शिक्षकों को प्रदेश के चार सुप्रसिद्ध साहित्यकारों की स्मृति में विशेष रूप से पुरस्कृत किया गया। मुख्य अतिथि राज्यपाल बलरामजी दास टंडन और समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सभी पुरस्कृत और सम्मानित शिक्षकों को बधाई दी। विशेष अतिथि की आसंदी से स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप ने भी समारोह को संबोधित किया।शिक्षा मंत्री ने साल2016 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित शिक्षकों के नामों की घोषणा की।

                                              राज्यपाल टंडन ने अपने उदबोधन में यह भी कहा कि जीवन की सीढ़ियां शिक्षा के माध्यम से ही चढ़ी जा सकती है। उन्होंने रविन्द्रनाथ टैगोर और लोकमान्य तिलक जैसी महान विभूतियों की जीवन गाथा का जिक्र करते हुए कहा कि इन विभूतियों में शिक्षक के रूप में भी समाज को रास्ता दिखाने का कार्य किया। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षकों को हमारे देश और समाज का मेरूदण्ड माना जाता है। उन्हें अपने भीतर के ज्योति पुंज से समाज को राह दिखाने का प्रयास करना चाहिए। माता-पिता बच्चों को जन्म देते है लेकिन उन्हें मार्गदर्शन देने का कार्य शिक्षक करते हैं।

                                            डॉ. रमन सिंह ने कहा कि सरकार शिक्षकों को संसाधन दे सकती है, लेकिन समर्पण और सेवा की भावना से काम करके समाज में परिवर्तन लाने की बड़ी जिम्मेदारी शिक्षकों पर है। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ देश का अकेला ऐसा राज्य है जो अपने बजट का सर्वाधिक लगभग 23 प्रतिशत हिस्सा नई पीढ़ी की शिक्षा के लिए खर्च कर रहा है।

                                            मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश में शिक्षकों की सम्मान की हजारों साल पुरानी परम्परा है। चाणक्य जैसे शिक्षक ने राज्य नहीं बल्कि अखण्ड भारत के रूप में विशाल राष्ट्र की परिकल्पना की थी और एक गरीब छात्र चन्द्रगुप्त मौर्य को इसके लिए तैयार किया था। मुख्यमंत्री ने राज्य के नक्सल हिंसा और आतंक से पीड़ित इलाकों में सेवा की भावना से काम कर रहे प्रदेश सरकार के शिक्षकों की कर्त्तव्य निष्ठा को अनुकरणीय बताया। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने समारोह में शिक्षक दिवस के रूप में मनाए जा रहे देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का भी उल्लेख किया।

                                             मुख्यमंत्री ने इस मौके पर डॉ कलाम को भी याद किया और कहा कि महान वैज्ञानिक डॉ. कलाम राष्ट्रपति के सर्वोच्च पद पर पहुंचकर भी स्वयं को एक शिक्षक कहलाने में गर्व महसूस करते थे। यहां तक कि उन्होंने छात्र-छात्राओं को शिक्षक के रूप में व्याख्यान देने हुए अंतिम सांस ली। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के दूरदराज इलाकों में सेवा कर रहे शिक्षकों की तारीफ करते हुए कहा कि जब ‘लोक सुराज’ और ‘ग्राम सुराज’ जैसे प्रदेश व्यापी अभियानों में मुझे गांवों में जाने का मौका मिलता है और वहां हजार-दो हजार लोगों के बीच जब गांव के लोग अपने किसी शिक्षक की कर्त्तव्य परायणता की तारीफ करते है और उन्हें मंच पर बुलाकर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाता है तो मुझे बहुत खुशी होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ इलाकों में कई शिक्षक सराहनीय कार्य कर रहे हैं। अपने अध्यापन कार्य में कम्प्यूटर का उपयोग कर रहें है।

                                          मुख्यमंत्री डॉ सिंह ने नक्सल प्रभावित इलाकों में बीजापुर, दंतेवाडा, सुकमा, नारायणपुर, कोण्डागांव, कांकेर, जगदलपुर, मानपुर-मोहला, बलरामपुर जैसे इलाकों में सेवा और सम्पर्ण की भावना से काम कर रहे शिक्षकों की विशेष रूप से तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज बस्तर संभाग के नक्सल समस्या वाले जिलों के बच्चे प्रयास विद्यालयों में पढ़ाई करके आई.आई.टी. जैसे संस्थानों में चयनित हो रहें है। इसमें हमारे शिक्षकों का भी बड़ा योगदान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल आतंक की चुनौती के बीच हमारे शिक्षकों की कर्त्तव्य निष्ठा अनुकरणीय है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *