मेरी बुनियाद में हैं बाबूजी…डॉ.रमन

IMG20160921141939 audi_1बिलासपुर—अल्प प्रवास पर बिलासपुर पहुंचे डॉ.रमन सिंह ने आज सौगात की बरसात की। शहर में 65 करोड़ की लागत से विभिन्न निर्माणकार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। सीएम ने 20 करोड़ की लागत से बने सर्वसुविधायुक्त लखीराम स्मृति आडिटोरियम को आम जनता को समर्पित किया। सीएम ने  सिटी बस टर्मिनल का भी लोकार्पण किया।

                          मिशन अस्पताल रोड में नवनिर्मित स्वर्गीय लखीराम स्मृति सभागार का सीएम ने आज लोकार्पण किया। लोकार्पण समारोह के दौरान सीएम ने कहा कि बाबूजी में निर्णय लेने की अद्भूत क्षमता थी। वे दूरदर्शी और युगदृष्टा थे। आज में राजनीति में जो कुछ भी हूं इसमें बाबूजी का सबसे बड़ा योगदान है। सीएम ने कहा कि स्वर्गीय लखीराम जी चुनौती लेने से कभी भी नहीं घबराते थे।

                                                  लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह, नगरीय निकाय मंत्री अमर अग्रवाल, विधानसभा उपाध्यक्ष बद्रीधर दीवान, सांसद लखनलाल साहू, संसदीय सचिव राजू क्षत्री, रायगढ़ विधायक रोशन लाल अग्रवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक , महापौर किशोर राय, सभापति अशोक विधानी उपस्थित थे।

               नवनिर्मित स्व लखीराम अग्रवाल स्मृति सभागार का लोकार्पण सीएम ने फीता काटकर किया। इसके बाद सीएम ने शहरी आजीविका मिशन के तहत लगाए गए स्टाल का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने आडिटोरियम के मैदान में पौधरोपण भी किया । आडिटोरियम सभागार में उपस्थित लोगों के सामने मुख्यमंत्री ने लखीराम अग्रवाल पर डॉ.संंजय द्विवदी की पुस्तक लक्ष्य निष्ठ- लखीराम अग्रवाल का विमोचन किया।

                         सभा को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि शहर के बीच में बना सभागार बहुद्देशीय जरूरतों को पूरा करेगा। उन्होने कहा कि स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल ना केवल भाजपा के पितृ पुरूष थे बल्कि आज मैं जो कुछ भी हूं…उसमें लखीराम जी का बहुत बड़ा योगदान है। वे दूरदर्शी थे…उन्होने छत्तीसगढ़ को स्वरूप दिया। कमोबेश यहां उपस्थित मंत्री,पार्षद या वरिष्ठ भाजपा नेता सभी को उनके सानिध्य में काम करने का अवसर मिला है।

IMG20160921141842                         मुख्यमंत्री ने कहा कि दरअसल लखीराम अग्रवाल उन महान नेताओं में शुमार हैं जिन्हें दुनिया बहुआयामी प्रतिभा की धनी कहती हैं। लखीराम में निर्णय लेने की क्षमता जबरदस्त क्षमता थी। वे मुंह देखकर बात करने वाले नेताओं में शामिल नहीं थे। वह राजनीति के बहुत बड़े योद्धा थे। जरूरत पड़ने पर सरकार से भी टकराने का माद्दा रखते थे। मै आज जो कुछ भी हूं उसके बुनियाद में बाबू जी का योगदान है। उन्होनेे कहा कि मै विधानसभा हारने के बाद मुझे राजनांदगांव से चुनाव लडाने का निर्णय लखीराम का ही था। इसके बाद केन्द्र में मंत्री बना। उन्होने ही मुझे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाया। आगे की कथा सभी को मालूम है।

                                            उपस्थित लोगों को भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने भी संबोधित किया।

स्वर्गीय लखीराम आडिटोरियम

                                     स्वर्गीय लखीराम आडिटोरियम आठ साल के लगातार प्रयास के बाद तैयार किया गया है। करीब एक एकड़ में बना आडियोटोरिय आठ साल में तैयार किया गया है। शासन ने कुल बीस करोड़ रूपए खर्च किये हैं। आडिटोरियम की प्रमुख विशेषता विशाल सभागार, ओपन थियेटर, फूड कार्नर,समेत 400 गाड़ियों के लिए पार्किंग की व्यवस्था है। ओपन थियेटर में एक साथ 250 लोग बैठ सकते हैं। के माध्यम से संस्कृति, कला का प्रदर्शन कर लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।सभागार की 400 से अधिक लोगों की है।

पुस्तक विमोचन

           मुख्यमंत्री ने आडिटोरियम लोकार्पण के बाद सभागार में उपस्थित लोगों के सामने लखीराम पर लिखी गयी पुस्तक विमोचन किया। कर्तव्यनिष्ठ-लखीराम को डॉ.संजय द्विवेदी ने लिखा है। विमोचन के बाद सीएम ने कहा कि मैं पुस्तक को जरूर पढ़ूंगा। पुस्तक के संपादक संजय द्विेवेदी ने बताया कि उसमें उनके जीवन के सभी पहलुओं पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है। उनका व्यक्तित्व इतना बड़ा है कि सबको एक पुस्तक में समेटना संभव नहीं है।

 

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