फसल बीमाः सरकार का यू टर्न…मोबाइल देेने से किया इंकार

mantralay_rprबिलासपुर— सरकार अब पटवारियों को एन्ड्रायड मोबाइल नहीं देगी। पटवारियों को अब निजी मोबाइल से फसल बीमा का सर्वे कर सरकार को रिपोर्ट करना होगा। नए आदेश के बाद पटवारियों में उहाफोह की स्थिति है। कुछ पटवारियों ने तो दबी जुबान में कहना शुरू कर दिया है कि निजी मोबाइल का इस्तेमाल हम सरकारी काम काज में नहीं करेंगे। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक पटवारी ने बताया कि सब कुछ बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। जब पहले आदेश में कंपनी को घाटा नजर आने लगा तो दूसरे आदेश को निकालकर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सच्चाई तो यह है कि बीमा कंपनी सरकार को अंधेरे में रखकर अपना उल्लू सीधा कर रही है। दरअसल बीमा कंपनी का मंसूबा किसानों को नहीं बल्कि योजाना के बहाने खुद को फायदा पहुंचाना है।

                            मालूम हो कि एक सितम्बर को सरकार ने फरमान जारी कर बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सर्वे के लिए सरकार प्रदेश के पटवारियों को दस हजार की एन्ड्रायड मोबाइल दिया जाएगा। आदेश के अनुसार जिनके पास पहले से एन्ड्रायड मोबाइल है उन्हें नियमानुसार तीन साल तक प्रतिवर्ष 1200 का सालाना नेट चार्ज और मोबाइल की अधिकतम कीमत दस हजार का भुगतान किया जाएगा। अथवा मोबाइल खरीदने के बाद कार्यालय में बिल पेश करने पर पटवारी को दस हजार रूपए सरकार भुगतान करेगी। लेकिन 6 अक्टूूबर को अवर सचिव ने एक सितम्बर के आदेश को निरस्त कर नया आदेश जारी किया है।

                             मंत्रालय से 6 अक्टूबर के आदेश में कहा गया है कि सरकार अब ना तो नेट चार्ज देगी और ना ही मोबाइल का भुगतान ही करेगी। पटवारियों फसल बीमा का फीड रिपोर्ट निजी एन्ड्रायड मोबाइल से देना होगा। पटवारियों को मानदेय के रूप में पहले साल पांच हजार,दूसरे और तीसरे साल ढाई-ढाई हजार रूपए दिए जाएंगे। नए आदेश को लेकर पटवारियों में आक्रोश है।

                                                        सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फसल बीमा योजना में शामिल कंपनी को उम्मीद थी कि फसल बीमा का सारा काम हर्रा फिटकरी लगाए बिना पटवारियों के एन्ड्रायड से हो जाएगा। पहले आदेश के बाद सर्वे से कंपनी को जानकारी थी कि प्रदेश के 80 प्रतिशत पटवारियों के पास एन्ड्रायड सेट है।  नेट चार्ज देकर फसल बीमा का काम कराया जा सकता है। लेकिन पटवारियों ने बताया कि उनके पास एन्ड्रायड मोबाइल नहीं है। जानकारी के बाद फसल बीमा कंपनी ने सौदा घाटे का देखा और सरकार पर दबाव डालकर दूसरा आदेश जारी करवा लिया। यह जानते हुए भी सभी पटवारियों के पास एन्ड्रायड मोबाइल है। लेकिन हड़बड़ाहट में नए आदेश ने बीमा कंपनी के नीयत को जग जाहिर कर दिया।

                                          आदेश के अनुसार एक पटवारी को फसल बीमा योजना के तहत दो गांवो के फसल का सर्वे करना होगा। फसल लगने से लेकर तैयार होने तक की जानकारी सरकार को भेजना होगा। इन सेवाओं के लिए पटवारियों को केवल मानदेय दिया जाएगा। मानदेय पहले साल पांच हजार दूसरे और तीसरे साल ढाई ढाई हजार रूपए दिया जाएगा। नेट चार्ज पटवारियों को जेब से ही देना होगा।

                          सूत्र ने बताया कि दरअसल बीमा कंपनी की नीयत में खोट है। कम्पनी किसानों के हितो का काम अपने नफा-नुकसान को लेकर कुछ ज्यादा ही सजग है। पटवारियों से गांव का चप्पा चप्पा का रिपोर्ट चाहती है। उसकी कोशिश है कि बीमा राशि का कम से कम प्रयोग करना पड़े। इसलिए पहले तो उसने हैण्डसेट देने का वादा किया। जब सौदा घाटे में जाते दिखाई दिया तो उसने मानदेय का सहारा लिया। दरअसल यह सब कंपनी के नीयत को जाहिर करता है।

                                                          सूत्र ने बताया कि जब पटवारियों ने एन्ड्रायड फोन होने से इंकार कर दिया तो कंपनी ने सरकार पर दबाव बनाकर नया आदेश निकलवाया। क्योंकि यदि ऐसा नहीं किया जाता तो बीमा कंपनी को प्रदेश में कुल 3800 पटवारियों को दस हजार के भाव से एन्ड्रायड मोबाइल देना ही पड़ता। ऊपर से सालाना 1200 का नेट चार्ज अलग से होता। अकेले बिलासपुर में 290 पटवारी हैं। जाहिर सी बात है कि कंपनी को प्रत्येक पटवारी पर दस हजार का सेट और सालाना 1200 का नेट चार्ज भारी नजर आने लगा। इसलिए नया फरमान जारी कर मानदेय देने का एलान किया है।

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