श्रदांजली योजना पर नोटबंदी की मार या निगम की चालाकी

VIKAS BHAWANबिलासपुर–नोटबंदी अभियान के जद में प्रदेश सरकार की श्रद्धांजली योजना पर भी मार पड़ी है। नगर निगम सरकार बेरोक टोक आसानी से कार खरीदने से लेकर पेट्रोल खर्च के लिए आसानी से बजट दे रही है। लेकिन अंतिम संस्कार के लिए उसके पास दो हजार रूपए नहीं है। निगम अधिकारियों की माने तो नोटबंदी के चलते श्रद्धांजली योजना प्रभावित हुई है।

                              राज्य सरकार की श्रद्धांजली योजना में पीड़ित परिवार के मांग पर श्रद्धांजली योजना के तहत 2000 रूपए तत्काल दिये जाने का प्रावधान है। लेकिन पिछले दो महीने से निगम ने किसी भी परिवार को श्रद्धांजली योजना का लाभ नहीं दिया है। निगम में इस समय मृतक परिवारों के 80 आवेदन जमा है। कई आवेदन ऐसे परिवार से हैं जिसका अंतिम संस्कार पन्द्रह बीस दिन पहले हो चुका है। लेकिन निगम ने पीड़ित परिवार को एक कौड़ी तक नहींं दी। निगम अधिकारियों के अनुसार नोटबंदी के चलते श्रद्धांजली योजना मद में रूपए नहीं है। प्रश्न उठता है कि आखिर श्रद्धांजली योजना कोष के रूपए गए कहां।

                                                     मालूम हो कि राज्य शासन की विशेष श्रद्धांजली योजना में मृतक के अंतिम संस्कार के लिए परिवार के मांग किए जाने पर तत्काल 2000 रूपए दिया जाना अनिवार्य है। इसके लिए पीड़ित परिवार को स्थानीय पार्षद से प्रमाणित दस्तावेज के साथ आवेदन पत्र निगम कार्यालय में जमा करना होता है। आवेदन जमा करते ही या दो एक दिन बाद निगम से पीड़ित परिवार को दो हजार रूपए तत्काल दिया जाता है। शासन का आदेश है कि पीड़ित परिवार के मांग पर रूपए नहीं देने पर जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित या दंड दिया जाएगा।

        बिलासपुर नगर निगम में श्रद्धांजली योजना का नोडल अधिकारी सर्वेश तिवारी को बनाया गया है। कांग्रेस पार्षद दल के प्रवक्ता शैलेन्द्र जायसवाल ने बताया कि सर्वेश तिवारी के अनुसार अभी तक श्रद्धांजली योजना में नोटबंदी के बाद कुल 15 हजार रूपए मिले हैं। 80 आवेदकों के लिए पर्याप्त नहीं है। श्रदांजलि योजना से रूपए निकालने की जिम्मेदारी लेखाधिकारी अविनाश बापते को है। आवेदन सौंप दिया गया है। रूपए देंगे तो पीड़ित परिवार को दिया जाएगा।

                             शैलेन्द्र ने बताया कि अधिकारियों का कहना है कि कोष में रूपए नहीं है। नोटबंदी के कारण श्रद्धांजली योजना का लाभ जरूरतों को नहीं मिल पा रहा है। जबकि योजना के तहत कोष में रूपए की कमी नहीं होनी चाहिए। दरअसल अधिकारी इसे बहुत संजीदा नहीं है। रूपए हैं या नहीं अविनाश बापते ही बता सकते हैं। लेकिन संवेदनहीनता है कि दुख की घड़ी में भी निगम अमला पीड़ित परिवार के साथ नहीं है।

                                                       सीजीवाल ने जब संपर्क करने का प्रयास किया तो निगम लेखा अधिकारी अविनाश बापते ने काल रिसीव नहीं किया।

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