चिटफंड कम्पनियों की शिकायत अब ऑनलाइन

chitfund_fileरायपुर।आम जनता अब चिटफंड कम्पनियों और अन्य वित्तीय संस्थाओं की धोखाधड़ी के बारे में सरकार को सीधे अपनी शिकायत कर सकेगी।लोगों की सुविधा के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की वेबसाइट शुरू हो चुकी है। इस वेबसाइट का पता डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूडॉटपीडीआई एसीटीडॉटसीजीडॉट एनआईसी डॉटइन (www.pdiact.cg.nic.in) है। इस पर लॉगइन करके नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज करवा सकते हैं।यह वेबसाइट प्रदेश सरकार के संस्थागत वित्त संचालनालय द्वारा तैयार की गई है। इस वेबपोर्टल पर विधिसम्मत ढंग से काम कर रही कम्पनियां भी अपनी जानकारी देंगी।

                                          मुख्य सचिव विवेक ढांड ने आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में गैर-बैकिंग की गतिविधियों पर निगरानी के लिए बनी राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में अधिकारियों से कहा कि इस वेबसाईट में मिलने वाली जनशिकायतों का तत्काल परीक्षण किया जाए और प्रथम दृष्टि में दोषी पाई जाने वाली कम्पनियों के कर्ता-धर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जाए।ढांड ने कहा कि ऐसी कम्पनियों पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ निक्षेपकों के हितों के संरक्षण अधिनियम लागू किया है। श्री ढांड ने कहा कि राज्य में यह अधिनियम 23 जुलाई 2015 से लागू हो गया है।

                                          उन्होंने पुलिस विभाग, रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनी, भारतीय रिजर्व बैंक को इस अधिनियम के तहत चिट-फंड कम्पनियों की हर गतिविधि पर लगातार पैनी नजर रखने के निर्देश दिए। बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री आर.के. विज ने बताया कि राज्य में अब तक अनेक चिटफंड कम्पनियों और प्राईवेट वित्तीय संस्थाओं की गैरकानूनी गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। अब तक लगभग 209 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 18 मामलों में दोषी आरोपियों की सम्पत्ति जब्त की गई है।

                                            संचालक संस्थागत वित्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने बैठक में बताया कि वेबसाइट में प्राप्त शिकायतों की जांच संबंधित जिले के कलेक्टर द्वारा की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस अधिनियम की अधिसूचना 23 जुलाई 2015 से राज्य में प्रभावशील हो चुकी है।

                                           यह अधिनियम उन वित्तीय स्थापनाओं पर लागू है, जिनकी स्थापना किसी एक व्यक्ति द्वारा, व्यक्तियों के समूह द्वारा की गई है अथवा कोई फर्म या कम्पनी, जो कम्पनी अधिनियम 1956 के अंतर्गत निगमित है और आम जनता से किसी योजना के तहत डिपाजिट या जमा लेती है।

                                            उन्होंने बताया कि अधिनियम के तहत कोई भी वित्तीय प्रतिष्ठान परिपक्वता (मेच्योरिटी) पर ब्याज के रूप में सुविधा और बोनस का लाभ देने का वादा करके, अगर अपना वादा निभाने में विफल होता है, तो उसके विरूद्ध कार्रवाई का प्रावधान है। इस अधिनियम में यह भी प्रावधान किया गया है कि वित्तीय स्थापना जिला कलेक्टर के अधिकारिता क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी को सूचित किए बिना अपना व्यवसाय शुरू नहीं कर पाएगा।

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