कार्यपालन अधिकारी का कारनामा…लोन देकर जमीन पर किया कब्जा

manishankarबिलासपुर— जिला अंत्याव्यसायी विभाग प्रमुख का चार सौ बीसी का मामला सामने आया है। सरकारी लोन देकर हितग्राही की जमीन को अधिकारी ने अपने नाम रजिस्ट्री करवा लिया। ऋण चुकाने के बाद जब हितग्राही जमीन के कागजात मांगने विभाग गया तो उसके होश उड़ गए।किसान धीरेन्द्र डहरिया ने बताया कि अब उसके सामने जीने मरने का सवाल पैदा हो गया है।

                             अन्यत्यावसायी केन्द्र में गड़बड़ झाला अभी खत्म नहीं हुआ है। रोज नए खुलासे हो रहे हैं। मामले को दबाने का भी प्रयास किया जा रहा है। बावजूद इसके एक नया मामला फिर सामने आया। सामाजिक कार्यकर्ता मणिशंकर ने आरटीआई से जानकारी हासिल कर विभाग की दरियादिली की पोल खोल दी है।

                 मणिशंकर पाण्डेय ने बताया कि मस्तूरी ब्लाक देवगांव निवासी धीरेन्द्र डहरिया ने कुछ साल पहले ढाई एकड़ जमीन बंधक रखकर जिला अन्त्यावसायी से ईटा भट्ठा व्यवसाय करने ढाई लाख रूपए लोन लिया। जब वह अंतिम किश्त पटाने के बाद जमीन के कागजात मांंगे तो ना केवल धीरेन्द्र बल्कि विभागी अधिकारियों के भी होश उड गए।

                  तत्कालीन विभाग प्रमुख पी.के.शर्मा ने धीरेन्द्र डहरिया को 2002 में सरकारी लोन देकर उसकी जमीन को अपने नाम करवा लिया। रजिस्ट्री करवाते समय इसकी जानकारी ना तो विभाग को हुई और ना ही विक्रेता धीरेन्द्र डहरिया को ही। धीरेन्द्र डहरिया जब ऋण अदा करने के बाद विभाग से जमीन मांगा तो अधिकारियों ने बगले झांकना शुरू कर दिया।

                            दरअसल तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी पीके शर्मा ने धीरेन्द्र को अंधेरे में रखकर ढाई एकड़ जमीने की रजिस्ट्री अपने नाम करवा लिया था। पन्द्रह साल बीतने के बाद भी इसकी जानकारी किसी को नहीं हुई। फिलहाल मामले में अधिकारी मौन है। किसान धीरेन्द्र डहरिया लोन अदा करने के बाद विभाग से लगातार अपनी जमीन मांग रहा है। चूंंकि विभाग के पास जमीन नहीं है इसलिए गोल मोल जवाब देकर धीरेन्द्र को घर वापस कर दिया जाता है।

                  सामाजिक कार्यकर्ता मणिशंकर पाण्डेय ने बताया कि अंताव्यवसायी से सूचना के अधिकार के तहत जवाब माँगा तो उत्तर में चूक होना बताया गया है। पत्रकारों से वर्तमान विभाग प्रमुख पीके शर्मा तात्कालिक मुख्य कार्यपालन अधिकारी पीके शर्मा के खिलाफ जांच करने की बात कर रहे हैं। प्रश्न उठता है कि अधिकारी नियम के विपरीत सरकारी रूपया देकर जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम कैसे करवा सकता है। क्या किसान की जमीन वापस होगी । होगी तो किसके हक में ..चूंकि जमीन सरकार के पैसे से खरीदी गयी है…ऐसे में  जमीन का मालिक कौन होगा। यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा।

 

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