रेलकर्मियोंं किया किम्स में इलाज कराने से इंकार…

drm_inspectionबिलासपुर— रेलवे कर्मचारियों ने किम्स में इलाज करवाने से इंंकार कर दिया है। रेल कर्मचारियों ने किम्स से अनुबंध जोडने और अपोलो से तोड़ने का विरोध किया है। अपोलो से रिस्ता तोड़े जाने के खिलाफ सोमवार को रेलकर्मचारियों ने डीआरएम से मिलकर किम्स से रिश्ता तोड़ने की मांग कर अपोलो से दुबारा अनुबंध करने डीआरएम पर दबाव बनाने का फैसला किया है।

                  यूनियन की राजनीति और रेलप्रबंधन के एकतरफा फैसले से नाराज रेल कर्मचारियों ने अपोलो अस्पताल से अनुबंध तोड़ने का विरोध किया है। रेल कर्मचारियों ने किम्स में उपचार कराने से इंकार कर दिया है। रेलवे के करीब 40 से अधिक कर्मचारी  लंबे समय से अपोलो में किडनी रोग का इलाज करवा रहे हैं। सभी का डायलिसिस किया जा रहा है।

              रेलवे कर्मचारियों के अनुसार कोई भी रेलकर्मी किम्स में इलाज नहीं करवाना चाहता है। बावजूद इसके रेल प्रबंधन का किम्स से अनुबंध समझ से परे है। रेल कर्मचारियों की माने तो किम्स में दूसरी प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जाता है लेकिन इसकी  जानकारी नहीं है कि यहां डायलिसिस भी होता है।

                     कर्मचारियों ने बताया कि किम्स में इलाज कराने से डर लग रहा है। बड़े अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गयी है। रेल प्रबंधन भी इससे  सहमत है। लेकिन यूनियनों की घटिया राजनीति से मरीजों की जान संकट में है। अपोलो से दुबारा अनुबंध भी नहीं हो पा रहा है। खामियाजा बीमार रेल कर्मियों को भुगतना पड़ रहा है।

                           किम्स से अनुबंध का विरोध करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें अपोलो में नगद रकम देकर इलाज कराना पड़ रहा है। क्योंकि 26 जनवरी 2017 से रेलवे का अपोलो से अनुंबंध  ख़त्म हो गया है। लेकिन रेल यूनियन नेताओं को आपसी खींचतान से फुर्सत नहीं है।

                        सूत्रों के मुताबिक़ रेलवे और अपोलो के बीच करार रद्द होने से अपोलो में इलाज बेहद महंगा साबित हो रहा है। इसके लिए जितना रेल प्रशासन जिम्म्मेदार है…उतना ही जिम्मेदार रेल यूनियन की गंदी राजनीति है। नेताओं और अधिकारियों को समझना होगा कि अनुबंध खत्म होने के बाद अपोलो की सभी शाखाओं में इलाज कराने की तुलना में बिलासपुर के अपोलो में इलाज कराना बहुत ही महंगा है। इसलिए जरूरी है कि निजी स्वार्थ को दूर रखकर जिम्मेदार लोगों को अपोलो से दुबारा अनुंबंध करने रेलवे पर दबाव बनाया जाए।

                रेल कर्मचारियों ने बताया कि सोमवार 27 फरवरी को बीमार रेलकर्मी और परिजन डीआरएम से मिलेंगे। रेलकर्मियों के इलाज के लिए किम्स की बजाय अपोलो के साथ नए अनुबंध की गुजारिश करेंगे।

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