रामानन्द सागर ने सांई को खोजा..बना दिया भगवान-स्वरूपानंद

SHANKARACHARYAबिलासपुर— शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द ने एक बार फिर शिरडी के सांई बाबा के धर्म पर निशाना साधा है। उन्होने कहा है कि जिन्न की पूजा करवाई जा रही है। साँई को सभी धर्मों के समन्वय और देवी देवताओं को एक धर्म विशेष व्यक्ति में दिखाया जा रहा है। हिन्दुओं से कब्र की पूजा करवाई जा रही है। यह सब एक सोच समझकर षड़यंत्र के तहत किया जा रहा है।

                            स्वरूपानन्द ने कहा कि सरकार का काम मन्दिर बनाना नहीं…मंदिर साधू संत लोग बनवाएंगे। फिलहाल मामला कोर्ट में है इसलिए हम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। क्या किसी सनातनधर्मी को सुनने में अच्छा लगेगा कि कोर्ट का अर्दली कहे कि शंकराचार्य स्वरूपानन्द हाजिर हों….।पत्रवार्ता में स्वरूपानन्द ने सवालों को जवाब दिया..कहा कि प्रापर्टी सिलिंग सिर्फ हिन्दु धर्म का किया जाता है ऐसा क्यों…।

                               ज्यातिर्मठ और शारदापीठ के शंकराचार्य ने आज पत्रकारों से बातचीत की। जबलपुर हाईकोर्ट के निर्णय पर भी अपने विचार रखे। उन्होने कहा कि देश में नए-नए पंथो का जन्म हुआ। लेकिन आज भी भारत के सनातन धर्म का अनुशरण करते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से पैसे के दम पर फिल्म वालों ने नया भगवान बना दिया है। रामानन्द सागर ने प्रायोजित फिल्म निर्माण कर सांई को पैदा किया है। उनके चमत्कारों को बढ़ा चढ़ा कर बताया। साईं के झूठे चमत्कार से प्रभावित होकर लोग उनकी पूजा करने लगे। इस दौरान स्वरूपानन्द ने पत्रकारों पर जमकर सवाल भी दागे। उन्होने कहा कि एकादशी और रोजा…मंदिर और मस्जिद..कब्र और अन्त्येष्ठी एक साथ कैसे हो सकता है। स्वरूपानन्द ने बताया कि देश धर्मनिरपेक्ष हो सकता है..व्यक्ति नहीं।

                                    एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि सांई न भगवान है..न गुरू है और न ही संत है। कुछ लोग हमारे विचारों के खिलाफ न्यायालय में गए। लेकिन देश की जनता हमारे साथ है।

                      कोर्ट ने कहा है कि आस्था और भगवान को लेकर किसी व्यक्ति को बाध्य नहीं कर सकते…आप क्यों लोगों पर दबाव डाल रहे हैं…। सवाल के जवाब में स्वरूपानन्द ने कहा कि हम न तो किसी पर दबाव डाल रहे हैं न ही किसी के आस्था पर चोट कर रहे हैं। हम बताना चाहते हैं कि सांई न तो भगवान है..न गुरू और न संत ही है। तेलंगाना,तमिलनाड़ू,केरल,आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में लोगों ने हमारी बातों का समर्थन किया है। अब सांई भक्तों की आंख खुलने लगी है।

                          राममंदिर बनाए जाने के सवाल पर स्वरूपानन्द ने कहाक कि सरकार मंदिर नहीं बना सकती है। देश धर्मनिरपेक्ष है इसलिए कोई भी पार्टी न तो मंदिर बनवा सकती है…न मस्जिद, गुरूद्वारा और गिरिजाघर…। आरएसस से कोई उम्मीद भी नहीं है। मंदिर साधु संत बनाएंगे। इतिहासविदों ने भी बता दिया है कि बाबर कभी अयोध्या आया ही नहीं। इसलिए वहां मस्जिद होने का सवाल ही नहीं उठता है। अयोध्या में रामंदिर को तोड़ा गया है। क्योंकि खम्भे बताते हैं कि वहां मंदिर ही थी। मामला अभी कोर्ट में है…लेकिन मंदिर साधु सन्यासी ही बनाएंगे।

           शराबबंदी के सवाल पर जगतगुरू ने कहा कि हम नशाबंदी के समर्थक हैं। शराब से कहीं ज्यादा अन्य चरस,गांजा,भांग की विक्री हो रही है। पीढ़ियां बरबाद हो रही हैं। इसलिए मेरा मानना है कि शराबबंदी ही नहीं बल्कि नशाबंदी हो। स्कूलों के आसपास जहर बिक रहे हैं। सरकार को शराब नहीं बेचना चाहिए।

                         आपको क्यो एतराज है यदि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री सांई ट्र्स्ट को सहयोग कर रहे हैं। स्वरूपानन्द ने कहा कि शिरडी के सांई मंदिर के पास अकूत पैसे हैं। लातूर,उस्मानाबाद समेत समूचे विदर्भ में आकाल से परेशान किसान आत्महत्या कर रहे हैं। लोग पलायन को मजबूर हैं। जनता दाने दाने को तरस रही है। लेकिन खजाने में पैसे नहीं है। लेकिन ट्रस्ट के लिए महाराष्ट्र सीएम ने खजाना खोल दिया है। स्वरूपानन्द ने बताया कि कुम्भ के दौरान टैंकर से पानी लाया गया। कुआं बावलियों में रेलमंत्रालय ने पानी की सप्लाई की । उस समय महाराष्ट्र सरकार ने हाथ उठा दिया था। कहा था रूपए नहीं है। अब रूपए कहां से आ गए ।

                              स्वरूपानंद ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता केवल हिन्दुओ के लिए है। अन्य धर्मों पर यह लागू नहीं होता है। स्वरूपानन्द ने सनातन धर्म के देवी देवताओं,मंत्रो,आरती और चालिसा से छेड़छाड़ करने का आरोप सांई समर्थकों पर लगाया। उन्होने कहा कि सांई भगवान हैं तो राम का नाम जोड़ने की जरूरत नहीं है। मैं अंत तक इसका विरोध करूंगा।

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