मस्तूरी हत्याकाण्ड-“भरोसा नहीं होता कि..यह सच है”

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बिलासपुर—“भरोसा नहीं होता कि यह सच है” सोशल मीडिया और सीजी वाल वेब पोर्टल के फ़ेसबुक www.facebook.com/cgwallweb में बबलू मलिक ने मस्तूरी हत्याकाण्ड खुलासे की खबर प्रकाशित होने के बाद लिखा है।सोशल मीडिया में वरिष्ठ पत्रकार सत्यप्रकाश पाण्डेय ने लिखा है कि पुलिस ने बहुत अच्छी कहानी लिखी है। कहानी पूरी फिल्मी है। याद रहे इस तरह के कई मामलों में आरोपी साक्ष्य के आरोप में न्यायालय से बरी हो जाते हैं। गांव के ही दो आरोपी 3 महीने से पुलिस को चकमा दे रहे थे। जिसमें एक नाबालिग भी है। वाह..होली के पहले एक सनसनीखेज का अंत हुआ।पत्रवार्ता में भी कमोबेश ऐसा ही महसूस किया गया। लेकिन खबर प्रेमियों को भरोसा करना होगा कि पत्रवार्ता में पुलिस कप्तान ने ईमानदारी से स्क्रिप्ट पढ़ा और दो मात्र सवालों का जवाब दिया। स्क्रिप्ट में दुष्कर्म नहीं होने के जिक्र पर बताया कि धारा 376 में दुष्कर्म के कई कारणों का जिक्र है इसलिए स्क्रिप्ट में इसका उल्लेख नहीं किया गया है।

                                   पत्रवार्ता में मस्तूरी देवगांव हत्याकाण्ड का खुलासा पुलिस कप्तान ने किया। उन्होने स्क्रिप्ट का वाचन किया। उन्होने बताया कि 7 जनवरी को मस्तूरी थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ 376 का मामला दर्ज किया गया था। लम्बी जांच पड़ताल के बाद आरोपियों की धर पकड़ हुई। आरोपियों ने बताया कि हमने डिमांड की थी नहीं मानने पर उसको लकड़ी से पीटा और पत्थर से सिर और चेहरे पर वार किया। युवती के शव को सड़क के पास फेकने के बाद साक्ष्य को झाड़ियों में छिपा दिया।

                             आरोपों की जांच 376,302,201 पर केन्द्रित था। इसमें 376 का मामला बलात्कार से जुड़ा है। लेकिन पत्रवार्ता के दौरान स्क्रिप्ट में कहीं नहीं बताया गया कि युवती के साथ दुष्कर्म हुआ। पूरे समय ऐसा लगा कि कहीं कुछ जांच में कमी जरूर रह गयी है। जिसके कारण लिखित में यह नहीं बताया जा सका कि युवती के साथ दुष्कर्म हुआ था। एक बार जरूर ऐसा लगा कि स्क्रिप्ट तैयार करते समय दुष्कर्म को धोखे में नहीं जोड़ा जा सका है। लेकिन सीजी वाल के प्रश्न पर पुलिस कप्तान ने बताया कि भले ही प्रेस नोट में दुष्कर्म होना नहीं लिखा गया हो लेकिन संतराम और बबलू बंजारे ने स्वीकार किया है कि उन्होने युवती के साथ सामुहिक दुष्कर्म किया है। प्रेस नोट में ऐसा नहीं लिखने की मुख्य वजह धारा 376 में दुष्कर्म के कई परिस्थितियों का जिक्र है। इसलिए इस बात का जिक्र नहीं किया गया है। प्रेसवार्ता में न तो लिखित और न ही मौखिक जानकारी दी गयी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या कुछ पाया गया।

                                   सत्यप्रकाश के तर्क में कितनी सच्चाई है समय के साथ सामने आना ही है। लेकिन तीन आरोपियों को पकड़ने में पुलिस को तीन महीने लग गए। जिसमे एक नाबालिग भी है। सुनकर कुछ अटपटा जरूर लगता है। क्या तंत्र इतना ढीला हो गया है कि भारत भ्रमण के बाद आरोपी उसी गांव का निकला…युवती जहां की रहने वाली थी।

                                    कमजोर और बेजुवान के लिए कुछ दायरे होते हैं। यदि यह मामला भी गौरंग बोबड़े की तरह न्यायालय में हिचकोले खाए तो आश्चर्य की बात नहीं होगी। सत्यप्रकाश का भी ठीक कहना है कि कमजोर स्क्रिप्ट और साक्ष्य के अभाव में आरोपी न्यायालय से बरी हो जाते हैं। बबलू का भी कहना ठीक है कि भरोसा नहीं होता कि यह सच है।

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