सहयोगी बनें…समस्या नहीं-धरमलाल कौशिक

IMG-20170325-WA0624जांजगीर– जांजगीर में भाजपा , छत्तीसगढ़ प्रदेश नगर पालिका जनप्रतिनिधियों की प्रांतीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।अग्रसेन भवन नैला जांजगीर में प्रदेश के दिग्गज भाजपा नेता और मंत्रियों ने शिरकत किया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने किया। अपने संबोधन में धरम लाल कौशिक ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद जनता के उम्मीदों पर खरा उतना जनप्रतिनिधियों की जवाबदारी है।

                        कार्यक्रम के पहले धरमलाल कौशिक ने झण्डारोहण किया। सरस्वती की तैल प्रतिमा के सामने दीप प्रज्जवलन के साथ फूल अर्पित किया। धरमलाल समेत दिग्गज नेताओं ने पंडित श्याम प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल के फोटो पर माल्यापर्ण कर उनके योगादान और सिद्धांतों पर प्रकाश डाला।

         कार्यक्रम में संसदीय सचिव रामप्रताप सिंह , सांसद कमला पाटले, संसदीय सचिव अम्बेश जांगड़े , डॉ. खिलावन साहू , बनवारी अग्रवाल, नारायण चंदेल , मेघाराम साहू , सुनील सोनी , सैयद सैफुद्दीन, लीलाधर सुल्तानिया समेत दर्जनों की संख्या में निकाय प्रतिनिधि विशेष तौर से उपस्थित थे।

                 उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरम लाल  कौशिक ने कहा कि त्याग, तपस्या और बलिदान भाजपा की परम्परा में शामिल है। इन्ही प्रवित्र उद्देश्यों को ध्यान में रखकर हमारे नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी की बुनियाद रखी। धरम ने अपने संबोधन में जनप्रतिनिधियों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि जनता अच्छे और काबिल सेवकों को ही चुनती है। सभी जनप्रतिनिधियों को जनता के विश्वास पर खरा उतरने की नैतिक सामाजिक जिम्मेदारी है।

                                     धरम ने बताया कि जनप्रतिनिधियों का विश्वास, विचार, रहन सहन, खानपान कुछ इस तरह का होना चाहिेए जिसका सकारात्मक असर जनता पर में दिखाई दे। शिविर में इन्ही सब बातों पर ध्यान दिया जाएगा। शिविर में अर्जित अनुभवों के आधार पर कार्य करना होगा। तभी जनप्रतिनिधि का भविष्य उज्ज्वल होगा । चुनाव जीतने के बाद मतदाता को उनकी अपेक्षाओं को पूरा किया कि नही उनके साथ सम्बध कैसा है इस पर भी बातें होंगी। धरम ने कहा कि  आप मदमस्त तो नही हो गए… इस बात का भी चितन शिविर में होगा।

          उपस्थित जनप्रतिनिधियों को धरम ने बताया कि हम पार्टी का सहयोगी बने…समस्या नहीं…सभी वक्ताओं को सुने और उसके अनुरूप कार्य करें…तभी प्रशिक्षण की सार्थकता होगी ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *