वेंकैया पूछे सुकमा नक्सली हमले पर मानवाधिकार कार्यकर्ता खामोश क्यो

naidu_fileनईदिल्ली।मंगलवार को केन्द्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा है सुकमा जिले में विकास कार्यों के लिए सड़कों को सुरक्षित बनाने के काम में लगे सीआरपीएफ जवानों की कायरतापूर्ण हत्या से राष्ट्र सदमे में है।अन्य कई घायल हुए हैं।भूमिगत उग्रवादी तत्वों द्वारा की जाने वाली इस तरह की कायरतापूर्ण कार्रवाई अत्यंत निंदनीय है।केन्द्रीय मंत्री ने कहा सीआरपीएफ के जो जवान मारे गए और घायल हुए हैं वे देश की जनता की सेवा कर रहे थे और उन्होंने अपने जीवन को न्यौछावर कर दिया। राष्ट्र के लिए यह सर्वोच्च बलिदान है।

                           पूरा राष्ट्र इस हत्या और हिंसा से सदमे में है, लेकिन कल से ही मानवाधिकार के तथाकथित हितैषी और आवाज उठाने वाले लोग चुप्पी साधे हुए हैं। अगर पुलिस द्वारा किसी आंतकवादी या उग्रवादी को मारा जाता तो ये कार्यकर्ता आवाज उठाते और हिंसात्मक प्रतिक्रिया करते। लेकिन, बड़ी संख्या में जवानों और निर्दोष लोगों को जब ऐसे लोग मारते हैं तब मानवाधिकार के कार्यकर्ता चुप्पी ओढ़ लेते हैं।

                            नायडू ने कहा कि क्या मानवाधिकार केवल उन लोगों के लिए है जो अपनी अप्रासंगिक विचार धाराओं को आगे बढ़ाने के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं? क्या मानवाधिकार सुरक्षाकर्मियों और साधारण लोगों के लिए नहीं है?जब गैर कानूनी तत्व इस तरह की अमानवीय हरकत करते हैं, तो मानवाधिकार कार्यकर्ता क्यों खामोश हो जाते हैं?

                      केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इस तरह की हिंसात्मक गतिविधियों को मानवाधिकार की वकालत करने वाले तथाकथित कार्यकर्ताओं का मौन समर्थन प्राप्त है। ऐसी कार्रवाई हताशा में की जाती है ताकि केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों का सकारात्मक प्रभाव रोका जा सके और तेज आर्थिक विकास का लाभ गरीबों तक न पहुंच पाए।

                   इस बात की अत्यंत आवश्यकता है कि प्रतिबंधित तत्वों और तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की हिंसात्मक गतिविधियों के विरूद्ध मजबूत जनभावना बनायी जाए। ऐसे तत्व दोहरे मानदंड वाले हैं और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का शिकार होने वाले सुरक्षाकर्मियों, उनके परिजनों और निर्दोष व्यक्तियों के लिए यह मानवाधिकार की बात नहीं करते।

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