लिंगियाडीह हल्का पाने पटवारियों में बढ़ी बेचैनी…?

tehsil-bspबिलासपुर— लिंगियाडीह के निलंबित पटवारी को सोमवार को मरवाही अटैच कर दिया गया है। पटवारियों को ललचाने वाला  लिंगियाडीह हल्का फिलहाल खाली है। इसके पहले किसी को लिंगियाडीह हल्के की जिम्मेदारी मिले..जिले के कई काबिल पटवारी कुबेर के हल्के को पाने एड़ी चोटी का दम लगा दिया है।

                    निखिल झा के निलंबन आदेश के 6-7 दिन पहले से ही ऊचें कद के कई पटवारी जिम्मेदार अधिकारियों के साथ देर रात तक बैठकी करते पाए गए। इससे जाहिर होता है कि बड़े कद के कुछ पटवारियों को पहले से ही जानकारी थी कि निखिल झा के निलंबन को टाला नहीं जा सकता है। इसलिए अधिकारियों के साथ पटवारियों की गुप्त बैठक के कारणों को आसानी से समझा जा सकता है। बैठक में कभी एक तो कभी दो तीन पटवारी अधिकारियों के साथ देर रात तक देखे गए।  इस दौरान तथाकथित बड़े पटवारी निखिल झा के निलंबन पर दुख तो जाहिर किया लेकिन प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से लिंगियाडीह पर दावेदारी भी की है।

                       गुप्त बैठक के बाद अनुमान लगाया जा सकता है कि पटवारियों की दुनिया में लिंगियाडीह का क्या महत्व है। अन्दर की खबर मानें तो लिंगियाडीह को पटवारियों का कुबेर हल्का माना जाता है। यही कारण है कि निखिल झा के संभावित निलंबन की खबर मिलते ही तथाकथित बड़े पटवारी पिछले 6-7 दिनों से देर शाम तक अधिकारियों के साथ गुपचुप बैठकी की।

                                  सूत्रों के अनुसार दो एक वरिष्ठ पटवारियों ने गुप्त बैठक में अधिकारियों के सामने लिंगियाडीह पर अपना दावा ठोंका है। फिलहाल बड़े अधिकारी मामले में मुंह खोलने से बच रहे हैं। सूत्रों पर विश्वास करें तो एक पटवारी ने तो यहां तक कह दिया कि मुझे लिंगियाडीह हल्के का बहुत दिनों से इंतजार था। तरीका कुछ भी हो…लिंगियाडीह हल्का पाने के लिए सब दांव लगाने को तैयार है।

                                                        जानकारी के अनुसार देर शाम की गुप्त बैठक में दो-एक पटवारी ने तो एलान किया है कि यदि लिंगियाडीह हल्का नहीं दिया गया तो नौकरी छोड़ देंगे। यह जानते हुए भी कि इस प्रकार के दावे करने वाले पटवारियों पर जिला प्रशासन की तिरछी नजर है। कुछ बड़े राजस्व अधिकारी चाहते हैं कि दावा ठोंकने वाले दो एक पटवारी में से एक का दावा वाजिब है। इसलिए जिला प्रशासन को खुश कर ऐन केन प्रकारेण दावा करने वाले  पटवारी को लिंगियाडीह हल्का में बैठाया जा सकता है। यही कारण है कि दावेदार पटवारी के खिलाफ कलेक्टर के आदेश को मातहत अधिकारी महीनों से दबा कर बैठे है। उन्हें डर भी लग रहा है कि कहीं दावेदार पटवारी का पक्ष लेना भारी ना पड़ जाए। अधिकारियों की ढुलमुल स्थिति को देखते हुए लिंगियाडीह का दावेदार पटवारी जिला प्रशासन को मनाने….सारे अनुभवों को दांव पर लगाने का फैसला कर लिया है।

                                    कुछ पटवारी दावेदार पटवारी की हां में हां तो मिला रहे हैं। लेकिन पीठ पीछे अपनी दावेदारी को कमतर आंकने से नाराज हैं। गुप्त बैठक से छनकर मिली खबर के अनुसार सीनियर पटवारी लिंगियाडीह को पाने साम दाम दंड भेद नीति को अपनाएंगे। मजेदार बात है कि सभी पटवारी निखिल झा के निलंबन पर दुखी हैं। लेकिन निलंबन आदेश के तीन चार दिन पहले से लिंगियाडीह पर दावा शुरू कर दिया था। पटवारियों की दावेदारी…निलंबन आदेश की रात गुप्त बैठक में भी हुई। पटवारियों और अधिकारियों को इस बात का भय नहीं दिखा कि निलंबन आदेश वापस भी हो सकता है। इससे जाहिर होता है कि लिंगियाडीह के दावेदार पटवारियों को पहले से ही मालूम था कि निखिल का निलंबन निश्चित है।

                                                  गुप्त बैठक को ध्यान मे रखते हुए इंतजार करना होगा कि किस पटवारी की किस्मत में लिंगियाडीह की जागीर लिखी है।

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