बिलासपुर विवि. डॉ. शाही पर राष्ट्रविरोधी का आरोप…गौरीदत्त बने रहेंगे प्रभारी कुलपति

images (7)बिलासपुर— बिलासपुर विश्वविद्यालय के नए कुलपति के आदोश को रद्द कर दिया गया है। पूर्व कुलपति डॉ.गौरीदत्त शर्मा के कार्यकाल को राज्यपाल ने बढ़ा दिया है। डॉ. शर्मा का कार्यकाल कितने दिनों का होगा। आदेश में ऐसा कुछ भी जिक्र नहीं किया गया है। बहरहाल नए कुलपति की नियुक्ति तक प्रो.गौरीदत्त शर्मा बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति रहेंगे।

               राजभवन से जारी आदेश के अनुसार प्रो.गौरीदत्त शर्मा नए कुलपति की नियुक्ति तक बिलासपुर विश्वविद्यालय के वाइसचांसलर रहेंगे। डॉ. शर्मा 31 मई को रिटायर्ड होने वाले थे। सरकार ने बिलासपुर विश्वविद्यालय के लिए नए कुलपति का एलान कर दिया था। राजभवन से प्रोफेसर सदानन्द शाही को नियुक्ति आदेश जारी भी किया था। लेकिन एबीव्हीपी छात्र संघ विरोध के चलते शासन ने सदानन्द शाही की नियुक्ति को रद्द कर दिया।

                                       मालूम हो कि बिलासपुर विश्विविद्यालय के लिए नए वाइस चांसलर की नियुक्ति की तैयारी छः महीने पहले से शुरू हुई थी। शासन ने योग्य लोगों का आवेदन मंगाया था। एक्सपर्ट टीम ने सभी आवेदनों को देखने के बाद डॉ. सदानन्द शाही को नियुक्ति पत्र भेजा। लेकिन छात्र नेताओं ने सदानन्द पर वामपंथी होने का आरोप लगाया। एबीव्हीपी ने शाही की नियुक्ति का जमकर विरोध किया। अंत में शासन को झुकना पड़ा और नियुक्ति आदेश को वापस लेना पड़ा।

                       बनारस हिन्दु विवि के  भोजपुरी अध्ययन केन्द्र के समन्वयक प्रो सदानंद शाही को बिलासपुर विवि का नया वाइस चांसलर नियुक्त किया गया था। विरोध के चलते उनकी नियुक्ति को रोक दिया गया है। प्रो जीडी शर्मा का कार्यकाल बढ़ा दी गई है। नियुक्ति रोकने की वजह वामपंथी सोच और मापदंड पूरा नही होने की बात सामने आयी है।

                  आवेदन मंगाए जाने के बाद सरकार ने प्रोफेसर सदानन्द शाही का नाम फायनल किया। डॉ.शाही बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के प्राध्यापक है। भोजपुरी अध्ययन केन्द्र के समन्वयक भी है। जानकारी के अनुसार डॉ.शाही की नियुक्ति की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को नहीं थी।

एबीव्हीपी का विरोध

                       शाही की नियुक्ति की भनक लगते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने जमकर विरोध किया। एबीव्हीपी के नेताओं ने डॉ.शाही पर वामपंथी विचारधारा का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कलेक्टर को राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर डॉ.शाही की नियुक्ति आदेश को निरस्त करने की मांग की।

                          विद्यार्थी परिषद के विरोध को देखते हुए राजभवन ने प्रो. सदानंद शाही की नियुक्ति पर रोक दिया। नया आदेश जारी कर वर्तमान कुलपति प्रो जीडी शर्मा के कार्यकाल को बढ़ा दिया गया। आदेश में डॉ.शर्मा के एक्सटेंशन अवधि का जिक्र नहीं किया गया है।

             बिलासपुर विश्वविद्यालय की कुलसचिव इंदु अनंत ने बताया कि राजभवन से कुलपति प्रो.जीडी शर्मा का कार्यकाल बढ़ाए जाने का आदेश मिला है।

कौन है डॉ.सदानन्द शाही

                  डॉ.सदानन्द शाही बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के प्राध्यापक हैं। डॉ.शाही का नाम साहित्य जगत में सम्मान के साथ लिया जाता है। भोजपुरी अध्ययन केन्द्र के समन्वयक होने के साथ उन्होने देश की नामचीन पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों का संपादन किया है। प्रगतिशील विचारधारा के समर्थक डॉ.सदानन्द शाही का विवादों से हमेशा तालमेल रहा है।

शाही को लेकर विवाद क्यों…

                          एबीव्हीपी के नेताओं ने बताया कि डॉ.सदानन्द शाही वाइस चांसलर की योग्यता नहीं रखते हैं। बावजूद इसके उन्हें राज्य सरकार ने बिलासपुर विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्ति आदेश दी। प्रोफेसर का 10 वर्षों का अनुभव भी नही होना बताया है। डॉ.शाही अनुभव के लिए निर्धारित मापदण्ड को पूरा नहीं करते हैं। कुलपित के लिए बतौर प्राध्यापक कम से कम 10 वर्ष का अनुभव होना जरूरी है। जबकि शाही का अनुभव 4 महीने कम है।

एबीव्हीपी का शाही पर हमला

              एबीवीपी ने प्रो सदानंद शाही का विरोध किया है। एबीवीपी के सहमंत्री सन्नी केशरी ने बताया कि डॉ. सदानन्द शाही ने मोदी सरकार पर देश में  असहिष्णुता फैलाने का आरोप लगाया था। तात्कालीन समय डॉ. शाही ने अवार्ड वापसी समिति में बढ़चढकर हिस्सा लिया। उन्होने हार्डकोर नक्सली बर्बर राव को हिन्दी साहित्य में शामिल किए जाने की मांग की थी। सन्नी केशरी ने बताया कि डॉ. शाही ने ऐसा कर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बढावा देने का काम किया है। केशरी ने कहा कि इस तरह की विचारधारा वाले किसी भी व्यक्ति को बिलासपुर विश्वविद्यालय का प्रभार नहीं दिया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो विरोध किया जाएगा। सन्नी केशरी डॉ.शाही के आदेश को निरस्त किये जाने पर खुशी जाहिर की है।

दबाव में निरस्त का आदेश–सत्तू शर्मा

                पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री और कांग्रेस विधायक सत्यनारायण शर्मा ने रायपुर में पत्रकारों को बताया कि डॉ.शाही की नियुक्ति आदेश एबीव्हीपी के दबाब में किया गया है। बिना कारण आदेश को रोकना ना तो तर्क संगत और ना ही न्याय संगत। आदेश में परिवर्तन केवल उच्च कमेटी को ही करने का अधिकार है। जहां तक जानकारी मिली है कि उच्च कमेटी ने ऐसा कुछ भी आदेश नहीं दिया है। प्रश्न उठता है कि कि आखिर में किसके दवाब में आदेश को निरस्त किया गया है। सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि इतिहास में पहली बार शिक्षा का राजनीतिकरण होने की बात सामने आयी है। राज्यपाल को निष्पक्ष होकर निर्णय लेना होगा।

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