सेनानी ने जड़ा स्कूल पर ताला…बच्चों ने की शिकायत

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बिलासपुर—आज बहुउद्देशीय विद्या मंदिर सकरी के नौनिहालों के साथ स्कूल के स्टाफ ने बिलासपुर पहुंचकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। छात्र-छात्राओं के साथ अभिभावकों ने कलेक्टर से दूसरी बाहिनी सेनानी के आदेश को निरस्त किये जाने की मांग की। शाला प्रमुख ने बताया कि सेनानी के तुलगकी फरमान से चार सौ बच्चों का भविष्य अब अंधेरे में जाता हुआ दिखाई दे रहा है। दो दिन बाद स्कूल खुलना है। सेनानी ने शासन की बिल्डिंग में ताला जड़ दिया है। सेनानी अपने एक आदेश के जरिए शाला प्रबंधन को अंधेरे में रखकर स्कूल के छात्रों को शहर के बड़े संस्था में प्रवेश लेने का दबाव डाल रहे हैं। इसका ग्रामीणों ने विरोध किया है।

                    दूसरी बटालियन सकरी के कैम्पस में जिला सरकार की बिल्डिंग में बहुउद्देश्यीय विद्या मंदिर में पिछले 22 साल से शांति पूर्वक पठन-पाठन का काम चल रहा है। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद जिले के सभी स्कूलों में 16 तारीख से शाला प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है। लेकिन यहां 17 तारीख को सेनानी अंकित गर्ग के आदेश के बाद स्कूल के दरवाजे पर ताला जड़ दिया गया है। सकरी के आस-पास के रहने वाले अभिभावकों ने सेनानी के आदेश का विरोध और स्कूल को फिर से खोले जाने की गुहार कलेक्टर से गुहार लगाई है।

                        स्कूल संचालक ने बताया कि स्कूल शासन की बिल्डिंग में चल रहा है। यहां का रिजल्ट भी हमेशा उत्साहित करने वाला रहा है। बावजूद इसके सकरी सेनानी महोदय ने संस्था को अंधेरे में रखते हुए बंद करने का आदेश दिया है। साथ ही एफआईआर लिखाने की धमकी भी दी है। बसंत कश्यप ने बताया कि साल 1995 में जिला कलेक्टर राऊत के दिशा निर्देश में सेनानी क्षेत्र में शिक्षण समिति के द्वारा स्कूल प्रारम्भ किया गया। तत्कालीन सेनानी ओ.पी.त्रिवेदी का स्कूल संचालन का भरपूर समर्थन मिला। प्रारम्भ में स्कूल माध्यमिक था बाद में साल 2004 में उच्चतर कर दिया गया। संस्था को समय समय पर अनुदान भी शासन से मिलता रहा है। यहां का परिणाम हमेशा 90 प्रतिशत के आसपास रहा है। यहां गरीब बच्चों को औसल फीस में पढ़ाया जाता है। इस साल यहां से 12 वीं एक छात्र प्रदेश मेरिट लिस्ट में 10 वां स्थान हासिल किया है। बावजूद इसके सेनानी ने स्कूल को यहां से हटाने का आदेश दिया है।

                             बसंत कश्यप ने बताया कि सेनानी का व्यवहार हमेशा से संस्था के प्रति रूखा रहा है। एक तरफ वे बोलते हैं कि यहां असामाजिक तत्वों का प्रवेश और शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा किसी प्रकार का कार्यक्रम वर्जित है। दूसरी तरफ बलात रूप से संस्था के भवन में प्रवेश कर सेनानी के द्वारा शादी जैसे कार्यक्रम का आयोजन की अनुमति दी जाती है। इसके कारण संस्था को काफी परेशानी होती है। पढ़ाई को भी कई बार रोकना पड़ा है।

                        संस्था प्रमुख बसंत ने बताया कि स्कूल शासकीय भवन में चल रहा है। संस्था को शासन से मान्यता प्राप्त है। बावजूद इसके सेनानी अंकित गर्ग ने 20 तारीख को एक व्यक्ति की उपस्थिति में जबरदस्ती मुझसे एक कागज पर लिखवाया कि संस्था को बंद किया जाता है। मैने जब इसका विरोध किया तो उन्होंने थाने में रिपोर्ट करने की बात कही। विरोध करने पर उन्होंने मुझे जानकारी में लिये बिना चौकीदार से चाभी भी ले ली। बाद में उन्होंने कहा कि यदि यहां से स्कूल नहीं हटाओंगे तो तुम्महारे खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाएगा। इसके लिए मैने दो दिन का समय मांगा लेकिन उन्होंने देने से इंकार कर दिया।

                  बसंत कश्यप ने बताया कि स्कूल सत्र शुरू हो गया है। अभी तक छात्रों का प्रवेश नहीं हुआ है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री गृहमंत्री और शिक्षा मंत्रालय से भी हमने किया है। बावजूद इसके अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब हमने कलेक्टर आई जी और जिला शिक्षा अधिकारी से गुहार लगाई है। उम्मीद है कि बच्चों के भविष्य को लेकर जिला प्रशासन न्याय करेगा।

बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि हम गांव के लोग हैं। हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि महंगे स्कूलों में पढ़ा सकें। जबकि सेनानी का प्रबंधन पर दवाब है कि यहां से संस्था को हटाया जाए। बच्चों को एक बड़े स्कूल में प्रवेश कराने की बात कह रहे हैं। हम अपने बच्चों को इतनी महंगी शिक्षा देने में समर्थ नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां का स्कूल अच्छा है। पढ़ाई भी ठीक होती है। ऊंचे स्कूलों से बेहतर रिजल्ट भी आ रहा है।

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