रायपुर स्टेशन में शुरू होगा चाइल्ड हेल्पलाइन

child care

रायपुर । राज्य सरकार ने गुमशुदा बच्चों की तलाशी और घुमन्तू बच्चों की सहायता के लिए राजधानी रायपुर के रेल्वे स्टेशन पर प्लेटफार्म नम्बर-एक में चाईल्ड हेल्प लाईन बूथ की स्थापना का निर्णय लिया है। प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रमशिला साहू सोमवार 29 जून को सवेरे 11.30 बजे वहां पर इस बूथ का शुभारंभ करेंगी। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि बच्चों के संभावित अवैध प्रवास की रोकथाम, मानव तस्करी की रोकथाम, गुमशुदा बच्चों की तलाशी, घुमन्तू बच्चों की सहायता और संकटग्रस्त बच्चों की मदद के लिए सराहनीय पहल के रूप में यह बूथ शुरू किया जा रहा है। प्रदेश के बिलासपुर रेल्वे स्टेशन में भी इस प्रकार का एक बूथ जल्द स्थापित किया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि ऐसे बच्चों को समाज की मुख्य धारा में शामिल करने और उन्हें स्कूल भेजने के लिए ’स्ट्रीट टू स्कूल’ योजना भी चलाई जाएगी। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव श्री दिनेश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में यहां मंत्रालय में एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें लिए गए निर्णय के अनुसार घुमन्तू और देखभाल की जरूरत वाले बच्चों को चिन्हांकित कर उनके परिवारों की मदद से उन्हें आवासीय स्कूलों अथवा बालगृहों में प्रवेश दिलाया जाएगा। जिला प्रशासन अथवा श्रम विभाग द्वारा गठित जिला टास्क फोर्स या जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा गठित कार्य दल से समन्वय कर सभी संबंधित विभाग ऐसे क्षेत्रों की पहचान करेंगे, जहां श्रमिक बच्चे, घुमन्तू बच्चे और कचरा बीनने वाले या अन्य प्रकार के संकटग्रस्त बच्चे निवास करते हैं। इसके लिए सर्वेक्षण कार्य में श्रम विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा चाईल्ड हेल्पलाईन नम्बर 1098 के साथ समन्वय किया जाएगा। ऐसे बच्चों को खोजने के लिए अभियान 22 जून से शुरू हो गया है जो 31 जुलाई तक चलेगा।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस अभियान में खोजे गए अथवा चिन्हांकित किए गए ऐसे बच्चों को संबंधित अधिकारी द्वारा संबंधित जिले की बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। बाल कल्याण समिति के आदेश पर बच्चे का समुचित पुनर्वास सुनिश्चित करते हुए उसे स्कूल में प्रवेश दिलाया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग अपने शिक्षकों के माध्यम से ऐसे बच्चों की नियमित निगरानी करते हुए स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति भी सुनिश्चित करेगा। अधिकारियों ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित आवासीय विद्यालयों में प्रवेश कराए जा चुके ऐसे बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, निःशुल्क पाठ्यसामग्री, शिक्षण सामग्री और आवासीय सुविधा और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा सभी शहरों की तंग बस्तियों और चिन्हांकित क्षेत्रों में देख-रेख की जरूरत वाले बच्चों की पहचान करने के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई की सहायता ली जाएगी।

 

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