बच्चा उठाईगिरी गिरोह का पर्दाफाश,महापंचायत ने दिया था 10 लाख का आफर

IMG-20170824-WA0017  बिलासपुर— बच्चों से उठाईगिरी कराने वाले गिरोह का बिलासपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस टीम ने मध्यप्रदेश के राजगढ जिले से सुनियोजित तरीके से अपराध को अंजाम देने वाले गिरोह के एक सदस्य को धर दबोचा है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश कर दिया है।

                        बिलासपुर पुलिस टीम ने पार्टियों और समारोह में उठाईगिरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। मध्यप्रदेश स्थित राजगढ़ जिले से एक आरोपी को धरदबोचा है। आरोपी का मन्न सिसोदिया है। पूछताछ के दौरान बताया कि बच्चों से पार्टियों और समारोह में उठाईगिरी और चोरी का काम करवाते हैं।

                   शलभ सिन्हा और नीरज चन्द्रकार ने बताया कि आरोपी मन्नू सिसोदिया राजगढ़ जिले के पचौरी गांव का रहने वाला है।मन्नू सिसोदिया को राजगढ़ जिले के पचौर गांव से हिरासत में लिया गया। इसके पहले मुखबिर की सूचना और पुलिस कप्तान के निर्देश में बिलासपुर से एक टीम आरोपियों को पक़ड़ने पचौर गांव गयी। बहुत मुश्किल से आरोपी को पकड़ा गया। आईएएस शलभ सिन्हा ने बताया कि राजगढ़ जिले के पचौर और आस पास के तीन गांव कड़िया सांसी आदिवासी बहुल्य है। कड़िया सांसी आदिवासी संगठित अपराध के जरिए अपना जीवन यापन करते हैं।

                                    शलभ सिन्हा और नीरज चन्द्राकर के अनुसार कड़ियासांसी आदिवासी लोग अपराध के बाद पुलिस गिरफ्तारी से बचने एकजुट रहते हैं। बिलासपुर पुलिस टीम को आरोपी को पकड़ने बहुत पापड़ बेलने पड़े हैं। बिलासपुर पुलिस टीम को आरोपी को छोड़ने दस लाख रूपए का आफर मिला। पुलिस टीम ने काफी चतुराई से काम लेते हुए आदिवासी महापंचायत को समझा बुझाकर आरोपी को बिलासपुर लाया।

यश पैलेस और झूलेलाल में हुई थी उठाईगिरी

                              शलभ सिन्हा ने बताया कि कुछ महीने पहले यश पैलेस और झूलेलाल सभाभवन से कार्यक्रम केIMG-20170824-WA0018 दौरान सामान और कीमती सामानों की चोरी हुई। पुलिस लगातार आरोपी की तलाश कर रही थी। इसी दौरान जानकारी मिली कि चोरी का काम संगठित और व्यस्थित रूप से सोची समझी रणनीति के तहत किया गया है। खोजबीन के दौरान मालूम हुआ कि इस प्रकार के अपराध कड़ियासांसी आदिवासी समुदाय के लोग करते हैं। जानकारी मिलते ही पुलिस टीम को मध्यप्रदेश जिला राजगढ भेजा गया। स्थानीय पुलिस और लोगों से कड़ियासांसी आदिवासी समुदाय की गतिविधियों की जानकारी मिली।

                                                        शलभ सिन्हा के अनुसार राजगढ़ जाने वाली टीम में प्रभाकर तिवारी, बलबीर सिंह, अशोक, लक्ष्मी कश्यप, गुरूविंदर सिंह और सिरगिट्टी के अन्य जवान को शामिल किया गया। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद आरोपी को धर दबोचा। यश पैलेस और तिफरा स्थित झूलेलाल सभाभवन से चोरी किए गए सामान को भी जब्त किया।

महापंचायत के बाद होता है निर्णय

                                  शलभ सिन्हा ने बताया कि कड़िया सांसी जाति आदिवासी समुदाय का हिस्सा है। समुदाय के लोग पेशेवर तरीके से नए नए अंदाज में चोरी की घटना को अंजाम देते हैं। उठाईगिरी और लूटपाट का भी काम  करते हैं। व्यस्त कार्यक्रम और पार्टियों में बच्चों से चोरी करवाते हैं। बच्चे समुदाय या बाहर के भी हो सकते हैं। आरोपी को पकड़े जाने पहले सांसी समुदाय के लोग महापंचायत लगाते हैं। पंचायत में निर्णय लिया जाता है कि आरोपी को छोड़ें या नहीं।

                                    पंचायत अपने साथी को छुड़ाने लाखों रूपए देने को तैयार रहते हैं। नहीं माने जाने पर पुलिस पर हमला भी करते हैं। जिसके कारण पुलिस को खाली हाथ वापस भी लौटना पड़ता है। बिलासपुर पुलिस टीम के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। टीम को सांसी महापंचायत ने मन्नू सिसोधिया को छोड़ने के लिए 10 लाख रूपए का ऑफर दिया। आफर को ठुकराते हुए पुलिस टीम किसी तरह मन्नू सिसोदिया को बिलासपुर लाने में कामयाब हुई। पूछताछ के दौरान मन्नू ने अपने साथियों का नाम नहीं बताया है। सिन्हा के अनुसार सांसी समुदाय के लोग चोरी करने और पकड़े जाने पर अपने साथियों का नाम नहीं बताते हैं। मन्नू सिसोदिया ने भी यही किया।
क्या क्या हुआ बरामद

                        शलभ सिन्हा और नीरज चन्द्राकर ने बताया कि आरोपी मन्नू के निशानदेही पर पुलिस ने सोनी की पांच अंगुठी बरामद किया है। इसके अलावा आठ सोने की गिन्नी। डेढ़ तोले सोने की चैन, चांदी की पायल को जब्त किया है। आरोपी के पास बीस हजार रूपए नगद मिले हैं। पूछताछ के बाद मन्न को न्यायालय में पेश किया गया।

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