मंत्री की चिंता और विधायक का दर्द

1/2/2001 6:29 PMबिलासपुर— धान घोटाला जैसा प्रकरण डिजिटल इंडिया के बाद अब कभी नहीं दुहराया जाएगा। नान घोटाला भी डिजिटल इंडिया अभियान के जरिए सबके सामने आ जाएगा। शासन की कार्यशैली और पल पल के निर्णयों की जानकारी अब सभी लोगों को होगी। जो अधिकारी गलती करेंगे उन्हें माफ नहीं किया जाएगा। डिजिटल इंडिया सप्ताह कार्यक्रम उद्घाटन के बाद यह बातें खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री पुन्नूलाल मोहिले ने कही।

                  पत्रकारों से खाद्य मंत्री ने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि अब गांव गरीब लोगों को अधिकारियों के चक्कर से छुटकारा मिलेगा। जाहिर सी बात है कि इससे भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में पुन्नूलाल मोहिले ने कहा कि नान घोटाला जैसी कोई बात नहीं है। जांच के बाद जो दोषी पाए गये हैं उन्हें सजा मिल चुकी है। खाद्यमंत्री ने प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि नान घोटाले की भी जानकारी  एक दिन इंडिया अभियान के जरिए सभी के सामने आ जाएगी। पत्रकार लोग इसे लेकर चिंतित ना हों। सवालों से बचते नज़र आए मोहिले ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार जैसा कोई मामला नहीं है। सरकार ईमानदारी से गरीबों के लिए काम कर रही है। यदि सरकार दोषी होती तो डिजिटल इंडिया जैसा कार्यक्रम को शुरू नहीं करती। पुन्नू लाल मोहिले ने नान में भ्रष्टाचार से इंकार करते हुए कहा कि इस मामले को कांग्रेस कुछ ज्यादा ही तूल दे रही है।

बेलतरा विधायक दर्द     

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                               डिजिटल इंडिया अभियान कार्यक्रम के दौरान बेलतरा विधायक बद्रीधर दीवान काफी उखड़े हुए नज़र आए। उन्होने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि मैने अपने जीवन के साठ साल की  राजनीति में कभी टिकट नहीं मांगा। मुझमें अभी भी ऊर्जा है। बावजूद इसके मंडल कमेटी में स्थान नहीं दिया गया। जो समझ से परे है। उन्होंने अपनी राजनीतिक जीवन के साठ में  संघ और पार्टी की  सेवा में गुजारा है। उपेक्षा की बात को इंकार करते हुए दीवान ने कहा कि मुख्यमंत्री का विवेकाधिकार है कि वे किसे मंडल का अध्यक्ष बनाते हैं और किसे नहीं। उन्हें इस लायक क्यों नहीं समझा गया इसकी जानकारी उन्हे  नहीं है। बेलतरा विधायक ने कहा कि अविभाज्य मध्यप्रदेश के समय से लेकर  छत्तीसगढ़ बनने के बाद से अभी तक मै पार्टी की सेवा कर रहा हूं। बावजूद इसके उन्हें मंडल में स्थान क्यों नहीं दिया गया। इसका आकलन अब जरूरी हो गया है।

                                बातचीत के दौरान बेलतरा विधायक काफी असहज और नाराज नज़र आए। इस दौरान उन्होने अपने दर्द को छिपाने का प्रयास जरूर किया लेकिन कामयाब नहीं हुए। उन्होंने हर बार यही कहा कि मैने कभी टिकट और पद के लिए दौड़ नहीं लगाया।  लगाया होता तो शायद तस्वीर कुछ और होती….

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