भूपेश बघेल बोले-रमन जानते है चुनाव हार गए तो सपरिवार जाएंगे जेल

bhupesh-रायपुर।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा है कि जब कमजोरी आ जाती है तो चक्कर आने लगते हैं और आंखों के आगे अंधेरा छाने लगता है। उन्होंने कहा है कि यह एक बीमारी है और जब भी आंखों के आगे अंधेरा छाने लगे तो बल्ब को फ्यूज नहीं बताना चाहिए बल्कि इलाज करवाना चाहिए।उन्होंने कहा है कि डॉक्टर होने के नाते रमन सिंह जी इस बीमारी के बारे में तो जानते ही हैं लेकिन वे समझ गए हैं कि इसका इलाज उनके बूते का नहीं है। उन्होंने भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक में इसकी कोशिश की थी। उन्होंने नेताओं, कार्यकर्ताओं और मंत्रियों से कहा था कि वे कमीशनखोरी बंद कर दें लेकिन वे देख रहे हैं कि कमीशनखोरी की लत ऐसी लगी है कि न वे खुद इसे बंद कर पा रहे हैं और न पार्टी में कोई कमीशनखोरी छोड़ रहा है इसलिए उनके आंखों के सामने अंधेरा और बढ़ता जा रहा है।
                                        प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि रमन सिंह के आंखों के आगे अंधेरा इसलिए भी छा रहा है क्योंकि वे भाजपा की करारी हार को ठीक तरह से देख पा रहे हैं। वे देख पा रहे हैं कि यदि उनकी सरकार नहीं बनी तो प्रियदर्शिनी बैंक घोटाले से लेकर नान घोटाले, अगुस्टा हेलिकॉप्टर खरीदी घोटाले और घर के पते पर विदेश में जमा हुए कालेधन जैसे सभी मामलों में वे सपरिवार जेल ही जाएंगे।
                                     भूपेश बघेल ने कहा है कि रमन सिंह जी बिजली विभाग के भी मंत्री हैं और जानते हैं कि मड़वा बिजली घर में जो घोटाला हुआ है वह भी उन्हें बहुत झटके देने वाला है। मुख्यमंत्री होने के नाते वे जानते हैं कि बाल्को को सस्ती जमीन देकर भी वे बुरे फंसे हुए हैं और उनके अभिन्न मित्र ने उन्हें दामाद सहित अंतागढ़ के मामले में भी उलझा दिया है।
                                      उन्होंने कहा है कि जो सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर नक्सली तक हर मामले में विफल रही हो, जो किसानों तक से किए अपने वादे पूरे नहीं पा रही हो और जिसके सारे मंत्री कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के दलदल में धंसे हुए हों, उस सरकार के नेता को चुनाव सामने देखकर अगर आंखों के आगे अंधेरा छा रहा है तो यह अस्वाभाविक नहीं है, और तो और बोनस का दांव तक उल्टा पड़ गया है। न किसानों की आत्महत्या रुक रही है और न उनका आंदोलन रुक रहा है। वे तिहार से मन जरूर बहला रहे हैं लेकिन सच यह है कि इससे उनकी हताशा और बढ़ गई है।
                                   रमन सिंह को नरेंद्र मोदी की छवि का भरोसा था लेकिन वे भी अब अपनी सरकार को लेकर सफाई देते घूम रहे हैं और अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी को लेकर उठ खड़े हुए सवालों से ‘न खाउंगा न खाने दूंगा’ वाला आसरा भी छूट गया है। ऐसे में आंखों के आगे अंधेरा छा ही जाना चाहिए।

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