योग आदि संस्कृति का हिस्सा

IMG_20150707_082744बिलासपुर— योगासन से जीवन में अमृत घुल जाता है। मानसिक पीड़ा,थकान दूर होता हैष जैविक क्रियाएं ठीक से काम करने लगती है। शरीर को खुशहाल बना देता है। योगासन  भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। इसे करने से कोई हिन्दू या मुसलमान या फिर ईसाई नहीं हो जाता। इससे आदमी निरोगी जरूर हो जाता है। विनोवानगर में आोयोजित योग शिविर में यह बातें सैकड़ों के सामने माई ग्लोरियस लाइफ की योग शिक्षिका ने दी।

                     योग शिक्षिका ने बताया कि योग से जीवन में अमृत का अहसास होता है।  आज लोग धीरे-धीरे योग से विमुख होते जा रहे हैं। यही कारण है लोग बीमारियों की जकड़न से दूर नहीं पा रहे हैं। यदि सभी लोग प्रातः बेला में योग के लिए एक घंटे का भी समय दें तो रोग-व्याधि से अपने आप मुक्त पाएंगे। योग शिक्षिका ने बताया कि अब तो विज्ञान ने भी सिद्ध कर दिया है कि जिसने योग का रास्ता चुना उसे कभी दवा की जरूरत नहीं पड़ेगी।

                     अग्रवाल भवन में योग प्रशिक्षार्थियों को योगासन कराने के बाद शिक्षिका ने बताया कि योगासन से असाध्य बीमारियों से छुटकारा मिलता है।  मधुमेह,कैंसर,उच्च और निम्न रक्तचाप, हार्ट अटैक, स्पान्डिलाइसिस,जकड़न जैसे कष्टप्रद बीमारियों के लिए योगासान रामबाण से कम नहीं है।

               मालूम हो कि विनोवानगर स्थित अग्रवाल भवन में इन दिनों सुबह योगशिविर का फायदा सैकड़ों लोग उठा रहे हैं। योग शिविर के दौरान नासिक से निर्देश देने पहुंची शिक्षिका के अनुसार योगासन से व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत बनता है। योग शिविर 11 जुलाई तक चलेगा।

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