बस्तर नगरनार का निजीकरण छत्तीसगढ़ के साथ अन्यायः जोगी कांग्रेस के हाथ लगे गुप्त दस्तावेज

pc_oct_27_ajरायपुर । मरवाही विधायक अमित जोगी ने बस्तर के नगरनार इस्पात संयत्र के निजीकरण को छत्तीसगढ़ विरोधी बताया है। उन्होने शुक्रवार को  में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि   27 अक्टूबर २०१६ आज ही के दिन,ठीक एक वर्ष पहले, केंद्र सरकार की विनिवेश मामलों में कैबिनेट कमिटी की बैठक में 16 कंपनियों सहित बस्तर के नगरनार इस्पात संयंत्र को निजी हाथों में बेचने यानि विनिवेश करने का निर्णय लिया गया था।छत्तसीगढ़ की भाजपा सरकार और केन्द्रीय मंत्रिमंडल में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ का अहित रोकने में नाकाम रहे हैं। इसलिए उन्हे अपने पद पर बने रहने का कोई हक नहीं , उन्हे तत्काल अपने पद से इस्ती फा दे देना चाहिए।

अमितो जोगी ने कहा कि बस्तर और बस्तरवासियों की भावनाओं के विरुद्ध जाकर मोदी सरकार ने नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण का यह छत्तीसगढ़ विरोधी कदम उठाया था । भाजपा सरकार के इस अनुचित और अन्यायपूर्ण कदम में कांग्रेस पार्टी भी बराबर की भागीदार रही क्योंकि नगरनार को निजी हाथों में बेचने का प्रस्ताव सर्वप्रथम कांग्रेस पार्टी ने ही वर्ष २०१३ में  रखा था। यह बात अलग है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तीन साल में एक बार बस्तर आकर घडियाली आंसूं बहाना नहीं भूलते। नगरनार इस्पात संयंत्र का विनिवेशीकरण एक अत्यंत गंभीर मुद्दा है। छत्तीसगढ़ के  मुख्यमंत्री  ने इस वर्ष 8 फरवरी को एक पत्र  प्रधानमंत्री  को लिखा । जिसमे उन्होंने नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण के कदम को टालने की बात कहते हुए तीन बातें प्रमुखता से लिखी :  पहला (1) – निजीकरण से नक्सलवाद को बढ़ावा मिलेगा, नक्सलियों से निपटने में हम तीन साल पीछे हो जायेंगे । दूसरा (2) –  बस्तरवासियों विशेषकर युवाओं में असंतोष और बढेगा और तीसरा (3) – विकास एवं रोजगार को लेकर निजी कंपनियां सरकारी कंपनी जैसी प्रतिबद्घता नहीं दिखाएंगी। मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़वासियों को, विशेषकर बस्तरवासियों को बताएं कि उनके पत्र का प्रधानमंत्री ने क्या जवाब दिया, जवाब दिया भी या नहीं ? अगर दिया तो प्रधानमंत्री के पत्र को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ।

अमितोजोगी ने कहा कि ।नगरनार इस्पात संयंत्र के विनिवेशीकरण से सम्बंधित हमारे हाथ एक गुप्त दस्तावेज लगा है जिसमे निति आयोग द्वारा विनिवेश के लिए प्रस्तावित सोलह कंपनियों के विनिवेशिकरण की प्रक्रिया का स्टेटस है। मोदी सरकार ने नगरनार इस्पात संयंत्र को निजी हाथों में बेचने की पूरी तैयारी गुपचुप लेकिन जोरशोर से चालू है। दिल्ली, कोलकाता मुंबई और नोएडा से ट्रांज़ैक्शन एडवाइजर, एसेट वैलुएर और लीगल एडवाइजर नियुक्त किया जा चुके हैं । 20 हज़ार करोड़ की कीमत तय की जा चुकी है। बस ! कुछ दिनों में ही एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट का ग्लोबल विज्ञापन निकालने की तैयारी है।  उधर 25 सितम्बर को दिल्ली में केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री विष्णुदेव साय की डिनर पार्टी में सौदान सिंह, मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह सहित प्रदेश के सभी मंत्री और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष केंद्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह को भाजपा की बस्तर में पतली हालत का वास्ता देकर नगरनार के निजीकरण रोकने का अनुरोध करते हैं और इधर एनएमडीसी के डायरेक्टर फाइनेंस डीएस अहलूवालिया प्रेसवार्ता लेकर यह घोषणा करते हैं कि नगरनार को निजी हाथों में सौंपने का 270 दिनों के काउंट डाउन की शुरआत हो चुकी है और 270 दिनों के अंदर नगरनार नीलाम हो जाएगा। आखिर ये हो क्या रहा है ? ये दुर्भाग्य की बात है कि छत्तीसगढ़ से केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय स्वयं अपने ही विभाग द्वारा उठाये जा रहे छत्तीसगढ़ विरोधी कदम को रोक पाने में असमर्थ हैं। राज्य की भाजपा सरकार, भाजपा की प्रदेश इकाई, छत्तीसगढ़ के साथ गलत होते देख भी चुप हैं। मुख्यमंत्री एक पत्र लिखकर अपने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ देते हैं।  बस्तरवासियों के साथ अन्याय होता देख, छत्तीसगढ़ भाजपा के कार्यकर्ता आखिर क्यों चुप हैं ?

छत्तीसगढ़ में व्यापक स्तर पर हो रहे जनआंदोलन, स्थानीय लोगों के विरोध, बस्तरियों के अहित व राजनितिक विरोध के बावजूद मोदी सरकार का नगरनार इस्पात संयंत्र के विनिवेशीकरण का फैसला हिटलरशाही और तानाशाही की एक मिसाल है। जब इस्पात संयंत्र चालू ही नहीं हुआ तो उसका विनिवेश कैसे किया जा सकता है ? साफ़ है कि दिल्ली में बैठी सरकार ने नगरनार इस्पात संयंत्र, बस्तरवासियों के लिए नहीं बल्कि किसी पूंजीवादी को तोहफा में देने के लिए बनाया है,बस्तरवासियों के साथ मिलकर नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण के विरोध में निरंतर आंदोलन कर रही जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ये मांग करती है और घोषणा करती है कि : नगरनार इस्पात संयंत्र के विनिवेशीकरण से सम्बंधित जिस दिन केंद्र सरकार ने “एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट” का विज्ञापन निकाला, उसी दिन जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) भी “एक्सप्रेशन ऑफ़ बस्तर’स इंटरेस्ट” का विज्ञापन देगी जिसमे विश्व भर की कंपनियों को ये आगाह किया जाएगा कि वो बस्तारवासियों के साथ हो रहे अन्याय के भागीदार न बनें और नगरनार इस्पात संयंत्र में निवेश न करें।जब छत्तीसगढ़ के सभी राजनितिक दल नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण के विरोध में हैं तो विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए ताकि संकल्प प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार को बस्तरवासियों का अहित करने से रोका जा सके।

उन्होने कहा कि  मुख्यमंत्री और केंद्रीय राज्य मंत्री अपने पद से इस्तीफ़ा दें ताकि मोदी सरकार पर नगरनार के निजीकरण को तत्काल रोकने का दबाव बनाया जा सके।

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