किम्स में शव को फिर बंधक बनाने की खबर…प्रबंधन किया इंकार..परिजनों ने कहा झूठ बोल रहा डॉक्टर

KIMS. बिलासपुर— हमेशा की तरह किम्स में आज एक बार फिर एक शव को बन्धक बनाने की खबर मिली। पत्रकारों के पहुंचने से पहले ही शव को परिजनों के हवाले कर किम्स प्रबंधन ने अपने आपको विवादों से बचने सफल प्रयास किया है। बताया जा रहा है कि किम्स प्रबंधन ने शव देने से पहले बकाया राशि की मांग की थी। पीड़ित परिवार ने मोहलत मांगी तो किम्स प्रबंधन आपे से बाहर हो गया। भुगतान करने के बाद ही शव देने के बात कही। खबर मीडिया तक पहुंची तो प्रबंधन ने पत्रकारों के पहुंंचने से पहले ही शव परिजनों के हवाले कर अस्पताल रवाना कर दिया।

                                      दोपहर को खबर मिली कि किम्स ने एक शव को रूपयों के लिए बंधक बनाया है। खबर मिलते ही पत्रकार लोग मौके पर पहुंच गए। जानकारी मिली कि प्रबंधन ने शव को पत्रकारों के पहुंचने से पहले ही रवाना कर दिया है।मतलब मामले को छिपाने में एक बार फिर सिम्स प्रबंधन कामयाब हुआ है।

                     जानकारी के अनुसार तोरवा सांई मंदिर के पास रहने वाले हार्ट पेसेंट के.एन.राव को अक्टूबर को शाम आठ बजे किम्स में भर्ती किया गया। इलाज के दौरान 60 साल के राव की एक नवम्बर को सुबह मौत हो गयी। पीडित परिवार ने किम्स प्रबंधन को बताया कि दो बजे तक इलाज की बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन शव को ले जाने की इजाजत दी जाए। इतना सुनते ही सिम्स प्रबंधन ने कड़ा रूख अख्तियार कर लिया। दो टूक बताया कि जब तक बकाया 25 हजार रूपए जमा नहीं किए जाते हैं। तब तक शव को परिजनों के हवाले नहीं किया जाएगा। मामला हंगामा होने तक पहुंच गया। इस बीच मामले की जानकारी पत्रकारों को हुई। किम्स प्रबंधन ने भनक लगते ही के.एन.राव के शव को बिना रूपए लिए परिजनों के हवाले कर दिया।

शव को बंधक नहीं बनाया  KIMS

                        किम्स के डॉ.राजशेखर ने बताया कि हमने शव को बंधक बनाया ही नहीं। आरोप में कोई दम नहीं है। हमने पीडित परिवार को बकाया 25 हजार रूपए जमा करने को कहा। उसने कहा कि दोपहर तक राशि जमा कर दिया जाएगा। हम लोग आवश्यकता अनुसार राशि कम भी कर देते हैं। यदि किसी के पास रूपए नहीं है तो हम कर भी क्या कर सकते हैं। लेकिन आरोप में दम नहीं है कि हमने शव को बंधक बनाया है। राजशेखबर ने बताया कि हमने मुफ्त में इलाज के लिए अस्पताल नहीं खोला है। इलाज का भुगतान मरीज या मरीजों के परिजनों को करना ही होगा। यह हमारा अधिकार है। सरकार भी इसमें दखल नहीं दे सकती है।

                                             राजशेखर ने कहा मरीज ने केवल दस हजार रूपया ही जमा किया था। 25 हजार रूपए अभी भी बकाया है। यदि हमने अपने रूपयों की मांग कर दी तो क्या अपराध कर दिया।

परिजनों ने कहा बनाया बंधक

                      मृतक के.एन.राव के परिजनों ने बताया कि हमने रूपया देने की मोहलत मांगी थी। प्रबंधन ने कहा कि जब तक रूपए नहीं मिलेंगे शव को नहीं छोड़ा जाएगा। गिड़गिड़ाने के बाद भी किम्स के डॉक्टरों ने मेरा विश्वास नहीं किया। जब पत्रकार लोग मौके पर पहुंचे तो आनन फानन में शव को हवाले किया गया। कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी करते हुए प्रबंधन ने शव को तत्काल किम्स से ले जाने को कहा। यह सच है कि मुझे 25 हजार देना है लेकिन मुझे शव को पहले घर लेकर जाना होगा। इसके बाद ही रूपयों की व्यवस्था कर पाउंगा।

पहले भी हो चुके हैं वारदात

                                              किम्स में शव बंधक बनाने की यह पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी भुगतान को लेकर कई बार शव को बंधक बनाया जा चुका है। काफी हंगामा और पेपरवाजी के बाद किम्स ने शव को छोड़ा। इस बार किम्स ने खतरे को भांपते हुए यू टर्न लिया। और शव को बिना रूपए लिए ना केवल छोड़ा बल्कि आनन फानन में घर पहुंचाने की व्यवस्था में सहायक भी बना।

 मीडिया पर नाराजगी

                 किम्स डॉक्टर राजशेखर ने बताया कि मीडिया सामान्य सी घटना को तिल का ताड़ बना देता है। ऐसा लगता है कि किम्स को जानबूझकर निशाना बनया जाता है। मरीजो का जीना या मरना हमारे हाथ में नहीं है। हम लोग इलाज का पैसा मांगते हैं। कोई मरे या जिन्दा रहे लेकिन इलाज का भुगतान तो करना ही होगा।

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