किसान ने मंत्री को बताया आरक्षक ने लिया 5000…शिकायत के बाद भेजा जेल..दबंग ने किया जमीन पर कब्जा

IMG20171116141114बिलासपुर— प्रभारी मंत्री अजय चन्द्राकर से पौंसरा परसदा निवासी किसान महेश साहू ने न्याय की गुहार लगाई है। महेश साहू ने अपनी शिकायत में रतनपुर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाया है। महेश ने बताया कि उसकी जमीन पर रामचरण यादव ने कब्जा कर लिया है। पुलिस दबंग रामचरण यादव का साथ दे रही है।

                         प्रभारी मंत्री अजय चन्द्राकर से परसदा निवासी महेश साहू ने दबंग जमीन माफिया और रतनपुर प्रधान आरक्षक की शिकायत की है। अजय चन्द्राकर को लिखित शिकायत में महेश साहू ने बताया कि गांव का दबंग रामचरण यादव और देवचरण ने जीना हराम कर दिया है। जमीन पर कब्जा कर लिया है। मारपीट कर खड़ी फसल भी काट लेता हैं। रामचरण के खिलाफ शिकायत करने रतनपुर थाना गया तो हेमसिंह ने उल्टा मुझे ही लाकअप के पीछे भेज दिया।

                महेश साहू के अनुसार रामचरण यादव गांव का गुंंडा है। मारपीट कर फसल भी काट लेता है। चन्द्राकर को दिेए आवेदन में महेश ने बताया कि जमीन 25 अप्रैल 2012 में रघुबीर प्रसाद से खरीदा था। इसके कुछ साल बाद रामचरण और देवचरण ने जमीन पर कब्जा कर लिया। कोर्ट ने कब्जा भी दिलाया। बावजूद इसके रामचरण ने मारपीट कर खेत पर दुबारा कब्जा कर लिया। अब कहता है कि जो करना है कर ले कानून और पुलिस मेरी मुठ्ठी में है।

                        चन्द्राकर से शिकायत करने से पहले महेश साहू ने आईपीएस शलभ सिन्हा से भी आप बीती सुनाई। महेश ने सिन्हा से भी न्याय की गुहार लगाई। शलभ सिन्हा से महेश साहू ने बताया कि रतनपुर थाना आरक्षक हेम सिंह ने रामचरण को जमीन से हटाने के लिए पांच रूपया लिया बावजूद इसके मुझे आज तक जमीन नहीं मिली। दुबारा रतनपुर थाना शिकायत करने गया तो हेमसिंह ने मुझे लाकअप में डाल दिया। हेम सिंह ने धमकी देते हुए कहा कि कोर्ट का आदेश मेरे लिए मायने नहीं रखता हैं। जमीन पर रामचरण का ही कब्जा रहेगा। यदि किसी से शिकायत की तो हमेशा के लिए जेल में सड़ता रहेगा।

 शलभ ने दिया कार्रवाई का आदेश 

                  किसान की गुहार सुनने के बाद आईपीएस शलभ सिन्हा ने रतनपुर थाना प्रभारी को तत्काल फोन लगाया। मामले में कार्रवाई का आदेश दिया। साथ ही प्रोग्रेस रिपोर्ट दिए जाने की भी बात कही। शलभ सिन्हा थाना प्रभारी को आदेश दिया कि कोर्ट के अनुसार कार्रवाई की जाए। अन्यथा आरक्षक गभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।

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