संचालक मण्डल के निर्णय पर स्थगन आदेश…सीईओ को कोर्ट से राहत… बताया…नियम विरूद्ध हुई कार्रवाई

tiwari sahkari   SAHKARITA_GRADE_VISUAL 003बिलासपुर—न्यायालय संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं ने जिला सहकारी बैंक मुख्य कार्यपालन अधिकारी के खिलाफ एक तरफा रीलिविंग पर स्थगन आदेश दिया है। न्यायालय ने जिला सहकारी बैंक संचालक मण्डल के निर्णय और अध्यक्ष के आदेश को गैर कानूनी बताया है। आगामी किसी आदेश या निर्णय तक अभिषेक तिवारी को मुख्य कार्यपालन अधिकारी के कार्यों का निर्वहन का आदेश दिया है। न्यायालय ने अभिषेक तिवारी को कोर्ट में 20 फरवरी  2018 को पेश होने का भी आदेश दिया है।

              न्यायालय संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं ने जिला सहकारी बैंक सीईओ अभिषेक के रीलिविंग के खिलाफ स्थगन का आदेश दिया है। इसके अलावा अभिषेक तिवारी को पंजीयक न्यायालय में 20 फरवरी 2018 को पेश होने का आदेश दिया है।

                        मालूम हो कि जिला सहकारी बैंक संचालक मंडल ने 17 दिसम्बर 2017 की पहली बैठक में अभिषेक तिवारी को एक तरफा रीलिविंग कर एस.के.वर्मा को मुख्य कार्यपालन अधिकारी का प्रभार दिया।  फैसले के खिलाफ अभिषेक तिवारी ने वकील के जरिेए न्यायालय पंजीयक का दरवाजा खटखटाया। पेश किए गए दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने अभिषेक तिवारी को राहत देते हुए आगामी आदेश तक पर पर पूर्ववत  बने रहने को कहा है। स्थगन आदेश की जानकारी को जिला सहकारी बैंक संचालक मंडल को भी भेज दिया है।

                                        पंजीयक न्यायालय ने जिला सहकारी बैंक को भी नोटिस जारी कर 20 फरवरी 2018 को रीलिविंग का आधार और अभिषेक तिवारी पर लगाए गए आरोपों के समर्थन में दस्तावेज के साथ पेश होने को कहा है। स्थगन आदेश में बताया गया है कि अभिषेक तिवारी की तरफ से पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार बैंक संचालक मंडल ने बिना किसी ठोस आधार के कार्रवाई के निर्णय लिया है। जबकि मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति को लेकर एक मामला पहले से ही हाईकोर्ट में है। बावजूद इसके हटाने का एकतरफा आदेश विधि सम्मत नहीं है।

               न्यायालय के आदेश में जिक्र किया गया है कि अभिषेक तिवारी की नियुक्ति निर्धारित शर्तों के अनुसार हुई है। ऐसे में बिना रजिस्ट्रार के निर्देश पर संचालक मंडल को सीईओ को हटाने का अधिकार नहीं है। संचालक मण्डल ने कार्रवाई के समय सोसायटी अधिनियम का पालन नहीं किया। जबकि अध्यक्ष की पहली बैठक में कुल 14 एजेन्डों को रखा गया था। इसमें मुख्य कार्यपालन अधिकारी को हटाना शामिल नहीं था। बावजूद इसके नियमों को अनदेखी कर वर्तमान सीईओ को हटाया गया।

                  अभिषेक तिवारी के वकील  ने कोर्ट को बताया कि प्रार्थी पर अक्षमता का गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जबकि पदस्थापना के पहले जिला सहकारी बैंक घाटे में था। बैंक को रिजर्व बैंक ने धारा 11(1) में डाल दिया था। प्रार्थी के प्रयास से जिला सहकारी बैंक को 11(1) से निकालने में सफलता मिली है। ऐसा लगता है कि प्रार्थी के खिलाफ कोई गहरी साजिश हो रही है। आयोग्यता के आरोप से वादी को सामाजिक क्षति हुई है। जो वाद योग्य है।

            पंजीयक कोर्ट ने प्रार्थी के आवेदन पर विचार करते हुए  जिला सहकारी बैंक को आदेश दिया है कि आगामी आदेश तक अभिषेक तिवारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर पूर्ववत काम करेंगे।

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