जब स्टेशन में होने लगी कोयले की बारिश..प्लेटफार्म में बिछ गयी काली चादर..यात्रियों में हड़कम्प…दो लोग घायल

बिलासपुर—उस्लापुर स्टेशन में कोयले की बारिश हुई। बेमौसम बरसात और वह भी कोयले की.. लोग आश्चर्य में डूब गए। इसके पहले लोगों को कुछ समझ में आता कि धड़धडाती कोयले से भरी मालगाड़ी निकल चुकी थी। टनों कोयला प्लेटफार्म नम्बर दो पर विखर चुका था। कोयले की बरसात से रेलवे यात्रियों में अफरा तफरी मच गयी। कोयले की बारिश करीब 10-15 सेकन्ड तक होती रही। लोग बचने के लिए इधर उधर भागते रहे। मालगाड़ी निकलने के बाद लोगों ने देखा कि प्लेटफार्म नम्बर दो में टनो कोयला विखरा हुआ है।

                   घटना करीब 11 बजे की है। लोग उस्लापुर रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नम्बर 2 पर अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहे थे। कुछ लोग गाड़ी के इन्तजार में प्लेटफार्म कुर्सी पर बैठे थे। प्लेटफार्म में मौजूद किसी को इंदौर बिलासपुर नर्मदा एक्सप्रेस का तो किसी को जम्मू तवी का इंतजार था। प्लेमफार्म में करीब हजार पांच सौ से अधिक यात्री रोज की तरह ट्रेन के इंतजार में खड़े थे या फिर इधर उधर घूमकर समय गुजार रहे थे।

                                     इसी बीच कोयला से भरी ओव्हरलोड़ मालगाड़ी प्लेटफार्म नम्बर से धडधड़ाते निकली। देखते ही देखते कोयले की बारिश शुरू हो गयी। गाड़ी की रफ्तार इतनी थी कि ओव्हर लोड कोयला हवा के झोंके से पहले ऊपर गया। इसके बाद शेड़ में तडतड़ की आवाज आने लगी। ट्रेन की गति इतनी तेज थी कि अलग अलग साइज का कोयला उछलकर प्लेटफार्म में भी गिरने लगा। यात्रियों में अफरातफरी मच गयी। देखते ही देखते प्लेटफार्म दो में कोयले का चादर बिछ गया। कोयले की बारिश करीब 10-15 सेकन्ड तक होती रही जब तक मालगाड़ी के सभी डिब्बे प्लेटफार्म से निकल नहीं गए।

              कोयले की बारिश के बाद कई लोग तो ट्रेन पकड़ने की वजाय घर लौट गए। क्योंकि उनके कपड़ गन्दे हो चुके थे। अफरातफरी के दौरान कोयले के टूकड़े से दो लोगों को चोट भी आई है। फिलहाल घटना के बाद यात्रियों में जमकर नाराजगी देखने को मिली है।

टारगेट पूरा करने का चक्कर

               लोगों ने बताया कि यह लापरवाही केवल टारगेट पूरा करने के चक्कर में हुई है। रेलवे का वित्तीय वर्ष मार्च में खत्म होने वाला है। ऐसी सूरत में रेल प्रशासन मालगाड़ियों में ओव्हरलोड़ कोयले का परिवहन कर लक्ष्य हासिल करना चाहता है। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। कोयले के टुकड़ों से कई लोग को चोट आयी है। यह जानते हुए भी उस्लापुर रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म में यात्री खड़े हैं। बावजूद इसके…ओव्हर लोड़ गाड़ी की गति को नियंत्रित नहीं किया गया। यदि कोयले के किसी बड़े टुक़ड़े से कोई गंभीर रूप से घायल हो जाता तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता।

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