झीरम घाटीः सौ नक्सली पर एक जवान भारी

JHEERAM_GHATI_VISUAL 001बिलासपुर—झीरम घाटी काण्ड को लेकर आज पुराने हाईकोर्ट में विशेष अदालत के सामने गवाहों का प्रतिपरीक्षण किया गया। जस्टिस प्रशांत मिश्रा के विशेष अदालत में आज सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर व्ही.एस सावंत का प्रतिपरीक्षण हुआ।

             सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सुधीश श्रीवास्तव के सवालों का जवाब देते हुए सावंत ने कहा कि नक्सल हमले के बाद जवानों ने घायलों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने बताया कि पुलिस और सीआरपीएफ के जवान उच्च अधिकारियों के साथ जब मौके पर पहुंचे तो नक्सलियों ने फायरिंग किया। जवाबी फायरिंग के बाद नक्सली फरार हो गये। हमने कुछ देर तक पीछा किया लेकिन घायलों की सुरक्षा को लेकर हम घटना स्थल पर लौट आये।

                 सुधीश श्रीवास्तव के प्रश्न पर सावंत ने बताया कि हम नक्सलियों का पीछा तो कर सकते थे लेकिन हमारी पहली प्राथमिकता घायलों को सुरक्षित बचाना था। इसलिए हमने नक्सलियों का पीछा करने की वजाय नक्सल हमले में घायल लोगों को सुरक्षित उपचार स्थल पहुंचाने पर ध्यान दिया। सावंत ने बताया कि एक जवान सौ नक्सलियों पर भारी होता है। हम पीछा कर उन्हें ढेर भी कर सकते थे। लेकिन हमारी प्राथमिकता घायलों को बचाना था।

                 दोपहर बाद नक्सल हमले के बाद सीआऱपीएफ के चार्ली 80 के जवान का भी प्रतिपरीक्षण किया गिया। उन्होंने बताया कि परिवर्तन यात्रा की जानकारी उन्हें 17 मई को हुई। हमन एफ बटालियन के साथ 23 तारीख को विशेष सुरक्षा अभियान भी संयुक्त रूप से चलाया था। अधिवक्ता सुधीश के सवालों का जवाब देते हुए सीआरपीएफ के जवान ने बताया कि परिवर्तन यात्रा के पहले उच्च अधिकारियों की बैठक हुई होगी। लेकिन इस बात की जानकारी उन्हें नहीं है। जवान ने बताया कि परिवर्तन यात्रा कहां से कहां तक होगी इसकी भी जानकारी उन्हें नहीं थी। परिवर्तन रैली हमारे किन क्षेत्रों से निकलेगी इसकी जानकारी जरूर थी।

                     एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सीआरपीएफ के जवान ने बताया कि परिवर्तन यात्रा में कौन-कौन है इसकी भी जानकारी उसे उस समय नहीं थी।

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