स्वास्थ्य महकमें में अटैचमेन्ट का खेल…मूल स्थापना में डॉक्टरों का टोंटा…मजबूर मरीज हो रहे लूट का शिकार

बिलासपुर–स्वनामधन्य बिलासपुर जिले का स्वास्थ्य महकमा अपनी कारगुजारियों के कारण किसी परिचय का मोहताज नहीं है।फटकार और आदेश का स्वास्थ्य महकमें पर कोई असर नहीं होता है। बेलगाम कर्मचारी शासन के आदेश को अंगूठा दिखाते हुए खुद को निवास क्षेत्र के स्वास्थ्य केन्द्रों में अटैच कर वेतन उठा रहे हैं। खासतौर मस्तूरी ब्लाक के दर्जनों स्वास्थ्य कर्मचारी अटैचमेन्ट का सबसे ज्यादा फायदा उठा रहे हैं। जबकि मस्तूरी ब्लाक के उप स्वास्थ्य केन्द्रों में स्टाफ की भारी कमी है। बावजूद इसके स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी मूलस्थापना में जाने को तैयार नहीं है। यही कारण है कि क्षेत्र के मरीज दर दर भटकने को मजबूर हैं।

                         शासन ने संलग्नीकरण खत्म कर दिया है। बावजूद इसके स्वास्थ्य महकमें में संलग्नीकरण का खेल बंद नहीं हुआ है। अकेले मस्तूरी स्वास्थ्य केन्द्र में संलग्न कर्मचारियों की संख्या दर्जनों से अधिक है। संलग्नीकरण के  चलते क्षेत्र के उप स्वास्थ्य केन्द्र में डॉ्क्टरों,नर्सो,और वार्ड ब्वाय की भारी कमी है।

             जोगी कांग्रेस उत्तर क्षेत्र प्रवक्ता मणिशंकर पाण्डेय ने बताया कि आरटीआई से जानकारी मिली है कि मस्तूरी ब्लाक स्वास्थ्य केन्द्र में सर्वाधिक कर्मचारी संलग्न है। संलग्न कर्मचारियों में डॉक्टर से लेकर नर्स और वार्ड ब्वाय शामिल हैं। जबकि इन्हें अपने क्षेत्रों में होना चाहिए। शासन ने भी आदेश जारी संग्नीकरण को गैर जरूरी बताया है। बावजूद इसके मस्तूरी उप स्वास्थ्य केन्द्र के चालक डॉक्टर और नर्स खुद को अपने गांव या शहर के क्षेत्रों को अटैच करवा लिया है। जिसके कारण गरीब मरीजों को इधर-उधर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है। उपस्वास्थ्य केन्द्र में कर्मचारियों के नहीं होने का फायदा निजी नर्सिंग के डॉक्टरों को मिल रहा है। निजी नर्सिंग होम के डाक्टर गरीबों की  मजबूरी का जमकर फायदा उठा रहे हैं। छोटी सी बीमारी के लिए गरीबों को जमीन जायजाद बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।

             मणिशंकर पाण्डेय ने बताया कि उप-स्वास्थ्य केन्द्र के डाक्टर और नर्सों ने  ग्रामीण क्षेत्र से बचने के लिए जानबूझकर अपने आपको घर के आस पास के स्वास्थ्य केन्द्रों में संलग्न करवा लिया है। कुछ लोगों ने अधिकारियों की पूजा पाठ कर मूल स्थापना वाले केन्द्र से दूर अपने गांव घर के उप-स्वास्थ्य केन्द्रों को चुना है। जबकि उनका वेतन सालों से मूल स्थापना केन्द्र से निकलता है। पूछने पर बताया जाता है कि डॉक्टर या कर्मचारी का स्वास्थ्य केन्द्र से स्थानातरण हो गया है।

                       मणिशंकर ने आरटीआई से मिली जानकारी को पेश कर बताया कि मस्तूरी स्वास्थ्य महकमें के दर्जनों डॉक्टर और कर्मचारी जिन्हें होना चाहिए अपने मूल पदास्थापना क्षेत्र में लेकिन जुगाड़ लगाकर गांव या शहर  क्षेत्र के  स्वास्थ्य केन्द्रों में संलग्न है।

         आरटीआई जानकारी के अनुसार एनएएम रिंकु दत्ता का मूल स्थापना उप स्वास्थ्य केन्द्र जयरामनगर है। लेकिन संलग्न होने के बाद बिलासपुर में काम कर रही हैं। अर्चना मसीह उप स्वास्थ्य केन्द्र बोहारडीह में एनएनएम हैं। इस समय सीएसची मस्तूरी में अटैच है। स्टाफ नर्स हेमलता ठाकुर को सीएचसी मस्तूरी में होना चाहिए लेकिन सेन्दरी मेन्टल अस्पताल में संलग्न हैं। नेत्र सहायक धीरेन्द्र शर्मा पीएचसी मल्हार की सीएचसी मस्तूरी में है। नेत्र सहायक शिवशंकर राठौर दर्रीघाट छोड़कर सीएचसी मस्तूरी को सेवा दे रहे हैं।

                         मणिशंकर पाण्डेय ने बताया कि  सेक्टर जोंधरा का पुरूष पर्यवेक्षक संतोष महिलांगे  समय सीएचसी मस्तूरी में हैं। एमपीडब्लू सुरेन्द्र सिंह को रॉक से हटाकर धनगवां में रखा गया है। वार्ड व्वाय राजू सारथी  मस्तूरी से सीएमओ आफिस में अटैच है। इसी तरह बार्ड ब्वाय शिवशंकर डोंगरे  पीएचसी नवागांव से हटाकर सीएमओ कार्यालय में रखा गया है।

                                         पाण्डेय के अनुसार एमओ डॉ.श्रद्धा दास , डॉ.शीला साहा, डॉ.के.के.मित्तल,डॉ.राजेन्द्र सिंह मरावी ने खुद को सीएचसी मस्तूरी,मरवाही , और पीएचसी जयरामनगर से हटाकर जेल चिकित्सालय,सीएचसी मस्तूरी और पीएचसी सीपत में अटैच करवा लिया है। रेडियालाजिस्ट जी.एस केवट को जयरामनगर से सीपत और हाउसकीपर सिंह को सीएचसी गौरेला से सीेएचसी मस्तूरी में अटैच किया गया है।

  हटाने का दिया आदेश

                अटैचमैन्ट के सवाल जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी  डॉ.बोर्डे ने बताया कि मैने  एक आदेश निकालकर अटैचमेन्ट को खत्म कर दिया  है। एक बार फिर जानकारी मांगू कि कौन कौन अपने मूलस्थापना की जगह अटैच होकर  दूसरे स्वास्थ्य केन्द्रों को सेवा दे रहा है। पता लगाया जाएगा कि आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया। क्योंकि अटैचमेन्ट खत्म कर दिया गया है। आदेश नहीं मानने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। सबकों मूल स्थान पर भेजा जाएगा।

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