CO-Operative बैंक में 1 अरब का घोटाला…खुलेआम घूम रहे रसूखदार आरोपी..कोर्ट का अवमानना…आज तक नहीं हुई कार्रवाई

बिलासपुर—जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक मर्यादित बिलासपुर में 100 करोड़ रूपए का घोटाला हुआ है। ताज्जुब की बात है कि जांच पड़ताल और कोर्ट आदेश के बाद भी आरोपियों पर आज तक कार्रवाई नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार दो साल बाद एफआईआर नहीं होने या किसी प्रकार की विभागीय और न्यायिक कार्रवाई नहीं होने की सूरत में मामला निरस्त हो जाएगा। रिपोर्ट और हाईकोर्ट का आदेश करीब डेढ़ साल पुरा हो चुका है। बावजूद इसके आज तक आरोपियों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है। आरोपी लोग अपनी गोटियां बैठकर आने वाले 6 महीने का इंंतजार कर रहे हैं। यदि इस बीच दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जाता है तो आरोप खुद बखुद खारिज हो जाएगा।

                      जिला सहकारी बैंक में पंजीयक स्तर पर जांच पड़ताल के बाद करीब 100 करोड़ का घोटाला आज से करीब डेढ़ दो साल पहले सामने आया था। हाईकोर्ट ने मामले में आरोपी तात्कालीन जिला सहकारी बैंक चेयरमैन देवेन्द्र पाण्डेय, तात्कालीन सीईओ अभ्यूदय सिंह, सह सीईओ अमित शुक्ला के अलावा एक अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ गिरफ्तारी से बचने चारों लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन उच्चत्तम न्यायालय से  घोटाले के आरोपियों को राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट के निर्णय को यथावत रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने घोटाले में शामिल चारों को सुने जाने का मौका दिया।

                          सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तात्कालीन सहकारिता सचिव ने चारों को बयान दर्ज कराने  नोटिस भेजा। कई नोटिस के बाद भी तात्कालीन जिला सहकारी बैंक चैयरमैन देवेन्द्र पाण्डेय, सीईओ अभ्यूदय सिंंह, अमित शुक्ला और चौथा व्यक्ति बयान देने नहीं गया। इतना हीं सचिव के आदेश की कापी को भी रीसिव नहीं किया गया। तात्कालीन सचिव ने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया। यही कारण है कि 100 करोड़ के घोटाले का राज आज तक सामने  नहीं  आ सका है। आरोपियों के खिलाफ आज तक एफआईआर भी नहीं हुई है। यदि चारो का बयान हो जाता तो आज सभी जेल में की हवा खाते मिलते। यदि आज भी कार्रवाई हो जाए तो शायद यह पीएनबी की तरह प्रदेश का सबसे बड़ा को-अापरेटिव घोटाला साबित होगा।

                                                    मालूम हो कि दो साल पहले जिला सहकारी बैंंक बिलासपुर में भर्ती,सुतली,तिरपाल,प्रमोशन,कमीशन समेत कई मामलों को लेकर संयुक्त सचिव के.एल.ठारगावे की अगुवाई में जांंच हुई। जांच पडताल के दौरान भारी वित्तीय,भर्ती अनिमितताओं के अलावा परिवहन,समेत कई मामलों में भ्रष्टाचार के पन्ने खुले। जांच टीम ने मामले को शासन के सामने रखा। मामला हाईकोर्ट तक पहुचा। हाईकोर्ट ने मामले में शामिल देवेन्द्र पाण्डेय समेत अन्य चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई का निर्देश दिया।

         चारो लोग हाईकोर्ट के फैसले के खिळाफ सुप्रीम कोर्ट गए। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को मुहर लगाया। साथ ही देवेन्द्र समेत अन्य चारों को सुनने का मौका देने को कहा। तत्काकालीन सहकारिता सचिव रीता शांडिल्य ने देवेन्द्र पाण्डेय,अभ्यूदय सिंह ,अमित शुक्ला और अन्य व्यक्त्ति को नोटिस जारी कर बयान दर्ज करने बुलाया। कई नोटिस जारी होने के बाद भी किसी ने बयान दर्ज नहीं कराया। इतना ही नहीं…किसी आरोपी ने सचिव के नोटिस को लिया लेना भी उचित नहीं समझा।

मामला ढण्डे बस्ते में…एफआईआर भी दर्ज नहीं

                       नियमानुसार चारों ने जब बयान नहीं दिया तो तात्कालीन सचिव को चारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाना था। लेकिन देवेन्द्र पान्डेय के रसूख के आगे ना तो  एफआईआर दर्ज की कार्रवाई हुई और ना ही बयान की प्रक्रिया पूरी हुई।

                                 पुलिस मे एफआईआर दर्ज नहीं होने का सीधा मतलब उच्च और सर्वोच्च न्यायालय का आदेश का खुल्लमखुल्ला  उलंघन है। जानकारी मिल रही है कि चारो आरोपी न्यायालय कार्यवाही की समय सीमा खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। आरोपियों को  शासन और  सरकार का भी समर्थन मिल रहा है।

                           जनता कांग्रेस उत्तर क्षेत्र प्रवक्ता मणिशंकर पाण्डेय ने बताया कि  उच्च न्यायालय की आदेशों की धज्जियां उडाई जा रही है। यदि एक सप्ताह के अंदर घोटाले के आरोपियों के खिलाफ पुलिस मे एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो  उच्च न्यायालय मे अवमानना याचिका दायर करूंगा। मणिशंकर ने बताया कि घोटालों का सरताज कोवापरेटीव  सहकारी बैंक  में 100 करोड़ का घोटाला हुआ है। जो किसी भी सूरत में पीएनबी  घोटाले से कम नहीं है। यही कारण है कि  कोवापरेटीव बैंक घोटाला साबित होने के बाद भी अभी तक किसी पर भी कार्यवाही नहीं हुई है। शासन दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है।

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