इंजीनियरों ने किया बंटाधार…कांंग्रेस नेता ने की सीबीआई जांच की मांग..कहा…मेंटनेंस मेंं खर्च हो रहे करोड़ोंं रूपए

बिलासपुर— कांग्रेस नेता शैलेन्द्र जायसवाल सिवरेज पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मौत ‘दर्द ,दुख तकलीफ ,बीमारियां सहते 10 साल गुजर गए पता ही नहीं चला । शहरी विकास मंत्रालय केंद्र शासन ने 18 मार्च 2008 को बिलासपुर के लिए सीवरेज प्रोजेक्ट की स्वीकृति दी। इसी दिन से बिलासपुर और बिलासपुर वासियों पर सीवरेज का ग्रहण लग गया। 10 सालों में परियोजना ने बहुत उतार चढ़ाव देखे लेकिन नतीजा कुछ हासिल नहीं हुआ है।

                     शैलेन्द्र ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि परियोजना फेल हो चुकी है। राज्य शासन के इंजीनियरों की एक्सपर्ट टीम ने परियोजना को साल भर पहले ही फ़ेल घोषित कर दिया है। इंजीनियरों ने कहा कि परियोजना शुल रू करने से पहले बिलासपुर की भौगोलिक स्थितियों की जानकारी नहीं लगी गयी। शैलेन्द्र के अनुसार परियोजना में ढेरों तकनीकी खामियां थी। निगम में कोई भी जानकार इंजीनियर नहीं था जो परियोजना की बारीकियों को समझता। इसका फायदा कंसल्टेंट मैनहार्ट को हुआ। कम्पनी ने पैसा बनाया और नौ दो ग्यारह हो गया।

                   शैलेन्द्र के अनुसार परियोजना शुरू होने के दो-तीन साल बाद सिवरेज को बिलासपुर के अयोग्य इंजीनियरों के हवाले कर दिया गया। परियोजना के 250 किलोमीटर की पाइप लाइन में डेढ़ सौ किलोमीटर से ज्यादा पाइप लाइन 6 इंच की डाली गयी। जिस 6 इंच की पाइप लाइन से घर का पानी निकलता है उस पाइप लाइन से पूरे मोहल्ले और सैकड़ों घरों का पानी निकालने की बेवकूफी की गयी।

                                25 से 30 फिट गहरे में 6 इंच की पाइप पिछले 10 सालों में जमीन के नीचे दफन होकर टूट फूट गए हैं। मिट्टी से गढ्डों को पाटा गया है।  साल दर साल मिट्टी धंसती गई। सड़कें भी धंसी। फिर शुरू हुआ मौत और दुर्घटनाओं का अंतहीन सिलसिला । सीवरेज के हादसों में न जाने कितनी जाने गईं कितनो के अंगभंग हुए। जिसका फिलहाल कोई रिकॉर्ड नही है। अस्थमा , दमा से हजारो फेफड़े बीमार हुए। परियोजना ने पूरे शहर को बीमार बीमार बना दिया। अब तो नवजात शिशु भी अस्थमा के साथ पैदा हो होने लगा है।

              शैलेन्द्र ने बताया कि सिवरेज का एक्सपोर्ट कंसल्टेंट कंपनी मैनहार्ट के पास था।  निगम और वर्तमान मार्श कंपनी के पास होने का सवाल ही नहीं उठता है। गली मोहल्ले के ठेकेदारों से पूरे प्रोजेक्ट का काम कराया गया । परियोजना में जमकर धांधली हुई। अंत में परियोजना को फेल होना और हुई भी। 13 अप्रैल 2013 को प्रदेश के मुखिया ने सरकंडा स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का उद्घाटन किया ।  2700 घरों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में टैंकर से पानी भरकर एरिएटर चलाकर लोगों को धोखा दिया गया । कुछ समय बाद लोगों ने सीवरेज का कनेक्शन निकाल कर फेंक दिया।

   कांग्रेस नेता ने कहा कि भ्रष्टाचार की हद हो गयी। सिवराज के चिल्हाटी प्लांट के लिए हर साल 90 लाख रुपए मेंटेनेंस में आज भी खर्च होता है। शहर को शायद इसकी जानकारी नहीं है। शैलेन्द्र ने कहा कि शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट दोमुहानी में भी स्थित है। प्लांट का का उद्घाटन 7 जनवरी 2018 को किया गया ।  दोमुहानी प्लांट भी फेल  हो गया। बंद प्लांट के मेंटेनेंस के लिए हर साल दो करोड़ की राशि दी जाएगी। जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स के पैसे का कैसे दुरुपयोग किया जा रहा है। इसका जीता जागता मिसाल है सिवरेज परियोजना।

               शैलेन्द्र के अनुसार परियोजना की सीबीआई जांच होनी चाहिए। जांच के बाद भ्रष्टाचार में शामिल कई चेहरे सामने आ जाएंगे। सीवरेज का गंदा खेल अब बंद होना चाहिए। परियोजना को जमीन में दफन कर दिया जाना चाहिए।

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