जिला सहकारी बैंक में फर्जीवाड़ों की भीड़…पूर्व सीईओ के सभी दस्तावेज फर्जी…मेडिकल सर्टिफिकेट भी जाली

बिलासपुर— परतदार परत जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के कारनामे सामने आ रहे हैं। बिलासपुर पूर्व सीईओ विकास गुरूदिवान का एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। विकास ने जो नौकरी के समय जो दस्तावेज जमा किए थे। जांच टीम ने फर्जी पाया है। रिपोर्ट आने के करीब डेढ़ साल भी अभी तक गुरूदिवान के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गयी है। जबकि संस्थानों ने दस्तावेजों का वेरिफिकेशन रिपोर्ट भी जिला सहकारी बैंक को बहुत पहले ही सौंप दिया है।

                                   जानकारी और प्रमाण के अनुसार जिन दस्तावेजों के आधार पर विकार गुरूदीवान को नौकरी मिली है। वह सभी दस्तावेज फर्जी और गलत तरीके से तैयार किये गये हैं। बैंक से हासिल दस्तावेज के अनुसार विकास गुरूदीवान ने आरक्षण पाने के लिए विकलांगता का प्रमाण पत्र जमा किया है..वह भी फर्जी है।

                 विकास गरूदीवान कलिंग विश्वविद्यालय रायपुर से 9 फरवरी 2005 में स्नातक किया। जबकि विकास गुरूदीवान अकलतरा से कामर्स में भी स्नातक हैं। कलिंगा विश्विद्यालय से स्नातक की पढ़ाई के दौरान विकास गुरूदीवान ने पीजीडीसीए भी 9 फरवरी 2005 में किया। एक साल दो डिग्री या डिप्लोम तात्कालीन समय संभव नहीं था। बावजूद इसके गुरूदीवान अकलतरा महाविद्यालय से कामर्स डिग्री और पीजीडीसीए डिप्लोंमा एक साथ एक ही सत्र में किया।

                                       मामले का खुलासा करीब दो साल पहले संयुक्त पंजीयक की अगुवाई में जांच पड़ताल के दौरान सामने आयी। राज्य शासन के निर्देश पर जिला सहकारी बैंक में वित्तीय और भर्ती घोटाला को लेकर जांच के दौरान मामला परत दर परत खुला।

                   इसी दौरान जांच टीम ने पाया कि करीब 50 लोग फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी पर कब्जा किया है। इसमें विकास गुरूदीवान भी एक हैं। नौकरी पाने के लिए विकास गुरूदीवान ने विकलांग प्रमाण पत्र भी जमा किया है। प्रमाण पत्र के अनुसार विकास गुरूदीवान कान से 48 प्रतिशत श्रवण बाधित हैं। मजेदार बात है कि नौकरी ज्वाइन करते समय विकास गुरूदीवान ने जिला सहकारी बैंक में मेडिकल रिपोर्ट भी जमा किया है। जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि वह पूरी तरह से स्वस्थ्य है। शरीर में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है। जबकि जिला सहकारी बैंक में आरक्षण या छूट का कोई प्रावधान नहीं है।

                       तात्कालीन जांच टीम ने गुरूदीवान के जमा किए गए सभी प्रमाण पत्र को फर्जी बताया। जांच टीम ने जांच पड़ताल के दौरान पाया कि जब गुरूदीवान ने ओव्हरएज में नौकरी ज्वाइन की है। नौकरी ज्वाइन करते समय विकास गुरूदीवान की उम्र 36 साल 9 महीने थी। आवनेदन जमा करते समय गुरूदीवान 36 साल 5 महीने के थे। जबकि जिला सहकारी बैंक ने विज्ञापन में तारीख के साथ स्पष्ट लिखा है कि आवेदन की अधिकतम आयु 35 साल से अधिक ना हो।

                    संयुक्त पंजीयक की जांच टीम ने गूरूदीवान समेत सभी फर्जी डिग्रीधारियों की रिपोर्ट शासन के हवाले किया। शासन के निर्देश पर जिला सहकारी बैंक को सभी फर्जी डिग्रीधारियों के खिलाफ एफआईआर करने का आदेश भी दिया। बावजूद इसके दो साल बीतने के बाद भी किसी भी फर्जी डिग्रीधारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया यहा। बैक प्रबंधन ने इसके अलावा भी किसी के खिलाफ कार्रवाई करना अभी तक उचित नहीं समझा है। इससे जाहिर होता है कि जिला सहकारी बैंक प्रबंधन गुरूदीवान समेत सभी फर्जी डिग्रीझारियों को बचाना चाहता है। बावजूद इसके बैंक प्रबंधन पर फर्जी डिग्री धारियों के पर लगातार एफआईआर दर्ज कराने का दबाव बनता जा रहा है।

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