शिक्षा कर्मियों के लिए खुली स्थानांतरण नीति जरूरी… एकल जीवन की मजबूरी…माया सिंह ने कहा – हम कमजोर नहीं

रायपुर । संयुक्त शिक्षाकर्मी संघ की प्रांतीय महिला प्रकोष्ठ उपाध्यक्ष  माया सिंह ने सरकार पर  आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ सरकार महिला शिक्षाकर्मियों की उपेक्षा कर रही है। आज प्रदेश की ट्रांफसर नीति ने महिला शिक्षा कर्मियों को एकल जीवन जीने पर मजबूर कर दिया है।
माया सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश में हाल ही में शिक्षकों के अंतर निकाय संविलियन (ट्रांसफर) में आए हुए आवेदनों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि अध्यापक (शिक्षाकर्मी) सरकार की पूर्व में बनाई हुई ट्रांसफर नीति से कितने पीड़ित थे। मध्यप्रदेश में हाल ही में आन लाइन आए हुए आवेदन हजारों आवेदन यह कहने के लिए काफी है कि देश मे  संविदा  शिक्षक किस स्थिति से गुजर रहा है।उत्तर प्रदेश, झारखंड  बिहार , उत्तर प्रदेश में भी लगभग यही स्थिति है। माया सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पूर्व में आये जिला पंचायतो में आवेदन यह बताते है कि शिक्षा कर्मीयो के लिए ट्रांफसर कितना महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ के शिक्षा कर्मियों की ट्रांसफर नीति पेचीदगियों से  भरी है। अब तक समय – समय पर जो भी ट्रांस्फ़र नीतियां आते गई उसमे शिक्षाकर्मियों को उचित लाभ नहीं मिला है। आज हालात ऐसे हो गए है कि ट्रांसफर की आस लागये छत्तीसगढ़ का शिक्षाकर्मी  महिला हो या पुरुष हो  परित्यक्ता का जीवन जी रहे हैं। वैवाहिक होकर भी  वैवाहिक नहीं है। प्रदेश की  शिक्षाकर्मियों की ट्रांसफर नीति ने संयुक्त परिवार को एकल परिवार में तब्दील कर दिया है।
संयुक्त शिक्षाकर्मी संघ की प्रांतीय महिला प्रकोष्ठ उपाध्यक्ष माया सिंह ने बताया कि आज भी ट्रांफसर नही होने का दंश झेल रही प्रदेश की महिला शिक्षाकर्मी कमजोर नहीं है। शिक्षाकर्मी की नॉकरी ने महिलाओं को आर्थिक व सामाजिक रूप से मजबूत बनाया है।  पर सामान्य जीवन जीने के लिए परिवार भी जरूरी है।इसके  लिए खुली ट्रांसफर नीति जरूरी है। अब तक 23 का कमेटियां बन चुकी है। और इन 23 कमेटियों में प्रमुख रूप से अब तक ट्रांसफर नीति को स्पष्ट नहीं किया गया कुछ महीने पूर्व में पंचायत संचालक   ने वेब पोर्टल के माध्यम से शिक्षाकर्मियों की ट्रांसफर नीति की बात कही थी जो अब तक सामने नहीं आई ।जबकि इससे पहले आ जाना चाहिए था। एक पोर्टल की प्लानिंग करने में बहुत ज्यादा समय नहीं लगता सभी शिक्षकों का डाटा पहले से ऑन लाइन सरकार के पास मौजूद है। संविलियन के लिए बनी हुई कमेटी का  कार्यकाल आगे बढ़ना ये दर्शा रहा है कि सरकार शिक्षा कर्मियों के लिए गंभीर नहीं है।
माया सिंह ने बताया कि मोर्चे ने संविलियन, खुली ट्रांफसर नीति सहित 9 सूत्रीय मांगों को लेकर कमेटी को दिये हुए ज्ञापन पर कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है।पर हम शान्त नही है।हम अपनी मैदानी स्तर पर तैयारियां कर रहे है।
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  1. By Krishnaraj

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  2. By manisha Mudaliar

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  3. By संजू

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  4. By KARTIK GAIKWAD

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  5. By Chandraprabha lahare

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